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==ग्रन्थों में उल्लेख==
[[File:The Pushpak Aircraft.jpg|thumb|200px|चित्र रामायण में प्रदर्शित पुष्पक विमान]]
प्राचीन हिन्दू साहित्य में देव-शिल्पी विश्वकर्मा द्वारा बनाये गए अनेक विमानों का वर्णन मिलता है। जैसे वाल्मीकि रामायण के अनुसार शिल्पाचार्य विश्वकर्मा द्वारा पितामह [[ब्रह्मा]] के प्रयोग हेतु पुष्पक विमान का निर्माण किया गया था। विश्वकर्मा, की माता सती योगसिद्धा थीं।<ref>[http://www.bharatdiscovery.org/india/पुष्पक_विमान पुष्पक विमान], भारत डिस्कवरी पर। अभिगमन तिथि: २३ मार्च, २०१७</ref> देवताओं के साथ ही आठ वसु भी बताये जाते हैं, जिनमें आठवें [[वसु]] [[प्रभास]] की पत्नी योगसिद्धा थीं। यही प्रभास थे जिन्हें [[महाभारत]] के अनुसार [[वशिष्ठ]] ऋषि ने श्राप दिया था कि उन्हें मृत्यु लोक में काफ़ी समय व्यतीत करना होगा। तब गंगा ने उनकी माता बनना स्वीकार किया, तथा गंगा-[[शांतनु]] के आठवें पुत्र के रूप में उन्होंने देवव्रत नाम से जन्म लिया था, व कालांतर में अपनी भीषण प्रतिज्ञा के कारण [[भीष्म]] कहलाये थे। इन्हीं प्रभास-योगसिद्धा संतति विश्वकर्मा द्वारा देवताओं के विमान तथा अस्त्र-शस्त्र का तथा महल-प्रासादों का निर्माण किया जाता था। वाल्मीकि में इस विमान का विस्तार से वर्णन है:
 
[[File:The Pushpak Aircraft.jpg|thumb|200px|left| चित्र रामायण में प्रदर्शित पुष्पक विमान]]
 
''मेघों के समान उच्च, स्वर्ण समान कान्तिमय, पुष्पक भूमि पर एकत्रित स्वर्ण के समान प्रतीत होता था। ढेरों रत्नों से विभूषित, अनेक प्रकार के पुष्पों से आच्छादित तथा पुष्प-पराग से भरे हुए पर्वत शिखर के समान शोभा पाता था। विधुन्मालाओं से पूजित मेघ के समान रमणी रत्नों से देदीप्यमान था। आकाश में विचरण करते हुए यह श्रेष्ठ हंसों द्वारा खींचा जाते हुए दिखाई देता था। इसका निर्माण अति सुन्दर ढंग से किया गया था, एवं अद्भुत शोभा से सम्पन्न दिखता था। इसके निर्माण में अनेक धातुओं का प्रयोग इस प्रकार से किया गया था कि यह पर्वत शिखर ग्रहों और चन्द्रमा के कारण आकाश और अनेक वर्णों से युक्त विचित्र शोभासम्पन्न दिखता था। उसका भूमि क्षेत्र स्वर्ण-मण्डित कृत्रिम पर्वतमालाओं से परिपूर्ण था। वहां अनेक पर्वत वृक्षों की विस्तृत पंक्तियों से हरे भरे रचे गए थे। इन वृक्षों पर पुष्पों का बाहुल्य था एवं ये पुष्प पंखुडियों से पूर्ण मण्डित थे। उसके अन्दर श्वेत वर्ण के भवन थे तथा उसे विचित्र वन और अद्भुत सरोवरों के चित्रों से सज्ज किया गया था। वह रत्नों की आभा से प्रकाशमान था एवं आवश्यकतानुसार कहीं भी भ्रमण करता था।''<ref>[http://www.jangidjagat.com/Jangidjagat/JangidDharm/VishwakarmaVimanNirman.aspx अतुलनीय पुष्पक विमान] {{हिन्दी}}। अभिगमन तिथि: २४ मई, २०१३।</ref>