"धर्म के लक्षण": अवतरणों में अंतर

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: '''अहिंसा सत्‍यमस्‍तेयं शौचमिन्‍द्रियनिग्रह:।'''
: '''दानं दमो दया शान्‍ति: सर्वेषां धर्मसाधनम्‌।।'''
''(अहिंसा, सत्य, चोरी न करना (अस्तेय), शौच (स्वच्छता), इन्द्रिय-निग्रह (इन्द्रियों को वश में रखना), दान, संयम (दम), दया एवं शान्ति)''
 
: अहिंसया सुशांत्या च अस्तेयेनापि वर्तते।
: एतैर्दशभिरगैस्तु धर्ममेव सुसूचयेत।।
''(अर्थात ब्रह्मचर्य, सत्य, तप, दान, संयम, क्षमा, शौच, अहिंसा, शांति और अस्तेय इन दस अंगों से युक्त होने पर ही धर्म की वृद्धि होती है।)''