"हदीस" के अवतरणों में अंतर

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हज़रत पैगम्बर मुहम्मद के समय उनके साथ रहने वाले उनके साथी उनकी बातें उनके तरीके लिख लिया या याद कर लिया करते थे इसी को हदीस कहा गया , बाद में हदीस और फ़िक़ह के जानकार इमामो ने इन हदीसो को संग्रह कर के एक जगह ला दिया !
 
,इस्लाम का हज़रत मुहम्मद के रसूल बनने के साथ उसके विशुद्ध रूप में जब पुनः आगमन हुआ, उससे पहले के धर्म-ग्रथों में जो विकार आ गया था, उसके कई कारणों में से एक यह भी था कि ईश-वाणी, रसूल के कथन और दूसरे इन्सानों व धर्माचार्यों, उपदेशकों, वाचकों, सुधारकों और धर्मविदों आदि के कथन भी आपस में मिल-जुल गए; ईशवाणी और मनुष्य-वाणी के मिश्रण में, मूल ईश-ग्रंथ कितना है और इसके अंश कौन-कौन से हैं, यह जान सकना असंभव हो गया। पैग़म्बर के साथी हज़रत अबू सलमा की बयान की गई हदीस के मुताबिक़ आप ने हदीस-वर्णनकर्ताओं को सख़्त चेतावनी दी थी कि ‘‘जो व्यक्ति मुझ से संबंध लगाकर वह बात कहे जो मैंने नहीं कही, वह अपना ठिकाना जहन्नम (नर्क) में बना ले।’’
 
* हदीस-संग्रह : हदीस के निम्नलिखित छः विश्वसनीय संग्रह हैं जिनमें 29,578 हदीसें संग्रहित हैं :
# सहीह बुख़ारी : संग्रहकर्ता—अबू अब्दुल्लाह मुहम्मद-बिन-इस्माईल बुख़ारी, हदीसों की संख्या—7225
# सहीह मुस्लिम : संग्रहकर्ता—अबुल-हुसैन मुस्लिम-बिन-अल-हज्जाज, हदीसों की संख्या—4000
# सुनन तिर्मिज़ी : संग्रहकर्ता—अबू-ईसा मुहम्मद-बिन-ईसा तिर्मिज़ी, हदीसों की संख्या—3891