"जयप्रकाश नारायण" के अवतरणों में अंतर

510 बैट्स् जोड़े गए ,  3 वर्ष पहले
सम्पादन सारांश रहित
(59.177.138.65 (वार्ता) द्वारा किए बदलाव 3414643 को पूर्ववत किया)
}}
 
'''जयप्रकाश नारायण''' ([[11 अक्टूबर]], [[1902]] - [[8 अक्टूबर]], [[1979]]) (संक्षेप में ''जेपी'') भारतीय स्वतंत्रता सेनानी और राजनेता थे। उन्हें [[१९७०|1970]] में [[इंदिरा गांधी]] के विरुद्ध विपक्ष का नेतृत्व करने के लिए जाना जाता है। इन्दिरा गांधी को पदच्युत करने के लिये उन्होने 'सम्पूर्ण क्रांति' नामक आन्दोलन चलाया। वे समाज-सेवक थे, जिन्हें 'लोकनायक' के नाम से भी जाना जाता है। [[1999]] में उन्हें मरणोपरान्त [[भारत रत्न]] से सम्मनित किया गया।
इसके अतिरिक्त उन्हें समाजसेवा के लियेलिए १९६५ में [[मैगससे पुरस्कार]] भी प्रदान किया गया था। [[पटना]] के हवाई अड्डे का नाम उनके नाम पर रखा गया है। [[दिल्ली सरकार]] का सबसे बड़ा अस्पताल '[[लोक नायक जयप्रकाश अस्पताल]]' भी उनके नाम पर है।
 
== शिक्षा ==
[[पटना]] मेमें अपने विद्यार्थी जीवन में जयप्रकाश नारायण ने स्वतंत्रता संग्राम मेमें हिस्सा लिया। जयप्रकाश नारायण बिहार विद्यापीठ में शामिल हो गएगये, जिसे युवा प्रतिभाशाली युवाओं को प्रेरित करने के लिए डॉ॰ [[राजेन्द्र प्रसाद]] और सुप्रसिद्ध गांधीवादी डॉ॰ [[अनुग्रह नारायण सिन्हा]] द्वारा स्थापित किया गया था, जो [[महात्मा गांधी|गांधी जी]] के एक निकट सहयोगी रहे और बाद मेमें [[बिहार]] के पहले उप मुख्यमंत्री सह वित्त मंत्री रहे। वे [[1922]] मेमें उच्च शिक्षा के लिए [[अमेरिका]] गएगये, जहाँ उन्होंने 1922-1929 के बीच [[कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय]]-[[बरकली]], [[विसकांसन विश्वविद्यालय]] में [[समाज-शास्त्र]] का अध्ययन किया। महंगीमहँगी पढ़ाई के खर्चों को वहन करने के लिए उन्होंने खेतों, कंपनियोंकम्पनियों, रेस्टोरेन्टोंरेस्त्रा मेमें काम किया। वे [[मार्क्स]] के [[समाजवाद]] से प्रभावित हुए। उन्होनेउन्होंने एम॰ एम.ए.ए॰ की डिग्री हासिल की। उनकी माताजी की तबियत ठीक न होने कीके कारण वे भारत वापस आ गएगये और पी.एच.डीपी॰ एच॰ डी॰ पूरी न कर सके।
 
== जीवन ==
उनका विवाह [[बिहार]] के प्रसिद्ध गांधीवादी [[बृज किशोर प्रसाद]] की पुत्री प्रभावती के साथ अक्टूबर 1920 मेमें हुआ। प्रभावती विवाह के उपरांतउपरान्त [[कस्तूरबा गांधी]] के साथ गांधी आश्रम मेमें रहीं। वे डॉ॰ राजेन्द्र प्रसाद और सुप्रसिद्ध गांधीवादी डॉ॰ अनुग्रह नारायण सिन्हा द्वारा स्थापित [[बिहार विद्यापीठ]] में शामिल हो गए।गये। १९२९ में जब वे अमेरिका से लौटे, भारतीय स्वतंत्रता संग्राम तेज़ी पर था। उनका संपर्कसम्पर्क गांधी जी के साथ काम कर रहे [[जवाहर लाल नेहरु]] से हुआ। वे भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का हिस्सा बने। [[1932]] मेमें गांधी, नेहरु और अन्य महत्वपूर्णमहत्त्वपूर्ण कांग्रेसी नेताओनेताओं के जेल जाने के बाद, उन्होनेउन्होंने भारत मेमें अलग-अलग हिस्सों मे संग्राम का नेतृत्व किया। अन्ततः उन्हें भी [[मद्रास]] में सितंबरसितम्बर 1932 मेमें गिरफ्तार कर लिया गया और [[नासिक]] के जेल में भेज दिया गया। यहाँ उनकी मुलाकात [[मीनू मसानी]], [[अच्युत पटवर्धन]], [[एन. सी. गोरे|एन॰ सी॰ गोरे]], [[अशोक मेहता]], [[एम. एच. दांतवाला|एम॰ एच॰ दाँतवाला]], [[चार्ल्स मास्कारेन्हास]] और [[सी. के. नारायणस्वामी|सी॰ के॰ नारायण स्वामी]] जैसे उत्साही कांग्रेसी नेताओं से हुई। जेल मेमें इनके द्वारा की गईगयी चर्चाओं ने [[कांग्रेस सोसलिस्ट पार्टी]] (सी.एस.पीसी॰ एस॰ पी॰) को जन्म दिया। सी.एस.पीसी॰ एस॰ पी॰ समाजवाद में विश्वास रखती थी। जब कांग्रेस ने 1934 मेमें चुनाव मेमें हिस्सा लेने का फैसला किया तो जेपीजे॰ पी॰ और सी.एस.पीसी॰ एस॰ पी॰ ने इसका विरोध किया।
 
