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==वेदों के विषय==
वेदोंवैदिक केऋषियौ विषयने उनकी व्याख्या पर निर्भर करते हैं। वैदिक ऋषियौनेवेदों वेदौंकोको जनकल्याणमे प्रवृत्त पाया | निस्संदेह जैसा कि -:[[''यथेमां वाचं कल्याणिमावदानि जनेभ्यः]]'' वैसा ही [[''वेदा हि यज्ञार्थमभिप्रवृत्ता कालानुपूर्व्याभिहिताश्च यज्ञाः तस्मादिदं कालविधानशास्त्रं यो ज्योतिषं वेद स वेद यज्ञम् ]]'' वेदौंकीवेदौं की प्रवृत्तिः जनकल्यणकेजनकल्यण कार्यमेके है।कार्य यज्ञमेमे [[है देवता, द्रव्य,वेद उद्देश्य,औरशब्द विधि]]आदिविद् विनियुक्त होते हैं।अग्नि, यज्ञ, सूर्य, इंद्र (बिजली के अर्थधातु में) जैसेघञ् विषयप्रत्यय इसमेंलगने बारंबारसे आतेबना हैं।है इसके अतिरिक्तसंस्कृत ब्रह्म,मायाग्रथों आत्मा,में जगदत्''विद् उत्पत्ति,ज्ञाने'' पदार्थोंऔर के''विद्‌ गुण,लाभे'' धर्मजैसे (उचित-अनुचित),विशेषणों दाम्पत्य,से ध्यान-योग,विद् प्राणधातु (श्वाससे कीज्ञान शक्ति)और जैसे विषय इसमें बारंबार दिखते हैं। ग्रंथोंलाभ के हिसाबअर्थ सेका इनकाबोध विवरण इस प्रकारहोता है -
 
वेदों के विषय उनकी व्याख्या पर निर्भर करते हैं - अग्नि, यज्ञ, सूर्य, इंद्र (आत्मा तथा बिजली के अर्थ में), सोम, ब्रह्म, मन-आत्मा, जगत्-उत्पत्ति, पदार्थों के गुण, धर्म (उचित-अनुचित), दाम्पत्य, ध्यान-योग, प्राण (श्वास की शक्ति) जैसे विषय इसमें बारंबार आते हैं । यज्ञ में [[ देवता, द्रव्य, उद्देश्य,और विधि]] आदि विनियुक्त होते हैं। ग्रंथों के हिसाब से इनका विवरण इस प्रकार है -
 
==== [[ऋग्वेद]] ====
#[[धनुर्वेद]] - युद्ध कला का विवरण। इसके ग्रंथ विलुप्त प्राय हैं।
#[[गन्धर्वेद]] - गायन कला।
#[[आयुर्वेद]] - वैदिक ज्ञान पर आधारित स्वास्थ्य विज्ञान।
 
== वेद के अंग, उपांग ==
8,287

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