"अल्बर्ट बंडूरा" के अवतरणों में अंतर

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व्यक्तित्व विकास की व्याख्या अल्वर्ट बैन्डूरा द्वारा प्रतिपादित ‘सामाजिक अधिगम सिद्धांत’ के आधार पर किया, गया है।परिवेशीय दशाएं व्यक्तित्व विकास को महत्वपूर्ण ढंग से प्रभावित करती है।इस सिद्धांत के प्रतिपादक बैन्डूरा एवं वाल्टर्स (1963) ने अपनी पुस्तक ‘ सोशल लंर्निग एन्ड पर्सनालिटी डेवेलपमेंट”’ में व्यक्तित्व विकास में पर्यावरणीय परिस्थिति के महत्व को प्रदर्शित किया है।डोलार्ड तथा मिलर (1941) के अनुसार, विकास मूलतः व्यक्ति एवं पर्यावरण की अन्तःक्रिया का परिणाम है।बैन्डूरा का मानना है कि व्यक्तित्व के विकास में सामाजिक, संज्ञानात्मक एवं प्रेक्षणात्मक कारक महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं।परिवेश हमारे व्यवहार का नियमन करता है।इसमें प्रेरकों, अंतनोर्दों या किसी के व्यक्तिगत जीवन में अंतद्वर्न्दों के स्थान पर वर्तमान परिस्थिति में लोगों के क्रियाकलापों पर बल दिया गया है (बैण्डूरा, 1973) |
व्यक्तित्व संरचना के विकास की व्याख्या, प्रमुख मानवतावादी मनोवैज्ञानिक कार्ल रोजर्स (190२ -1987) ने ‘स्व सिद्धांत’ के आधार पर प्रस्तुत किया।रोजर्स का मानना है कि प्राणी के सभी प्रकार के अनुभवों का केंद्र उसका शरीर होता है।अर्थात् मानव के साथ जो कुछ घटित होता है उसके लिए वह बहुत कुछ स्वयं जिम्मेदार है।रोजर्स ने व्यक्तित्व के विकास में ‘स्व’ तथा व्यक्ति की अनुभूतियों की संगति को महत्वपूर्ण बताया है।जब ‘स्व’ तथा अनुभूतियों के बीच अंतर उत्पन्न हो जाता है तो व्यक्ति में चिता उत्पन्न हो जाती है जिससे वह कुसमायोजित हो जाता है।रोजर्स का विश्वास था कि यदि व्यक्ति का ‘स्व’ उस व्यक्ति के वास्तविक अनुभवों के अनुरूप होता है तब व्यक्ति का समायोजन अच्छा होता है।इस प्रकार व्यक्तित्व के विकास में स्व की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है
 
==प्रसिद्ध कृतियां==
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