"एसीडिटी" के अवतरणों में अंतर

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=== '''परिचय''' ===
आमाशय के अंदर अम्लीय द्रव की क्रिया विधि और उससे जुड़े आंत व पाचन प्रक्रिया सुनिश्चित करने वाले ग्रंथियों के बीच असंतुलन होने के कारण अम्लता के लक्षण देखे जाते हैं. आम तौर पर आमाशय से अम्ल का स्त्राव होता है जोकि [[भोजन]] के पाचन के लिए आवश्यक है. यह अम्ल खाद्य पदार्थ को पाचन प्रक्रिया के लिए उपयुक्त बनाता है. जब आमाशय की ग्रंथियों से अम्ल का अधिक स्त्राव होता है तो इसका परिणाम अम्लता के रूप में देखने को मिलता है. हालांकि कई बार अम्ल का स्त्राव स्वाभाविक और सामान्य से कम रहने पर भी कई तरह की दर्द या नासूर का अनुभव देता है. एसीडिटी सीने में जलन, अपच और अल्सर के गठन जैसे लक्षणों का कारण बनता है. अत्यन्त कमजोर एवं भावुक व्यक्तियों में एसीडिटी का स्त्राव काफी अधिक होता है. यह विकसित और औद्योगिक देशों में आम है. हालांकि हाल ही में इसकी वृद्धि विकासशील देशों में भी हुई है. शराब की लत, [[मसाला|मसाले]]<nowiki/>दार खाद्य पदार्थ और अधिक मात्रा में [[दर्द]] निवारक गोलियां खाने से भी एसीडिटी की शिकायत बढ़ी है.<ref>[http://www.webhealthcentre.com/webhealth/DiseaseConditions/acidity.aspx]</ref>
 
=== '''कारण और फैलाव''' ===
आमाशय, आंत और पाचन ग्रंथियां हाइड्रोक्लोरिक अम्ल का स्त्राव करती है तथा विभिन्न किण्वक(एन्जाइम) समेत पाचक रस को संतुलित करती हैं और खाने को पचाती हैं. आमाशय इसी अम्ल और एन्जाइम से संरक्षित किया जाता है या आमाशय रस के द्वारा इसपर खतरा भी मंडराता रहता है. संवरणी प्रक्रिया, जो कि भाटा का निवारण करता है, उसमें कमी के कारण अम्ल ग्रसिका के निचले भाग में प्रवेश कर जाता है जिसकी वजह से सीने में जलन की शिकायत होती है. यह आमतौर पर भोजन ग्रहण करने के बाद होता है. आमाशय के अंदर अत्यधिक खाने की वजह से दबाव बनने से भी अम्ल का अत्यधिक स्त्राव होता है, जो अल्सर होने की एक प्रमुख वजह है. आमाशय में पहुंचे भोजन को पाच्य बनाने वाले रस, जो कि भोजन को टुकड़ों में खंडित करते हैं, के बीच असंतुलन के और भी कई कारक हैं.<ref>[http://www.webhealthcentre.com/webhealth/DiseaseConditions/acidity.aspx]</ref>
 
