"जवाहरलाल नेहरू" के अवतरणों में अंतर

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chawalpuller.blogspot.in----------22 जून को मेरे यार अवश्यम्भावी उपराष्ट्रपति भगवान बरखास्त यंत्री प्रवासी भारतीय लेखक दिवेश भट्ट की फिर से पेशी है 26 जुलाई को अगला प्रथम नागरिक भारत का अगला राष्ट्रपति कौन होगा ? A. मुरली मनोहर जोशी / लाल कृष्ण आडवाणी B. वेंकैया नायडू / राम नाईक / थावर चंद गहलोत C. महिला द्रौपदी मुर्मू / राम नाईक / शरद पवार D. जनप्रतिनिधि भगवान 9479056341 बजरंगी भाईजान / बरखास्त उपयंत्री प्रवासी भारतीय लेखक 9981011455 दिवेश भट्ट ...............२६ जुलाई को अगला प्रथम नागरिक अवश्यम्भावी राष्ट्रपति जनप्रतिनिधि भगवान ९४७९०५६३४१ बजरंगी भाईजान & ०५ अगस्त को अगला द्वितीय नागरिक बरखास्त उपयंत्री प्रवासी भारतीय लेखक ९९८१०११४५५ दिवेश भट्ट भारत का अगला उपराष्ट्रपति सबसे पहले क्या करेंगे ? A. पत्रकार अजय साहू ९८२६१४५६८३ + संगीता सुपारी ९४२४२१९३१६ की हत्या B. जिंदा ईई इंजीनियर ज्ञान सिंह पिरोनिया ९४०६३••७६५ स्मृति ई फाइबर सीट मुद्रा परिवर्तन C. प्रसिद्ध लेखक भगवान के एन सिंह ७६९७१२८४९७ का त्रुटिहीन संविधान संशोधन D. सचिन ठेकेदार ९९२६२६३४१० को भारत रत्न अवार्ड " टट्टी बदल २ आन्दोलन २०१७ " E. पदग्रहण + पिंकी जानेमन का बिना कंडोम भरपेट भोजन www.ricepullers.in नक्सली समस्या का समूल उन्मूलन मादरचौद पर्चाछापू अजय साहू 09826145683 + कानूनपीऊ टोपो 09406368529 की सजा-ए-मौत के लिए फांसी का प्रबंध है – sd/- दु:ख- प्रताड़ना के हमकैदी साथी पूज्यपड़ोसी पितृतुल्य सट्टाकिग काजू बापूजी आंतरराष्ट्रीय दूरध्वनी क्रमांक 917898302875 कांशीराम गोंड़ 09424219316 पोस्ट आफिस पासीद की सजा-ए-मौत के लिए फांसी09406368529 राइसपुलर नौ NO नही 08412866644 स्वरगिनी संगीता 07587451660 झपकी 09407924284 I मेरे लेखन का षडयंत्र पगलाए मोहित पोस्को & नर्कगिन्नी को फाँसी चौ2 है I पृथ्वीवासिंदों से विनती की जाती है कि हितोपदेश + पंचतंत्र तथा अन्य नीति के ग्रंथों की नीतिकथाओं : मित्रलाभ : सुवर्णकंकणधारी बूढ़ा बाघ और मुसाफिर ; कबुतर, काक, कछुआ, मृग और चूहे ; मृग, काक और गीदड़ ; भैरव नामक शिकारी, मृग, शूकर, साँप और गीदड़ ; धूर्त गीदड़ और हाथी सुहृद्भेद; एक बनिया, बैल, सिंह और गीदड़ों ; धोबी, धोबन, गधा और कुत्ते ; सिंह, चूहा और बिलाव ; बंदर, घंटा और कराला नामक कुटनी ; सिंह और बूढ़ शशक ; कौए का जोड़ा और काले साँप : विग्रह : पक्षी और बंदरो ; बाघंबर ओढ़ा हुआ धोबी का गधा और खेतवाले ; हाथियों का झुंड और बूढ़े शशक ; हंस, कौआ और एक मुसाफिर ; नील से रंगे हुए एक गीदड़ ; राजकुमार और उसके पुत्र के बलिदान ; एक क्षत्रिय, नाई और भिखारी : संधि : सन्यासी और एक चूहे ; बूढ़े बगुले, केंकड़े और मछलियों ; सुन्द, उपसुन्द नामक दो दैत्यों ; एक ब्राह्मण, बकरा और तीन धुता ; माधव ब्राह्मण, उसका बालक, नेवला और साँप की कहानियाँ से सीखो - राइस पुलर & क्रेता- विक्रेता न ही होता है, न ही बंनता/बिकता है ; चावल खींचने कटोरी कॉपर आइटम, तांबे के प्राचीन