"मीठा नीम" के अवतरणों में अंतर

1 बैट् नीकाले गए ,  4 वर्ष पहले
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दक्षिण भारत व पश्चिमी-तट के राज्यों और [[श्रीलंका|श्री लंका]] के व्यंजनों के छौंक में, खासकर रसेदार व्यंजनों में, बिलकुल तेज पत्तों की तरह, इसकी पत्तियों का उपयोग बहुत महत्त्व रखता है। साधारणतया इसे पकाने की विधि की शुरुआत में कटे प्याज़ के साथ भुना जाता है। इसका उपयोग थोरण, वड़ा, रसम और कढ़ी बनाने में भी किया जाता है। इसकी ताज़ी पत्तियां न तो खुले में और न ही फ्रिज में ज़्यादा दिनों तक ताज़ा रहतीं हैं। वैसे ये पत्तियां सूखी हुई भी मिलती हैं पर उनमें ख़ुशबू बिलकुल नहीं के बराबर होती है।
 
''मुराया कोएनिजी (Murraya koenigii)'' की पत्तियों का आयुर्वेदिक चिकित्सा में जड़ी-बूटी के रूप में भी इस्तेमाल किया जाता है। इनके औषधीय गुणों में ऐंटी-डायबिटीक (anti-diabetic),<ref>{{cite journal |author=Arulselvan P, Senthilkumar GP, Sathish Kumar D, Subramanian S |title=Anti-diabetic effect of Murraya koenigii leaves on streptozotocin induced diabetic rats |journal=Pharmazie |volume=61 |issue=10 |pages=874–7 |year=2006 |month=Oct |pmid=17069429 }}</ref> ऐंटीऑक्सीडेंट (antioxidant),<ref name="pmid">{{cite journal | author = Arulselvan P, Subramanian SP | title = Beneficial effects of Murraya koenigii leaves on antioxidant defense system and ultra structural changes of pancreatic beta-cells in experimental diabetes in rats | journal = [[Chem Biol Interact]]. | volume =165 | issue = 2| pages = 155–64 | year = 2007 |month=Jan |pmid=17188670 |doi=10.1016/j.cbi.2006.10.014 | url = http://linkinghub.elsevier.com/retrieve/pii/S0009-2797(06)00342-5}}</ref> ऐंटीमाइक्रोबियल (antimicrobial), ऐंटी-इन्फ्लेमेटरी (anti-inflammatory), हिपैटोप्रोटेक्टिव (hepatoprotective), ऐंटी-हाइपरकोलेस्ट्रौलेमिक (anti-hypercholesterolemic) इत्यादि शामिल हैं।
कढ़ी पत्ता लम्बे और स्वस्थ बालों के लिए भी बहुत लाभकारी माना जाता है।{{Citation needed|date=August 2009}}