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[[File:Guru Gorakhnath.jpg|thumb|गोरखनाथ, पुरातन प्रतिमा (गोरखनाथ मठ, ओदाद्र, [[पोरबन्दर]], [[गुजरात]], [[भारत]])]]
'''गोरखनाथ'''' या '''गोरक्षनाथ''' जी महाराज ११वी से १२वी शताब्दी के [[नाथ सम्प्रदाय|नाथ योगी]] थे।<ref>Omacanda Hāṇḍā. Buddhist Art & Antiquities of Himachal Pradesh, Up to 8th Century A.D. Indus Publishing. p. 71.</ref><ref>Briggs (1938), p. 249</ref> गुरु गोरखनाथ जी ने पूरे [[भारत]] का भ्रमण किया और अनेकों ग्रन्थों की रचना की। गोरखनाथ जी का मन्दिर [[उत्तर प्रदेश]] के [[गोरखपुर]] नगर मे स्थित है। गोरखनाथ के नाम पर इस जिले का नाम गोरखपुर पडा है।
 
गुरु गोरखनाथ जी के नाम से ही [[नेपाल]] के [[गोरखा|गोरखाओं]] ने नाम पाया। नेपाल में एक जिला है [[गोरखा जिला|गोरखा]], उस जिले का नाम गोरखा भी इन्ही के नाम से पड़ा। माना जाता है कि गुरु गोरखनाथ सबसे पहले यहीं दिखे थे। गोरखा जिला में एक [[गुफा]] है जहाँ गोरखनाथ का पग चिन्ह है और उनकी एक मुर्ति भी है। यहाँ हर साल वैशाख पुर्णिमा को एक उत्सव मनाया जाता है जिसे 'रोट महोत्सव' कहते हैं और यहाँ [[मेला]] भी लगता है।
उनकी जीवनी का विवरण अज्ञात और विवादित हैं।Hagiographies एक मानव शिक्षक और समय के कानूनों जो अलग अलग उम्र में पृथ्वी पर दिखाई दिया के बाहर किसी से भी अधिक के रूप में उसे वर्णन है। इतिहासकारों राज्य गोरखनाथ 2 सहस्राब्दी सीई की पहली छमाही के दौरान कुछ समय से रहते थे, लेकिन वे जो इस सदी में सहमत नहीं हैं। 14 वीं सदी की Grierson के अनुमान को 12 वीं सदी को ब्रिग्स '11th- से पुरातत्व और पाठ रेंज के आधार पर अनुमान है।
 
गोरखनाथ हिंदू परंपरा में एक महा-योगी (या महान योगी) माना जाता है। उन्होंने कहा कि एक विशिष्ट आध्यात्मिक सिद्धांत या एक विशेष सत्य पर जोर नहीं था, लेकिन जोर देकर कहा कि सत्य और आध्यात्मिक जीवन के लिए खोज मूल्यवान और आदमी का एक सामान्य लक्ष्य है। [6] गोरखनाथ समाधि और एक की अपनी आध्यात्मिक सत्य तक पहुंचने के लिए एक साधन के रूप में योग, आध्यात्मिक अनुशासन और आत्मनिर्णय का एक नैतिक जीवन का समर्थन किया। [6] उनके अनुयायियों को भी, सैन्य, इस्लामी और ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के खिलाफ उत्पीड़न का विरोध मार्शल आर्ट और उच्च अधिकारियों के खिलाफ लक्षित प्रतिक्रिया विकसित करने के लिए 14 वीं सदी के बाद से योद्धा तपस्वी आंदोलन का हिस्सा रह चुके के लिए प्रसिद्ध हैं।
 
गोरखनाथ, उनके विचारों और योगियों ग्रामीण भारत में अत्यधिक लोकप्रिय हो गया है, मठों और उसे करने के लिए समर्पित मंदिर भारत के कई राज्यों में, विशेष रूप से गोरखपुर के eponymous शहर में में पाया गया। शहरी कुलीन वर्ग में, आंदोलन गोरखनाथ द्वारा स्थापित किया गया उपहास किया गया है।