सिक्के, इरीडियम सिक्का, लेबो तांबे का सिक्का, इंदिरा गाँधी सिक्का, लौंग खींचने – टचर ज्वालाशराबी, मशाल टेस्ट,एंटीआयरन, पाताल रखियातूमाडोड़काकुम्हड़ा, लाल प्याज, बीस नाखून कछुआ, हर्बल आइटम, इमली पल्प, नागमणी, गजमुक्ता, हर्बल पौधों, पलाश पेड़, लिलिपुट की साडे सात मन टट्टी और RPLPMPMMMNMIRROR की किसी भी अन्य अफवाहों से इससे पह्ले की इंडिया वाले बर्बाद होकर भिखारी @ फुटपाथपति हो जायें – क्यूं न (1) अग्ली & पगली औरत चमेलीबाई की हत्या करें ? (2) पृथ्वी से करीब सवा 100 करोड़ रुपए सुपाड़ी सशस्त्र लूटने पर धतुरिंबायीं को फांसी चौ२ की कोई फैंटसी हीं करें ? (3) चसमेवालेबाबाg को लेखन श्रेणी का नोबेल पुरस्कार सम्मानित करें; अपितु दुःशील, लंपट, व्यभिचारी, अविनीत, हठ, धृष्ट, चिड़चिड़ा, बदमिज़ाज, गुस्ताख , ढीठ , प्रतिकूल , शत्रुताकारी, निर्मोही, भावनाशून्य, निष्ठुर, अभद्र, अशिष्ट, विचारशून्य, हठीला, अड़ियल, मनमोजी, अपरिमाजित, दुराग्रही, उद्दाम, अननुकूल, ग़ैरमिलनसार, कर्कश, निरंकुश सनकी टोपो झक्की को @ 12 5 % = 15 6 Crore एवमस्तु बाबू ओं को 70-80 हजारो पिला दो I धन्यवाद I भारत गणराज्य की प्रगति इस बात पर निर्भर है कि :- इंडियन फगली किस-किस को कितना-कितना लूट रही है I संगीता झपकी की ज़िन्दगी समाज के लिये बर्बादी है | पगलो को इंडिया से करीब सवा 100 करोड़ रुपए सुपाड़ी सशस्त्र लूट करने की आशंका है ; सवा करोड़ लूट चुकी है जरुरत है तो उन्हें पायल बस से सुबह-सबेरे गलत दिशा फेकू दू + ए के ४७ दू और विदेशी लेखक डीकेभट्ट की 753 दिवस से भूखे प्यासे बिना एकाध रुपए वेतन, बिना एकाध रुपए जीवन निर्वाह गुजारा भत्ता, बिना पेंशन, बिना एकाध रुपए बैंक ऋण, बिना एकाध रुपए जीपीएफ़ जमापूँजी, बिना बीबी-बिना बच्चे, बिना रोटी कपड़ा; मकान; बिना एकाध दाल-बाटी, बिना एकाध ब्रेड, बिना एकाध रोटी, बिना एकाध पराठा-परौठा-परावठा, बिना एकाध पूरनपूरी, बिना एकाध कुल्चा-नान, बिना एकाध भटूरा-खाखाड़ा; सिर्फ केवल मात्र एकाध किलो सुअरफ्री टट्टी - रात को 2 बजे पुलिस भिजवाकर | मैं बेहद प्रसन्न हूं कि फगली हत्या योजना के तहत सामूहिक फांसी दूंगा | 22 वीं सदी फगली फ्री होगी -पवन जल्लाद I पत्र का विवरण पत्र क्रमांक - 991616006619 दिनांक - 06-04-2016 श्रेणी - ऑनलाइन जनदर्शन आवेदक का नाम - तिहाड़वासी निलंबित दिवेश भट्ट आवेदक का पता - केदी नम्बरदार 363 प्रगति सदन बेरक नम्बर 03 जिल्हा जेल दंतेवाड़ा 494449 आवेदक का जिला - दन्तेवाड़ा विषय - Chawalpuller.blogspot.in + www.ricepullers.in बिना अनुमति शासकीय तीव्र खनन यूनिट COP4-12 से न्यायाधीशों के निजी बंगले चितालंका में तथाकथित सुपारी के एवज में नलकूप खनन की सौरभ कुमार नवनियुक्त दंतेवाड़ा कलेक्टर के माध्यम से सीबीआई जांच पड़ताल कराकर मनोरोगी सहायक यंत्री डी ऐन श्रीवास्तव 09407924284 को बर्खास्त कर कामता प्रसाद 0924219316 बाबू झूठी गवाही + झूठी शिकायत कोर्ट में आत्मत्राण कराकर पुनः शासन की नियमित सेवार्थ हेतु हत्या/आत्महत्या पूर्व अनन्तिम याचना. SSUSPEND ENGINEER DIVESH BHATT Mo 09981011455 REFERENCE