"निर्जला एकादशी" के अवतरणों में अंतर

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छो
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यह व्रत पर नर नारियो दोनो को करना चाहीए जलपान के निषिद्ध होने पर भी फलहार के साथ दुध लिया जा सकता है इस दिन निर्जल व्रत करते हुए शेषशायी रूप मे भगवान विष्णु की अराधना का विशेष महत्व है इस दिन ऊँ नमो भगवते वासुदेवायः का जाप करके गोदान, वस्त्र दान, छत्र, फल आदि का दान करना चाहीए।
 
== संदर्भसन्दर्भ ==
<references />