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; (४) सामान्य (generalised approach)
यद्यपि पाणिनि ने अपना व्याकरण संस्कृत के लिये रचा, किन्तु इसकी युक्तियाँ और उपकरण सभी भाषाओं के व्याकरण के विश्लेषण में प्रयुक्त की जा सकती हैं।
 
; अन्य विशेषताएँ
* (क) [[वाक्य]] को भाषा की मूल इकाई मानना,
* (ख) [[ध्वनि]]-उत्पादन-प्रक्रिया का वर्णन एवं ध्वनियों का वर्गीकरण,
* (ग) सुबन्त एवं तिङ्न्त के रूप में सरल और सटीक पद-विभाग,
* (घ) [[व्युत्पत्ति]] - प्रकृति और [[प्रत्यय]] के आधार पर शब्दों का विवेचन।
 
अष्टाध्यायी में वैदिक संस्कृत और पाणिनि की समकालीन शिष्ट भाषा में प्रयुक्त संस्कृत का सर्वांगपूर्ण विचार किया गया है। वैदिक भाषा का व्याकरण अपेक्षाकृत और भी परिपूर्ण हो सकता था। पाणिनि ने अपनी समकालीन संस्कृत भाषा का बहुत अच्छा सर्वेक्षण किया था। इनके शब्दसंग्रह में तीन प्रकार की विशेष सूचियाँ आई हैं :