http://cg.nic.in/jandarshan/<nowiki/>991614000403 + 991615004144 + 991516006067 + 991615004145 +991615004622 + 991616004899 देवानंद श्रीवास्तव 07587451660 + 09407924284 + 09826145683 = 09406368529 & पगली औरत चमेलीबाई 07587875477 + 09424219316 की हत्या करें ? AAJ KI TAAJA KHABAR . MEATHERCHOD SWAI DEVRAJAN JO LEBBO PAR RAIN KARTA THA AUR RP MAGNET KHISKANE LAGA THA AB NAYA KAAM KAR RAHA HE . D K BHATT USKE VIDEO ME TATTI KAR DETA HE BHOSDI KA SAAF KARTA HE . D K BHATT NE dantewada 000 to 999 @gmail.com naam se 1000 id bana di he. www.ricepulleroo.in se 999 dot in tak 1000 free blog aur 5000 free website 17000 post bhi bana mare he. you tube ke sabhi magnet video se india bachana aur SANGITA MARI ki choot chodna MAHATMA GANDHI ki zindgi ka ek hi uddeya he.JAI HIND 09407924284 + 09406368529
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|honorific-prefix = [[पण्डित]]
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|caption = 1947 में जवाहरलाल नेहरू
|office = [[भारत के प्रधानमन्त्रियों की सूची|भारत के प्रथम]] [[भारत का प्रधानमन्त्री|प्रधानमन्त्री]]
|monarch = [[जॉर्ज षष्ठम्]]<br>(26 जनवरी 1950 तक)
|governor_general = [[लुईस माउंटबेटन, बर्मा के पहले अर्ल माउंटबेटन|बर्मा के पहले अर्ल माउंटबेटन]]<br>[[चक्रवर्ती राजगोपालाचारी]]<br>(26 जनवरी 1950 तक)
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|awards = [[File:Bharat Ratna Ribbon.svg|30px]] [[भारत रत्न]] (1955)
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'''जवाहरलाल नेहरू''' (नवंबर १४, १८८९ - मई २७, १९६४) [[भारत]] के [[भारत के प्रधानमन्त्रियों की सूची|प्रथम]] [[भारत का प्रधानमन्त्री|प्रधानमन्त्री]] थे और स्वतन्त्रता के पूर्व और पश्चात् की भारतीय राजनीति में केन्द्रीय व्यक्तित्व थे। [[महात्मा गांधी]] के संरक्षण में, वे [[भारतीय स्वतन्त्रता आन्दोलन]] के सर्वोच्च नेता के रूप में उभरे और उन्होंने १९४७ में भारत के एक स्वतन्त्र राष्ट्र के रूप में स्थापना से लेकर १९६४ तक अपने निधन तक, भारत का शासन किया। वे आधुनिक भारतीय राष्ट्र-राज्य – एक सम्प्रभु, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष, और लोकतान्त्रिक गणतन्त्र - के वास्तुकार मानें जाते हैं। [[कश्मीरी पण्डित]] समुदाय के साथ उनके मूल की वजह से वे '''पण्डित नेहरू''' भी बुलाएँ जाते थे, जबकि भारतीय बच्चे उन्हें '''चाचा नेहरू''' के रूप में जानते हैं।<ref>{{cite web|url=http://inc.in/organization/2-Pandit%20Jawaharlal%20Nehru/profile|title=Indian National Congress|work=inc.in}}</ref><ref>{{cite web|last=|first=|title=Nation pays tribute to Pandit Jawaharlal Nehru on his 124th birth anniversary|url=http://www.dnaindia.com/india/report-nation-pays-tribute-to-pandit-jawaharlal-nehru-on-his-124th-birth-anniversary-1918978|accessdate=28 February 2015}}</ref>
 
