"ओंकारेश्वर मन्दिर" के अवतरणों में अंतर

[[चित्र:Mahakaleshnandia_महाकालेश्वर_नन्दी.jpg|अंगूठाकार|ओंकारेश्वर मन्दिर के द्वितीय तल पर स्थित महाकालेश्वर लिंग के बाहर स्थित नन्दी का दृश्य]]
 
ओंकारेश्वर मन्दिर में सीढ़ियाँ चढ़कर दूसरी मंजिल पर जाने पर महाकालेश्वर लिङ्ग के दर्शन होते हैं। यह लिङ्ग शिखर के नीचे है।
 
[[चित्र:Siddhnath_सिद्धनाथ.jpg|अंगूठाकार|ओंकारेश्वर मन्दिर के तृतीय तल पर स्थित सिद्धनाथ लिङ्ग का दृश्य]]
 
 
पांचवीं मंजिल पर ध्वजेश्वर लिङ्ग है।
 
तीसरी, चौथी व पांचवीं मंजिलों पर स्थित लिङ्गों के ऊपर स्थित छतों पर अष्टभुजाकार आकृतियां बनी हैं जो एक दूसरे में गुंथी हुई हैं। द्वितीय तल पर स्थित महाकालेश्वर लिङ्ग के ऊपर छत समतल न होकर शंक्वाकार है और वहां अष्टभुजाकार आकृतियां भी नहीं हैं। प्रथम और द्वितीय तलों के शिवलिङ्गों के प्राङ्गणों में नन्दी की मूर्तियां स्थापित हैं। तृतीय तल के प्राङ्गण में नन्दी की मूर्ति नहीं है। यह प्राङ्गण केवल खुली छत के रूप में है। चतुर्थ एवं पंचम तलों के प्रांगण नहीं हैं। वह केवल ओंकारेश्वर मन्दिर के शिखर में ही समाहित हैं। प्रथम तल पर जो नन्दी की मूर्ति है, उसकी हनु के नीचे एक स्तम्भ दिखाई देता है। ऐसा स्तम्भ नन्दी की अन्य मूर्तियों में विरल ही पाया जाता है।
 
श्रीओंकारेश्वरजी की परिक्रमा में रामेश्वर-मन्दिर तथा गौरीसोमनाथ के दर्शन हो जाते हैं। ओंकारेश्वर मन्दिर के पास अविमुतश्वर, ज्वालेश्वर, केदारेश्वर आदि कई मन्दिर हैं।
89

सम्पादन