"रहस्यवाद" के अवतरणों में अंतर

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हिंदी साहित्य में रहस्यवाद सर्वप्रथम मध्य काल में दिखाई पड़ता है | संत या निर्गुण काव्यधारा में कबीर के यहाँ, तो प्रेममार्गी या सूफी काव्यधारा में जायसी के यहाँ रहस्यवाद का प्रयोग हुआ है | दोनों परम सत्ता से जुड़ना चाहते हैं और उसमे लीन होना चाहते हैं, कबीर योग के माध्यम से तो जायसी प्रेम के माध्यम से ;इसलिए कबीर का रहस्यवाद अंतर्मुखी व साधनात्मक रहस्यवाद है ; जायसी का बहिर्मुखी व भावनात्मक रहस्यवाद है |
 
== रहस्यवाद के अंतर्गत प्रेम के स्तर ==
* प्रथम स्तर है अलौकिक सत्ता के प्रति आकर्षण।
* द्वितीय स्तर है- उस अलौकिक सत्ता के प्रति दृढ अनुराग।