स्वतन्त्र भारत के प्रथम प्रधानमन्त्री का पद सँभालने के लिए कांग्रेस द्वारा नेहरू निर्वाचित हुएँ, यद्यपि नेतृत्व का प्रश्न बहुत पहले 1941 में ही सुलझ चुका था, जब गांधीजी ने नेहरू को उनके राजनीतिक वारिस और उत्तराधिकारी के रूप में अभिस्वीकार किया। प्रधानमन्त्री के रूप में, वे भारत के सपने को साकार करने के लिए चल पड़े। [[भारत का संविधान]] 1950 में अधिनियमित हुआ, जिसके बाद उन्होंने आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक सुधारों के एक महत्त्वाकांक्षी योजना की शुरुआत की। मुख्यतः, एक बहुवचनी, बहु-दलीय लोकतन्त्र को पोषित करते हुएँ, उन्होंने भारत के एक उपनिवेश से गणराज्य में परिवर्तन होने का पर्यवेक्षण किया। विदेश नीति में, भारत को दक्षिण एशिया में एक क्षेत्रीय नायक के रूप में प्रदर्शित करते हुएँ, उन्होंने गैर-निरपेक्ष आन्दोलन में एक अग्रणी भूमिका निभाई।
 
नेहरू के नेतृत्व में, कांग्रेस राष्ट्रीय और राज्य-स्तरीय चुनावों में प्रभुत्व दिखाते हुएँ और 1951, 1957, और 1962 के लगातार चुनाव जीतते हुएँ, एक सर्व-ग्रहण पार्टी के रूप में उभरी। उनके अन्तिम वर्षों में राजनीतिक मुसीबतों और 1962 के चीनी-भारत युद्ध में उनके नेतृत्व की असफलता के बावजूद, वे भारत के लोगों के बीच लोकप्रिय बने रहें। भारत में, उनका जन्मदिन ''बाल दिवस'' के रूप में मनाया जाता हैं।
 
