मुख्य मेनू खोलें

बदलाव

41 बैट्स् नीकाले गए ,  2 वर्ष पहले
छो
बॉट: वर्तनी एकरूपता।
{{Infobox Indian Jurisdiction |
| नगर का नाम = समस्तीपुर
| latd = 25.90
| longd = 86.08
| जनगणना का वर्ष = २००१
| जनसंख्या = ३३,९४,७९३
| घनत्व = ११६९
| क्षेत्रफल = २९०४ sq. kms
| दूरभाष कोड = ९१(०)०६२७४
| पिनकोड = ८४८ xxx
| वाहन रेजिस्ट्रेशन कोड = BH-xx|
}}
'''समस्तीपुर ''' [[भारत]] गणराज्य के [[बिहार]] प्रान्त में [[दरभंगा]] प्रमंडल स्थित एक शहर एवं [[जिला]] है। समस्तीपुर के उत्तर में [[दरभंगा]], दक्षिण में [[गंगा नदी]] और [[पटना]] जिला, पश्चिम में [[मुजफ्फरपुर]] एवं [[वैशाली]], तथा पूर्व में [[बेगूसराय]] एवं [[खगड़िया]] जिले है। यहाँ शिक्षा का माध्यम [[हिंदी]], [[उर्दू]] और [[अंग्रेजी]] है लेकिन बोल-चाल में [[बज्जिका]] और [[मैथिली]] बोली जाती है। [[मिथिला]] क्षेत्र के परिधि पर स्थित यह जिला उपजाऊ कृषि प्रदेश है। समस्तीपुर [[पूर्व मध्य रेलवे]] का मंडल भी है। समस्तीपुर को मिथिला का प्रवेशद्वार भी कहा जाता है।
 
== नामाकरण ==
* '''विद्यापतिनगर''': शिव के अनन्य भक्त एवं महान मैथिल कवि [[विद्यापति]] ने यहाँ [[गंगा]] तट पर अपने जीवन के अंतिम दिन बिताए थे। ऐसी मान्यता है कि अपनी बिमारी के कारण विद्यापति जब गंगातट जाने में असमर्थ थे तो [[गंगा]] ने अपनी धारा बदल ली और उनके आश्रम के पास से बहने लगी। वह आश्रम लोगों की श्रद्धा का केंद्र है।
 
* '''धोली महादेव मंदिर''': धोली महादेव मंदिर, ग्राम हरिहरपुर खेढ़ी, प्रखंड खानपुर, जिला समस्तीपुर, बिहार। यह बाबा का स्थान समस्तीपुर से २० किलोमीटर दूर स्थित हैं यहाँ के पास मैं मसिना कोठी हैं जो अंग्रेज के समय का कोठी हैं यहाँ पर उस समय मैं नील की खेती करवाते थे लेकिन देश आजाद होने के बाद यहाँ पर अब मक्के की खेती एवं अन्य फसल का अनुसन्धान केंद्र बन गया हैं यहाँ के द्वारा तैयार किया हुआ बीज दूर दूर तक पहुचाया जाता हैं। इसके निकट के गाँव भोरेजयराम हैं जिसकी खेती करने का जमीन २२ सो एकर के आस पास हैं जहा मक्के की खेती की जाती है। यह स्थान बूढी गंडक नदी के किनारे स्थित हैं
 
* '''करियनः''' महामहिषी कुमारिलभट्ट के शिष्य महान दार्शनिक उदयनाचार्य का जन्म ९८४ ईस्वी में शिवाजीनगर प्रखंड के करियन गाँव में हुआ था। उदयनाचार्य ने न्याय, दर्शन एवं तर्क के क्षेत्र में लक्षमणमाला, न्यायकुशमांजिली, आत्मतत्वविवेक, किरणावली आदि पुस्तकें लिखी जिनपर अनगिनत संस्थानों में शोध चल रहा है। दुर्भाग्य से यह महत्वपूर्ण स्थल सरकार की उपेक्षा का शिकार है।<ref> [http://in.jagran.yahoo.com/news/local/bihar/4_4_5447251_1.html] उदयनाचार्य की जन्मभूमि पर जागरण समाचार </ref>