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chawalpuller.blogspot.in----------22 जून को मेरे यार अवश्यम्भावी उपराष्ट्रपति भगवान बरखास्त यंत्री प्रवासी भारतीय लेखक दिवेश भट्ट की फिर से पेशी है 26 जुलाई को अगला प्रथम नागरिक भारत का अगला राष्ट्रपति कौन होगा ? A. मुरली मनोहर जोशी / लाल कृष्ण आडवाणी B. वेंकैया नायडू / राम नाईक / थावर चंद गहलोत C. महिला द्रौपदी मुर्मू / राम नाईक / शरद पवार D. जनप्रतिनिधि भगवान 9479056341 बजरंगी भाईजान / बरखास्त उपयंत्री प्रवासी भारतीय लेखक 9981011455 दिवेश भट्ट ...............२६ जुलाई को अगला प्रथम नागरिक अवश्यम्भावी राष्ट्रपति जनप्रतिनिधि भगवान ९४७९०५६३४१ बजरंगी भाईजान & ०५ अगस्त को अगला द्वितीय नागरिक बरखास्त उपयंत्री प्रवासी भारतीय लेखक ९९८१०११४५५ दिवेश भट्ट भारत का अगला उपराष्ट्रपति सबसे पहले क्या करेंगे ? A. पत्रकार अजय साहू ९८२६१४५६८३ + संगीता सुपारी ९४२४२१९३१६ की हत्या B. जिंदा ईई इंजीनियर ज्ञान सिंह पिरोनिया ९४०६३••७६५ स्मृति ई फाइबर सीट मुद्रा परिवर्तन C. प्रसिद्ध लेखक भगवान के एन सिंह ७६९७१२८४९७ का त्रुटिहीन संविधान संशोधन D. सचिन ठेकेदार ९९२६२६३४१० को भारत रत्न अवार्ड " टट्टी बदल २ आन्दोलन २०१७ " E. पदग्रहण + पिंकी जानेमन का बिना कंडोम भरपेट भोजन www.ricepullers.in नक्सली समस्या का समूल उन्मूलन मादरचौद पर्चाछापू अजय साहू 09826145683 + कानूनपीऊ टोपो 09406368529 की सजा-ए-मौत के लिए फांसी का प्रबंध है – sd/- दु:ख- प्रताड़ना के हमकैदी साथी पूज्यपड़ोसी पितृतुल्य सट्टाकिग काजू बापूजी आंतरराष्ट्रीय दूरध्वनी क्रमांक 917898302875 कांशीराम गोंड़ 09424219316 पोस्ट आफिस पासीद की सजा-ए-मौत के लिए फांसी09406368529 राइसपुलर नौ NO नही 08412866644 स्वरगिनी संगीता 07587451660 झपकी 09407924284 I मेरे लेखन का षडयंत्र पगलाए मोहित पोस्को & नर्कगिन्नी को फाँसी चौ2 है I पृथ्वीवासिंदों से विनती की जाती है कि हितोपदेश + पंचतंत्र तथा अन्य नीति के ग्रंथों की नीतिकथाओं : मित्रलाभ : सुवर्णकंकणधारी बूढ़ा बाघ और मुसाफिर ; कबुतर, काक, कछुआ, मृग और चूहे ; मृग, काक और गीदड़ ; भैरव नामक शिकारी, मृग, शूकर, साँप और गीदड़ ; धूर्त गीदड़ और हाथी सुहृद्भेद; एक बनिया, बैल, सिंह और गीदड़ों ; धोबी, धोबन, गधा और कुत्ते ; सिंह, चूहा और बिलाव ; बंदर, घंटा और कराला नामक कुटनी ; सिंह और बूढ़ शशक ; कौए का जोड़ा और काले साँप : विग्रह : पक्षी और बंदरो ; बाघंबर ओढ़ा हुआ धोबी का गधा और खेतवाले ; हाथियों का झुंड और बूढ़े शशक ; हंस, कौआ और एक मुसाफिर ; नील से रंगे हुए एक गीदड़ ; राजकुमार और उसके पुत्र के बलिदान ; एक क्षत्रिय, नाई और भिखारी : संधि : सन्यासी और एक चूहे ; बूढ़े बगुले, केंकड़े और मछलियों ; सुन्द, उपसुन्द नामक दो दैत्यों ; एक ब्राह्मण, बकरा और तीन धुता ; माधव ब्राह्मण, उसका बालक, नेवला और साँप की कहानियाँ से सीखो - राइस पुलर & क्रेता- विक्रेता न ही होता है, न ही बंनता/बिकता है ; चावल खींचने कटोरी कॉपर आइटम, तांबे के प्राचीन सिक्के, इरीडियम सिक्का, लेबो तांबे का सिक्का, इंदिरा गाँधी सिक्का, लौंग खींचने – टचर ज्वालाशराबी, मशाल टेस्ट,एंटीआयरन, पाताल रखियातूमाडोड़काकुम्हड़ा, लाल प्याज, बीस नाखून कछुआ, हर्बल आइटम, इमली पल्प, नागमणी, गजमुक्ता, हर्बल पौधों, पलाश पेड़, लिलिपुट की साडे सात मन टट्टी और RPLPMPMMMNMIRROR की किसी भी अन्य अफवाहों से इससे पह्ले की इंडिया