== जीवन ==
[[File:Jawaharlal Nehru Khaki Shorts.jpg|thumb|[[सेवा दल]] के एक सदस्य के रूप में [[खाकी]] पोशाक में नेहरू।]]
जवाहरलाल नेहरू का जन्म 14 नवम्बर 1889 को [[ब्रिटिश राज|ब्रिटिश भारत]] में [[इलाहाबाद]] में हुआ। उनके पिता, [[मोतीलाल नेहरू]] (1861–1931), एक धनी बैरिस्टर जो [[कश्मीरी पण्डित]] समुदाय से थे, {{sfn|Moraes|2008|p=4}} [[भारतीय स्वतन्त्रता आन्दोलन|स्वतन्त्रता संग्राम]] के दौरान [[भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस]] के दो बार [[भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का अध्यक्ष|अध्यक्ष]] चुने गए। उनकी माता स्वरूपरानी थुस्सू (1868–1938), जो [[लाहौर]] में बसे एक सुपरिचित कश्मीरी ब्राह्मण परिवार से थी,<ref>Zakaria, Rafiq ''A Study of Nehru'', Times of India Press, 1960, p. 22</ref> मोतीलाल की दूसरी पत्नी थी व पहली पत्नी की प्रसव के दौरान मृत्यु हो गई थी। जवाहरलाल तीन बच्चों में से सबसे बड़े थे, जिनमें बाकी दो लड़कियाँ थी। {{sfn|Moraes|2008|}} बड़ी बहन, [[विजया लक्ष्मी पण्डित|विजया लक्ष्मी]], बाद में [[संयुक्त राष्ट्र महासभा]] की पहली महिला अध्यक्ष बनी।<ref>Bonnie G. Smith; The Oxford Encyclopedia of Women in World History. Oxford University Press. 2008. ISBN 978-0195148909. pg 406–407.</ref> सबसे छोटी बहन, [[कृष्णा हठीसिंग]], एक उल्लेखनीय लेखिका बनी और उन्होंने अपने भाई पर कई पुस्तकें लिखी।
 
[[File:Jawaharlal Nehru as a young child with his parents.png|thumb|left|175px|1890 के दशक में नेहरू परिवार]]
 
जवाहरलाल नेहरू ने दुनिया के कुछ बेहतरीन स्कूलों और विश्वविद्यालयों में शिक्षा प्राप्त की थी। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा हैरो से और कॉलेज की शिक्षा [[ट्रिनिटी कॉलेज]], [[लंदन]] से पूरी की थी। इसके बाद उन्होंने अपनी लॉ की डिग्री [[कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय]] से पूरी की। [[इंग्लैंड]] में उन्होंने सात साल व्यतीत किए जिसमें वहां के फैबियन समाजवाद और आयरिश राष्ट्रवाद के लिए एक तर्कसंगत दृष्टिकोण विकसित किया।
 
जवाहरलाल नेहरू 1912 में [[भारत]] लौटे और वकालत शुरू की। 1916 में उनकी शादी [[कमला नेहरू]] से हुई। 1917 में जवाहर लाल नेहरू [[होम रुल लीग‎]] में शामिल हो गए। राजनीति में उनकी असली दीक्षा दो साल बाद 1919 में हुई जब वे [[महात्मा गांधी]] के संपर्क में आए। उस समय महात्मा गांधी ने [[रौलेट एक्ट|रॉलेट अधिनियम]] के खिलाफ एक अभियान शुरू किया था। नेहरू, महात्मा गांधी के सक्रिय लेकिन शांतिपूर्ण, [[सविनय अवज्ञा आंदोलन]] के प्रति खासे आकर्षित हुए।
 
नेहरू ने महात्मा गांधी के उपदेशों के अनुसार अपने परिवार को भी ढाल लिया। जवाहरलाल और मोतीलाल नेहरू ने पश्चिमी कपडों और महंगी संपत्ति का त्याग कर दिया। वे अब एक खादी कुर्ता और गाँधी टोपी पहनने लगे। जवाहर लाल नेहरू ने 1920-1922 में [[असहयोग आंदोलन]] में सक्रिय हिस्सा लिया और इस दौरान पहली बार गिरफ्तार किए गए। कुछ महीनों के बाद उन्हें रिहा कर दिया गया।
 