पेप्टिक अल्सर छोटी आंत के ऊपरी भाग के परत का हिस्सा है या जिसका सुरक्षात्मक, श्लैष्मिक परत अमाशय रस से घिसकर नष्ट हो चुका है. ड्योडिनल अल्सर आमाशय के अल्सर से तीन गुणा सामान्य है. हाइड्रोक्लोरिक अम्ल का स्त्राव अमाशय में होता है जो कि अल्सर के विकास का एक कारण है. हालांकि यह भी अल्सर के विकास के और भी कई कारण हैं. मरीजों में अम्ल का उत्पादन ग्रासिक अल्सर के विकास के कारण सामान्य से अधिक होता है, जबकि आमाशय या गैसीय अल्सर से ग्रसित मरीजों में अम्ल का उत्पादन औसत या औसत से कम होता है. कुछ परिस्थितियों में अत्यधिक मात्रा में अम्ल का स्त्राव होता है, उदाहरण के लिए जोलिंजर एलिजन सिन्ड्रॉम में अत्यधिक मात्रा में अबूर्ध के द्वारा स्त्राव होता है, जो कि अग्नाशय और छोटी आंतों और अमाशय के बीच स्थित होता है. पाचक रस एक किण्वक है, जो कि प्रोटीन को अलग करने का काम करता है. यदि अमाशय के रक्षकतंत्र में कोई बदलाव या खराबी आती है तो पेप्सिन और हाईड्रोक्लोरिक अम्ल, डियोडिनल या अमाशय के क्षति का कारण बनता है.<ref>[http://www.webhealthcentre.com/webhealth/DiseaseConditions/acidity.aspx]</ref>
 
एक चिपचिपी परत जो कि अमाशय और डियोजिनम को ढकती है और उनके लिए रक्षाकवच का उत्पादन करती है, वह अम्ल और पैप्सिन के प्रतिरोध में शरीर से बाई कार्बोनेट निकालती है. यह चिपचिपा पदार्थ अम्ल को प्रभावहीन कर देता है. रक्षा कवच अपने आप में हार्मोन जैसी चीजों को भी समाहित करता है, जिसे प्रोस्टेगलेन्डिस कहते हैं जो रक्तवाहिका को अमाशय में अभिस्तारण करने में मदद करती है और रक्त के समुचित प्रवाह को सुनिश्चित करती है. रक्त के अपर्याप्त मात्रा में प्रवाह की कमी से अमाशय में अल्सर होने की संभावना बढ़ जाती है. प्रोस्टेगलैन्डिस, बाई कार्बोनेट और म्यूकस के निर्माण को बढ़ावा देता है जो कि अमाशय को सुरक्षित करने में सहायक होता है.
 
=== '''लक्षण और पहचान :''' ===
सीने में जलन और अपच का लगातार होना एसीडिटी के सबसे महत्वपूर्ण लक्षण हैं. उरोस्ती के पीछे होने वाले जलन के साथ दर्द होने को ही दिल का जलन कहा गया है. यह खाने के बाद तथा आमाशय में अधिक दबाव होने के कारण पैदा होता है. उदाहरण के लिए भारी वजन उठाना. यह रात में लेटने के बाद भी होता है और व्यक्ति के खड़े हो जाने पर इससे आराम मिलता है. दर्द नजदीकी तौर पर किसी की अवस्था से भी जुड़ा हुआ होता है. उदर संबंधी [[उल्टी|उल्टि]]<nowiki/>यां भी आती है. अल्सर के लक्षण में मुख्यत: दर्द होता है जोकि या तो एक निश्चित जगह पर होता है या फिर दर्द अपना स्थान बदलते रहता है. कभी-कभी इसका दर्द सीने में या पीठ पर भी होता है. अपच, जलन या पेट के ऊपरी भाग में दर्द इसके सामान्य लक्षण हैं. जैसे कभी-कभी यह भी कहा गया है कि इसका दर्द पेट में छुड़े के घुसने जैसा होता है. कभी-कभार दर्द न होकर अपच या नाक के बहने की शिकायत होती है. डियोडिनल अल्सर में खाना खाने से राहत मिलती है लेकिन पेट के अल्सर में भोजन का कोई फर्क नहीं पड़ता है और इसका दर्द पर विपरीत प्रभाव पड़ता है. पेप्टिक अल्सर रोग कभी-कभी बिना किसी लक्षण के भी हो जाता है. कभी-कभार बिना अल्सर के भी लक्षण दिखाई देते हैं जिसे अल्सर रहित अपच कहते हैं. <ref>[http://www.webhealthcentre.com/webhealth/DiseaseConditions/acidity.aspx]</ref>
 