वाले बर्बाद होकर भिखारी @ फुटपाथपति हो जायें – क्यूं न (1) अग्ली & पगली औरत चमेलीबाई की हत्या करें ? (2) पृथ्वी से करीब सवा 100 करोड़ रुपए सुपाड़ी सशस्त्र लूटने पर धतुरिंबायीं को फांसी चौ२ की कोई फैंटसी हीं करें ? (3) चसमेवालेबाबाg को लेखन श्रेणी का नोबेल पुरस्कार सम्मानित करें; अपितु दुःशील, लंपट, व्यभिचारी, अविनीत, हठ, धृष्ट, चिड़चिड़ा, बदमिज़ाज, गुस्ताख , ढीठ , प्रतिकूल , शत्रुताकारी, निर्मोही, भावनाशून्य, निष्ठुर, अभद्र, अशिष्ट, विचारशून्य, हठीला, अड़ियल, मनमोजी, अपरिमाजित, दुराग्रही, उद्दाम, अननुकूल, ग़ैरमिलनसार, कर्कश, निरंकुश सनकी टोपो झक्की को @ 12 5 % = 15 6 Crore एवमस्तु बाबू ओं को 70-80 हजारो पिला दो I धन्यवाद I भारत गणराज्य की प्रगति इस बात पर निर्भर है कि :- इंडियन फगली किस-किस को कितना-कितना लूट रही है I संगीता झपकी की ज़िन्दगी समाज के लिये बर्बादी है | पगलो को इंडिया से करीब सवा 100 करोड़ रुपए सुपाड़ी सशस्त्र लूट करने की आशंका है ; सवा करोड़ लूट चुकी है जरुरत है तो उन्हें पायल बस से सुबह-सबेरे गलत दिशा फेकू दू + ए के ४७ दू और विदेशी लेखक डीकेभट्ट की 753 दिवस से भूखे प्यासे बिना एकाध रुपए वेतन, बिना एकाध रुपए जीवन निर्वाह गुजारा भत्ता, बिना पेंशन, बिना एकाध रुपए बैंक ऋण, बिना एकाध रुपए जीपीएफ़ जमापूँजी, बिना बीबी-बिना बच्चे, बिना रोटी कपड़ा; मकान; बिना एकाध दाल-बाटी, बिना एकाध ब्रेड, बिना एकाध रोटी, बिना एकाध पराठा-परौठा-परावठा, बिना एकाध पूरनपूरी, बिना एकाध कुल्चा-नान, बिना एकाध भटूरा-खाखाड़ा; सिर्फ केवल मात्र एकाध किलो सुअरफ्री टट्टी - रात को 2 बजे पुलिस भिजवाकर | मैं बेहद प्रसन्न हूं कि फगली हत्या योजना के तहत सामूहिक फांसी दूंगा | 22 वीं सदी फगली फ्री होगी -पवन जल्लाद I पत्र का विवरण पत्र क्रमांक - 991616006619 दिनांक - 06-04-2016 श्रेणी - ऑनलाइन जनदर्शन आवेदक का नाम - तिहाड़वासी निलंबित दिवेश भट्ट आवेदक का पता - केदी नम्बरदार 363 प्रगति सदन बेरक नम्बर 03 जिल्हा जेल दंतेवाड़ा 494449 आवेदक का जिला - दन्तेवाड़ा विषय - Chawalpuller.blogspot.in + www.ricepullers.in बिना अनुमति शासकीय तीव्र खनन यूनिट COP4-12 से न्यायाधीशों के निजी बंगले चितालंका में तथाकथित सुपारी के एवज में नलकूप खनन की सौरभ कुमार नवनियुक्त दंतेवाड़ा कलेक्टर के माध्यम से सीबीआई जांच पड़ताल कराकर मनोरोगी सहायक यंत्री डी ऐन श्रीवास्तव 09407924284 को बर्खास्त कर कामता प्रसाद 0924219316 बाबू झूठी गवाही + झूठी शिकायत कोर्ट में आत्मत्राण कराकर पुनः शासन की नियमित सेवार्थ हेतु हत्या/आत्महत्या पूर्व अनन्तिम याचना. 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'''कार्ल हेनरिख मार्क्स''' (1818 - 1883) जर्मन दार्शनिक, अर्थशास्त्री और वैज्ञानिक समाजवाद का प्रणेता थे। इनका जन्म 5 मई 1818 को त्रेवेस (प्रशा) के एक [[यहूदी]] परिवार में हुआ। 1824 में इनके परिवार ने ईसाई धर्म स्वीकार कर लिया। 17 वर्ष की अवस्था में मार्क्स ने कानून का अध्ययन करने के लिए [[बॉन विश्वविद्यालय]] में प्रवेश लिया। तत्पश्चात्‌ उन्होंने बर्लिन और जेना विश्वविद्यालयों में साहित्य, इतिहास और दर्शन का अध्ययन किया। इसी काल में वह हीगेल के दर्शन से बहुत प्रभावित हुए। 1839-41 में उन्होंने [[दिमॉक्रितस]] और [[एपीक्यूरस]] के प्राकृतिक दर्शन पर शोध-प्रबंध लिखकर डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की।
 