जवाहरलाल नेहरू 1924 में [[इलाहाबाद]] नगर निगम के अध्यक्ष चुने गए और उन्होंने शहर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के रूप में दो वर्ष तक सेवा की। 1926 में उन्होंने ब्रिटिश अधिकारियों से सहयोग की कमी का हवाला देकर इस्तीफा दे दिया।
 
1926 से 1928 तक, जवाहर लाल नेहरू ने अखिल भारतीय कांग्रेस समिति के महासचिव के रूप में सेवा की। 1928-29 में, कांग्रेस के वार्षिक सत्र का आयोजन मोतीलाल नेहरू की अध्यक्षता में किया गया। उस सत्र में जवाहरलाल नेहरू और [[सुभाष चन्द्र बोस]] ने पूरी राजनीतिक स्वतंत्रता की मांग का समर्थन किया, जबकि मोतीलाल नेहरू और अन्य नेताओं ने ब्रिटिश साम्राज्य के भीतर ही प्रभुत्व सम्पन्न राज्य का दर्जा पाने की मांग का समर्थन किया। मुद्दे को हल करने के लिए, गांधी ने बीच का रास्ता निकाला और कहा कि ब्रिटेन को भारत के राज्य का दर्जा देने के लिए दो साल का समय दिया जाएगा और यदि ऐसा नहीं हुआ तो कांग्रेस पूर्ण राजनीतिक स्वतंत्रता के लिए एक राष्ट्रीय संघर्ष शुरू करेगी। नेहरू और बोस ने मांग की कि इस समय को कम कर के एक साल कर दिया जाए। ब्रिटिश सरकार ने इसका कोई जवाब नहीं दिया।
 
दिसम्बर 1929 में, कांग्रेस का वार्षिक अधिवेशन [[लाहौर]] में आयोजित किया गया जिसमें जवाहरलाल नेहरू कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष चुने गए। इसी सत्र के दौरान एक प्रस्ताव भी पारित किया गया जिसमें 'पूर्ण स्वराज्य' की मांग की गई। 26 जनवरी 1930 को लाहौर में जवाहरलाल नेहरू ने स्वतंत्र भारत का झंडा फहराया। गांधी जी ने भी 1930 में [[सविनय अवज्ञा आंदोलन]] का आह्वान किया। आंदोलन खासा सफल रहा और इसने ब्रिटिश सरकार को प्रमुख राजनीतिक सुधारों की आवश्यकता को स्वीकार करने के लिए मजबूर कर दिया.
 
जब ब्रिटिश सरकार ने [[1935 का भारत सरकार अधिनियम|भारत अधिनियम 1935]] प्रख्यापित किया तब कांग्रेस पार्टी ने चुनाव लड़ने का फैसला किया। नेहरू चुनाव के बाहर रहे लेकिन ज़ोरों के साथ पार्टी के लिए राष्ट्रव्यापी अभियान चलाया। कांग्रेस ने लगभग हर प्रांत में सरकारों का गठन किया और केन्द्रीय असेंबली में सबसे ज्यादा सीटों पर जीत हासिल की।
 
नेहरू कांग्रेस के अध्यक्ष पद के लिए 1936 और 1937 में चुने गए थे। उन्हें 1942 में [[भारत छोड़ो आंदोलन]] के दौरान गिरफ्तार भी किया गया और 1945 में छोड दिया गया। 1947 में भारत और पाकिस्तान की आजादी के समय उन्होंने अंग्रेजी सरकार के साथ हुई वार्ताओं में महत्त्वपूर्ण भागीदारी की।
 
