"भरतनाट्यम्" के अवतरणों में अंतर

126 बैट्स् जोड़े गए ,  3 वर्ष पहले
चित्र
छो (बॉट: वर्तनी एकरूपता।)
(चित्र)
[[चित्र:Dance bharatanatyam.jpg|thumb|right|150px|भरतनाट्यम नृत्य पर डाक टिकट]]'''भरतनाट्यम''' या '''चधिर अट्टम''' मुख्य रूप से दक्षिण भारत की शास्त्रीय नृत्य शैली है। यह [[भरत मुनि]] के [[नाट्य शास्त्र]] (जो ४०० ईपू का है) पर आधारित है। वर्तमान समय में इस नृत्य शैली का मुख्य रूप से महिलाओं द्वारा अभ्यास किया जाता है। इस नृत्य शैली के प्रेरणास्त्रोत चिदंबरम के प्राचीन मंदिर की मूर्तियों से आते हैं।
 भरतनाट्यम को सबसे प्राचीन नृत्य माना जाता है। इस नृत्य को तमिलनाडु में देवदासियों द्वारा विकसित व प्रसारित किया गया था| शुरू शुरू में इस नृत्य को देवदासियों के द्वारा विकसित होने के कारण उचित सम्मान नहीं मिल पाया| लेकिन बीसवी सदी के शुरू में ई. कृष्ण अय्यर और रुकीमणि देवी के प्रयासों से इस नृत्य को दुबारा स्थापित किया गया| भरत नाट्यम के दो भाग होते हैं इसे साधारणत दो अंशों में सम्पन्न किया जाता है पहला नृत्य और दुसरा अभिनय| नृत्य शरीर के अंगों से उत्पन्न होता है इसमें रस, भाव और काल्पनिक अभिव्यक्ति जरूरी है।
[[File:Bharatnatyam different facial expressions (5).jpg|thumb|left|300px|चेहरे की भावभंगिमा]]
 
भरतनाट्यम में शारीरिक प्रक्रिया को तीन भागों में बांटा जाता है -: समभंग, अभंग, त्रिभंग भरत नाट्यम में नृत्य क्रम इस प्रकार होता है।
आलारिपु - इस अंश में कविता(सोल्लू कुट्टू ) रहती है। इसी की छंद में आवृति होती है। तिश्र या मिश्र छंद तथा करताल और मृदंग के साथ यह अंश अनुष्ठित होता है, इसे इस नृत्यानुष्ठान कि भूमिका कहा जाता है।