शिक्षा समाप्त करने के पश्चात्‌ 1842 में मार्क्स उसी वर्ष कोलोन से प्रकाशित 'राइनिशे जीतुंग' पत्र में पहले लेखक और तत्पश्चात्‌ संपादक के रूप में सम्मिलित हुआ किंतु सर्वहारा क्रांति के विचारों के प्रतिपादन और प्रसार करने के कारण 15 महीने बाद ही 1843 में उस पत्र का प्रकाशन बंद करवा दिया गया। मार्क्स पेरिस चला गया, वहाँ उसने 'द्यूस फ्रांजोसिश' जारबूशर पत्र में हीगेल के नैतिक दर्शन पर अनेक लेख लिखे। 1845 में वह फ्रांस से निष्कासित होकर ब्रूसेल्स चला गया और वहीं उसने जर्मनी के मजदूर सगंठन और 'कम्युनिस्ट लीग' के निर्माण में सक्रिय योग दिया। 1847 में एजेंल्स के साथ 'अंतराष्ट्रीय समाजवाद' का प्रथम घोषणापत्र ([[कम्युनिस्ट पार्टी का घोषणापत्र|कम्युनिस्ट मॉनिफेस्टो]]) प्रकाशित किया
 
1848 में मार्क्स ने पुन: कोलोन में 'नेवे राइनिशे जीतुंग' का संपादन प्रारंभ किया और उसके माध्यम से जर्मनी को समाजवादी क्रांति का संदेश देना आरंभ किया। 1849 में इसी अपराघ में वह प्रशा से निष्कासित हुआ। वह पेरिस होते हुए लंदन चला गया जीवन पर्यंत वहीं रहा। लंदन में सबसे पहले उसने 'कम्युनिस्ट लीग' की स्थापना का प्रयास किया, किंतु उसमें फूट पड़ गई। अंत में मार्क्स को उसे भंग कर देना पड़ा। उसका 'नेवे राइनिश जीतुंग' भी केवल छह अंको में निकल कर बंद हो गया।
[[चित्र:Marxengelskolkata (9).JPG|thumb|[[कोलकाता]], [[भारत]]]]
1859 में मार्क्स ने अपने अर्थशास्त्रीय अध्ययन के निष्कर्ष 'जुर क्रिटिक दर पोलिटिशेन एकानामी' नामक पुस्तक में प्रकाशित किये। यह पुस्तक मार्क्स की उस बृहत्तर योजना का एक भाग थी, जो उसने संपुर्ण राजनीतिक अर्थशास्त्र पर लिखने के लिए बनाई थी। किंतु कुछ ही दिनो में उसे लगा कि उपलब्ध साम्रगी उसकी योजना में पूर्ण रूपेण सहायक नहीं हो सकती। अत: उसने अपनी योजना में परिवर्तन करके नए सिरे से लिखना आंरभ किया और उसका प्रथम भाग 1867 में [[दास कैपिटल]] (द कैपिटल, हिंदी में ''पूंजी'' शीर्षक से प्रगति प्रकाशन मास्‍को से चार भागों में) के नाम से प्रकाशित किया। 'द कैपिटल' के शेष भाग मार्क्स की मृत्यु के बाद [[एंजेल्स]] ने संपादित करके प्रकाशित किए। '[[वर्गसंघर्ष]]' का सिद्धांत मार्क्स के '[[वैज्ञानिक समाजवाद]]' का मेरूदंड है। इसका विस्तार करते हुए उसने इतिहास की भौतिकवादी व्याख्या और बेशी मूल्य (सरप्लस वैल्यू) के सिद्धांत की स्थापनाएँ कीं। मार्क्स के सारे आर्थिक और राजनीतिक निष्कर्ष इन्हीं स्थापनाओं पर आधारित हैं।
 