=== भारत के प्रथम प्रधानमन्त्री ===
सन् १९४७ में भारत को आजादी मिलने पर जब भावी प्रधानमन्त्री के लिये कांग्रेस में मतदान हुआ तो तो [[सरदार वल्लभभाई पटेल|सरदार पटेल]] को सर्वाधिक मत मिले। उसके बाद सर्वाधिक मत [[आचार्य कृपलानी]] को मिले थे। किन्तु गांधीजी के कहने पर सरदार पटेल और आचार्य कृपलानी ने अपना नाम वापस ले लिया और [[जवाहर लाल नेहरू]] को प्रधानमन्त्री बनाया गया।
 
1947 में वे स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमन्त्री बने। अंग्रेजों ने करीब 500 देशी रियासतों को एक साथ स्वतंत्र किया था और उस वक्त सबसे बडी चुनौती थी उन्हें एक झंडे के नीचे लाना। उन्होंने भारत के पुनर्गठन के रास्ते में उभरी हर चुनौती का समझदारी पूर्वक सामना किया। जवाहरलाल नेहरू ने आधुनिक भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की। उन्होंने योजना आयोग का गठन किया, विज्ञान और प्रौद्योगिकी के विकास को प्रोत्साहित किया और तीन लगातार पंचवर्षीय योजनाओं का शुभारंभ किया। उनकी नीतियों के कारण देश में कृषि और उद्योग का एक नया युग शुरु हुआ। नेहरू ने भारत की विदेश नीति के विकास में एक प्रमुख भूमिका निभाई।
 
जवाहर लाल नेहरू ने [[जोसिप बरोज़ टिटो]] और [[अब्दुल गमाल नासिर]] के साथ मिलकर एशिया और अफ्रीका में उपनिवेशवाद के खात्मे के लिए एक [[गुट निरपेक्ष आंदोलन]] की रचना की। वह [[कोरियाई युद्ध]] का अंत करने, [[स्वेज नहर]] विवाद सुलझाने और कांगो समझौते को मूर्तरूप देने जैसे अन्य अंतरराष्ट्रीय समस्याओं के समाधान में मध्यस्थ की भूमिका में रहे। पश्चिम बर्लिन, ऑस्ट्रिया और लाओस के जैसे कई अन्य विस्फोटक मुद्दों के समाधान में पर्दे के पीछे रह कर भी उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा। उन्हें वर्ष 1955 में [[भारत रत्न]] से सम्मनित किया गया।
 
लेकिन नेहरू पाकिस्तान और चीन के साथ भारत के संबंधों में सुधार नहीं कर पाए। पाकिस्तान के साथ एक समझौते तक पहुँचने में कश्मीर मुद्दा और चीन के साथ मित्रता में सीमा विवाद रास्ते के पत्थर साबित हुए। नेहरू ने चीन की तरफ मित्रता का हाथ भी बढाया, लेकिन 1962 में चीन ने धोखे से आक्रमण कर दिया। नेहरू के लिए यह एक बड़ा झटका था और शायद उनकी मौत भी इसी कारण हुई। 27 मई 1964 को जवाहरलाल नेहरू को दिल का दौरा पडा जिसमें उनकी मृत्यु हो गई।
 
== आलोचना ==
बहुत से लोगों का विचार है कि नेहरू ने अन्य नेताओं की तुलना में भारत के स्वतन्त्रता संग्राम में बहुत कम योगदान दिया था फिर भी गांधीजी ने उन्हे भारत का प्रथम [[प्रधानमन्त्री]] बना दिया। स्वतंत्रता के बाद कई दशकों तक भारतीय लोकतंत्र में सत्ता के सूत्रधारों ने प्रकारान्तर से देश में [[राजतंत्र]] चलाया, विचारधारा के स्थान पर [[व्यक्ति पूजा]] को प्रतिष्ठित किया और तथाकथित लोकप्रियता के प्रभामंडल से आवेष्टित रह लोकहित की पूर्णत: उपेक्षा की।
 
