"धर्मकीर्ति": अवतरणों में अंतर

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धर्मकीर्ति, [[प्रमाण]] के महापण्डित थे। [[प्रमाणवार्तिक]] उसका सबसे बड़ा एवं सबसे महत्वपूर्ण ग्रन्थ है जिसका प्रभाव भारत और तिब्बत के दार्शनिक चिन्तन पर पड़ा। इस पर अनेक भारतीय एवं तिब्बती विद्वानों ने टीका की है। वे [[योगाचार]] तथा सौत्रान्तिक सम्प्रदाय से भी सम्बन्धित थे। [[मीमांसा]], [[न्याय दर्शन|न्याय]], शैव और जैन सम्प्रदायों पर उनकी रचनाओं का प्रभाव पड़ा।
 
==कृतियाँ==
* सम्बन्धपरीक्षावृत्ति
* प्रमाणविनिश्चय
* प्रमाणवार्त्तिककारिका
* प्रमाणवार्त्तिकस्ववृत्ति
* न्यायबिन्दुप्रकरण
* हेतुबिन्दुनामप्रकरण
* वादन्यायनामप्रकरण
* सम्तानान्तरसिद्धिनामप्रकरण
 
==सन्दर्भ==