"उदन्त मार्तण्ड" के अवतरणों में अंतर

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उस समय [[अंग्रेजी]], [[फारसी]] और [[बंगला|बँगला]] में तो अनेक पत्र निकल रहे थे किंतु हिंदी में एक भी पत्र नहीं निकलता था। इसलिए "उदंत मार्तड" का प्रकाशन शुरू किया गया। इस पत्र में [[ब्रभाषा|ब्रज]] और [[खड़ीबोली]] दोनों के मिश्रित रूप का प्रयोग किया जाता था जिसे इस पत्र के संचालक ""मध्यदेशीय भाषा"" कहते थे।
 
==बाहरी कड़ियाँ==
*[http://www.srijangatha.com/2009-10/Feb/mulyankan-dr. virendra yadav1.htm हिंदी साहित्य के इतिहास में पत्र-पत्रिका की प्रांसगिकता] (डॉ. वीरेन्द्र यादव)
 
[[श्रेणी:हिन्दी]]
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