नेहरू को [[महात्मा गांधी]] के राजनीतिक उत्तराधिकारी के तौर जाना जाता है। गांधी पर यह आरोप भी लगता है कि उन्होंने राजनीति में नेहरू को आगे बढ़ाने का काम सरदार [[वल्लभभाई पटेल]] समेत कई सक्षम नेताओं की कीमत पर किया। जब आजादी के ठीक पहले कांग्रेस अध्यक्ष बनने की बात थी और माना जा रहा था कि जो कांग्रेस अध्यक्ष बनेगा वही आजाद भारत का पहला प्रधानमन्त्री होगा तब भी गांधी ने प्रदेश कांग्रेस समितियों की सिफारिशों को अनदेखा करते हुए नेहरू को ही अध्यक्ष बनाने की दिशा में सफलतापूर्वक प्रयास किया। इससे एक आम धारणा यह बनती है कि नेहरू ने न सिर्फ महात्मा गांधी के विचारों को आगे बढ़ाने का काम किया होगा बल्कि उन्होंने उन कार्यों को भी पूरा करने की दिशा में अपनी पूरी कोशिश की होगी जिन्हें खुद गांधी नहीं पूरा कर पाए। लेकिन सच्चाई इसके उलट है। यह बात कोई और नहीं बल्कि कभी नेहरू के साथ एक टीम के तौर पर काम करने वाले [[जयप्रकाश नारायण]] ने 1978 में आई पुस्तक ‘गांधी टूडे’ की भूमिका में कही थी। जेपी ने नेहरू के बारे में कुछ कहा है तो उसकी विश्वसनीयता को लेकर कोई संदेह नहीं होना चाहिए क्योंकि नेहरू से जेपी की नजदीकी भी थी और मित्रता भी। लेकिन इसके बावजूद जेपी ने नेहरू माॅडल की खामियों को उजागर किया।<ref>[http://www.himanshushekhar.in/नेहरू-गांधी-के-ढोंगी-उत्त/ नेहरू: गांधी के ढोंगी उत्तराधिकारी]</ref>
 
अप्रैल २०१५ में यह भी खुलासा हुआ कि स्वतंत्रता के बाद नेहरू ने बीस वर्षों तक [[आईबी]] द्वारा [[सुभाष चन्द्र बोस|नेताजी]] के सम्बन्धियों की जासूसी करायी। <ref>[http://www.jagran.com/news/national-jawaharlal-nehru-spied-subhas-chandra-boses-family-for-20-years-12250634.html बोस से डरते थे नेहरू, जासूसी मामले की एसआईटी जांच हो: चंद्र बोस] (जागरण)</ref>
 
==सन्दर्भ==
{{टिप्पणीसूची}}
 
== इन्हें भी देखें ==
* [[भारत के प्रधानमन्त्री]]
* [[वल्लभ भाई पटेल]]
* [[सुभाष चन्द्र बोस]]
 
== बाहरी कड़ियाँ ==
* [http://purvanchalnews.com/index.php?option=com_content&view=article&id=33:nehru-an-evulation&catid=1:2010-01-02-10-56-47&Itemid=78 जवाहर लाल नेहरू एक मूल्यांकन (1889–1964)]
* [http://www.nehrufamily.com/ नेहरू परिवार (अंग्रेजी में)]
* [http://www.achhikhabar.com/2011/02/22/%E0%A4%9C%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B9%E0%A4%B0%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%B2-%E0%A4%A8%E0%A5%87%E0%A4%B9%E0%A4%B0%E0%A5%81-tryst-with-destiny-speech/ जवाहरलाल नेहरू का ऐतिहासिक भाषण (Tryst With Destiny Speech in Hindi)]
* [http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2014/05/140526_bhagat_singh_nehru_india_aa.shtml भारत की समस्याओं के लिए नेहरू कितने ज़िम्मेदार...] (बीबीसी हिन्दी)
* [http://www.pmindia.nic.in/former.htm भारत के प्रधानमंत्रियो का आधिकारिक जालस्थल (अंग्रेजी मे)]
 
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