=== '''जांच और निदान क्रिया :''' ===
निदान के लिए रोग निषयक और पहले की स्थिति को जानना बहुत ही आवश्यक है. किसी भी स्थिति के कारण को जानने के लिए बहुत ही आवश्यक है यह जानना कि व्यक्ति कौन सी दवा लेता आया है या ले रहा है. यह भी जानना जरूरी होता है कि क्या उस व्यक्ति के परिवार में कोई अल्सर का पहले शिकार हो चुका है या फिर वह व्यक्ति धूम्रपान, तनाव आदि से ग्रसित है या नहीं. अम्ल का मुकाबला करने वाली दवा के चार सप्ताह के खुराक के साथ अम्लनिवारक गोलियों का परीक्षण किया जाता है. किसी किसी परिस्थिति में इसके लक्षण समाप्त हो जाते हैं और अगर लक्षण दिखाई देता है तो आगे की जांच की जरूरत होती है. अल्सर को खोजने में ऊपरी जठरांत्र की जांच की जाती है. अगर जालींजर एलिसन के लक्षण पाए जाते हैं, तो गैस्ट्रीन में रक्त के स्तर को मापा जाता है. जांच में अगर अल्सर की पुष्टि होती है तो सावधानीपूर्वक अल्सर का बायोप्सी लेते हैं.<ref>[http://www.webhealthcentre.com/webhealth/DiseaseConditions/acidity.aspx]</ref>
 
=== '''इलाज और पूर्व लक्षण :''' ===
कुछ आवश्यक कारक हैं जिनसे परहेज करना अम्ल के इलाज के लिए जरूरी है. साथ ही भोजन के उचित नियमों को अपनाना चाहिए जैसे मसालेदार खाने से परहेज, नमकीन या अम्लीय खाने से परहेज, धूम्रपान और शराब के सेवन को बंद कर देना चाहिए, मानसिक तनाव वाले कार्यों से बचना और तनाव का सामना के लिए जीवनशैली में बदलाव लाना चाहिए. अम्ल के अधिक स्त्राव से प्रत्याम्ल त्वरित राहत प्रदान करता है. दवाओं के थौक जैसे हाइड्रोजन अभिग्राही अवरोधक आमाशय को प्रभावित करता है तथा हिस्टेमाइन अवरोधक को बंद करके अम्ल के उत्पादन को कम कर देता है. प्रोटोन पंप अभिरोधक दवा कोशिका अम्ल के कार्य को बंद करती है, इस तरह की दवाओं में ओमेप्रेजोल और लेंसोप्रेजोल आता है. अगर अल्सर ने व्यक्ति को अपना शिकार बना लिया है तो यथाशीघ्र मरीज को इलाज करवाना चाहिए ताकि उसका विस्तार न हो. कई सप्ताह के दीर्घकालिक चिकित्सकीय उपचार के बाद अल्सर पूरी तरह ठीक होता है. शल्य तरीके से अम्ल के स्त्राव को कम करने के लिए आजकल वेगोटोमी का इस्तेमाल किया जा रहा है. <ref>[http://www.webhealthcentre.com/webhealth/DiseaseConditions/acidity.aspx]</ref>
 
=== '''निवारक :''' ===
इसके रोकथाम में प्रमुख रूप से ऐसे कारकों से बचना चाहिए - शराब, मसालेदार भोजन, एनएसएआईडी जैसी दवाइयां, स्टेराइड आदि. जो मरीज मानसिक अस्थिरता के शिकार रहते हैं और भावुक होते हैं तथा दफ्तर में अधिक तनाव से जूझते हैं उन्हें मनोवैज्ञानिक इलाज करवाना चाहिए. मांसाहारी भोजन पर नियंत्रण रखने से भी एसीडिटी को बहुत हद तक काबू में रखा जा सकता है.<ref>[http://www.webhealthcentre.com/webhealth/DiseaseConditions/acidity.aspx]</ref>
 
[[श्रेणी:रोग]]
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