1864 में लंदन में 'अंतरराष्ट्रीय मजदूर संघ' की स्थापना में मार्क्स ने बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। संघ की सभी घोषणाएँ, नीतिश् और कार्यक्रम मार्क्स द्वारा ही तैयार किये जाते थे। कोई एक वर्ष तक संघ का कार्य सुचारू रूप से चलता रहा, किंतु बाकुनिन के अराजकतावादी आंदोलन, फ्रांसीसी जर्मन युद्ध और पेरिस कम्यूनों के चलते 'अंतरराष्ट्रीय मजदूर संघ' भंग हो गया। किंतु उसकी प्रवृति और चेतना अनेक देशों में समाजवादी और श्रमिक पार्टियों के अस्तित्व के कारण कायम रही।
 
'अंतरराष्ट्रीय मजदूर संघ' भंग हो जाने पर मार्क्स ने पुन: लेखनी उठाई। किंतु निरंतर अस्वस्थता के कारण उसके शोधकार्य में अनेक बाधाएँ आईं। मार्च 14, 1883 को मार्क्स के तूफानी जीवन की कहानी समाप्त हो गई। मार्क्स का प्राय: सारा जीवन भयानक आर्थिक संकटों के बीच व्यतीत हुआ। उसकी छह संतानो में तीन कन्याएँ ही जीवित रहीं।
 
== पूँजी ==
मेहनतकशों की तहरीक में एक नए तूफ़ान की पेशबीनी करते हुए मार्क्स ने कोशिश की कि अपनी अर्थशास्त्रीय रचनाएँ करने की रफ़्तार तेज़ कर दे। अठारह माह की ताख़ीर के बाद जब उस ने अपने अर्थशास्त्रीय अध्ययन का फिर से आग़ाज़ किया तो उस ने इस रचना को अज नए सिरे से तर्तीब देने का फ़ैसला किया। और उस को 1859 में प्रकाशित ''जुर क्रिटिक दर पोलिटिशेन एकानामी'' में हिस्से के रूप में ना छापा जाये, बल्कि ये एक अलग किताब हो। 1862 में उस ने ईल कजलमीन को मतला किया कि इस का नाम ''द कैपिटल'' और तहती नाम ''राजनीतिक अर्थव्यवस्था की आलोचना'' होगा। द कैपिटल इंतिहाई मुश्किल हालात में लिखी गई। अमरीकी ख़ानाजंगी की वजह से मार्क्स अपनी आमदनी का बड़ा ज़रीया खो चुका था। अब वो न्यूयार्क के रोज़नामा द ट्रिब्यून के लिए नहीं लिख सकता था। उस के बाल बच्चों के लिए इंतिहाई मुश्किलों का ज़माना फिर आ गया। ऐसी सूरत-ए-हाल में अगर एंगलज़ की तरफ़ से मुतवातिर और बेग़रज़ माली इमदाद ना मिलती तो मार्क्स कैपिटल की तकमील ना कर सकता।
कैपिटल में कार्ल मार्क्स का प्रस्ताव है कि पूंजीवाद के प्रेरित बल श्रम, जिसका काम अवैतनिक लाभ और अधिशेष मूल्य के परम स्रोत के शोषण करने में है।
 
 
==सन्दर्भ==
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== बाहरी कड़ियाँ ==
* [http://taptilok.com/pages/details.php?detail_sl_no=603&cat_sl_no=9 भारतीयता और मार्क्सवाद]
* [http://www.omprakashkashyap.wordpress.com/कार्ल मार्क्स : वैज्ञानिक समाजवादी]
* [http://www.marxists.org मार्क्सवादी]
* [http://hi.wordpress.com/tag/मार्क्स/ कार्ल मार्क्स से सम्बंधित ब्लौग पोस्टें/लेख/संस्मरण]
* [http://www.achhikhabar.com/2013/01/27/karl-marx-quotes-in-hindi/ कार्ल मार्क्स के अनमोल विचार]
 
{{साँचा:अर्थशास्त्र}}
 
[[श्रेणी:मार्क्सवाद]]
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