1939 मे उन्होंने [[द्वितीय विश्वयुद्ध]] के दौरान, अंग्रेज सरकार के खिलाफ लोक आंदोलनआन्दोलन का नेतृत्व किया। उन्होंने सरकार को किराया और राजस्व रोकने के अभियान चलाए।चलाये। [[टाटा स्टील कंपनी|टाटा स्टील कम्पनी]] में हड़ताल करा केकराके यह प्रयास किया कि अंग्रेज़ों को इस्पात न पहुंचे।पहुँचे। उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और 9 महीने की कैद की सज़ा सुनाई गई।गयी। जेल से छूटने के बाद उन्होनेउन्होंने गांधी और सुभाष चंद्र बोस के बीच सुलह का प्रयास किया। उन्हेउन्हें बंदीबन्दी बना करबनाकर मुंबईमुम्बई की आर्थर जेल और दिल्ली की कैंपकैम्प जेल मेमें रखा गया। 1942 भारत छोडो आंदोलनआन्दोलन के दौरान वे आर्थर जेल से फरार हो गए।गये।
: ''मुझे अपने लिए चिंताचिन्ता नहीं है, किंतुकिन्तु देश के लिए मुझे चिंताचिन्ता है।'' -- बिहार विभूति डॉ॰ अनुग्रह नारायण सिन्हा
उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान हथियारों के उपयोग को सही समझा। उन्होंने [[नेपाल]] जा करजाकर [[आज़ाद दस्ते]] का गठन किया और उसे प्रशिक्षण दिया। उन्हें एक बार फिर [[पंजाब]] में चलती ट्रेन में सितंबरसितम्बर 1943 मेमें गिरफ्तार कर लिया गया। 16 महीने बाद जनवरी 1945 में उन्हें आगरा जेल मे स्थांतरितस्थान्तरित कर दिया गया। इसके उपरांतउपरान्त गांधी जी ने यह साफ कर दिया था कि डॉ॰ लोहिया और जेपीजे॰ पी॰ की रिहाई के बिना अंग्रेज सरकार से कोई समझौता नामुमकिन है। दोनोदोनों को अप्रेलअप्रील 1946 को आजाद कर दिया गया।
[[चित्र:J P Narayan.JPG|right|thumb|300px|१९५८ में इजराइल के प्रधानमन्त्री डेविड बेन गुरिओन के साथ [[तेल अवीब]] में जयप्रकाश जी]]
1948 मेमें उन्होंने कांग्रेस के समाजवादी दल का नेतृत्व किया और बाद में गांधीवादी दल के साथ मिल करमिलकर [[समाजवादी सोशलिस्ट पार्टी]] की स्थापना की। [[19 अप्रेल|19 अप्रील]], [[1954]] में [[गया]], [[बिहार]] मेमें उन्होंने [[विनोबा भावे]] के [[सर्वोदय आंदोलन|सर्वोदय आन्दोलन]] के लिए जीवन समर्पित करने की घोषणा की। [[1957]] में उन्होंने लोकनीति के पक्ष मे राजनीति छोड़ने का निर्णय लिया।
 
1960 के दशक के अंतिम भाग में वे राजनीति में पुनः सक्रिय रहे। [[1974]] में किसानों के [[बिहार आंदोलन|बिहार आन्दोलन]] में उन्होंने तत्कालीन राज्य सरकार से इस्तीफे की मांग की।
 
वे इंदिरा गांधी की प्रशासनिक नीतियों के विरुद्ध थे। गिरते स्वास्थ्य के बावजूद उन्होंने बिहार में सरकारी भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलनआन्दोलन किया। उनके नेतृत्व में पीपुल्स फ्रंट ने [[गुजरात]] राज्य का चुनाव जीता। [[1975]] में इंदिरा गांधी ने [[आपातकाल (भारत)|आपात्कालआपातकाल]] की घोषणा की जिसके अंतर्गतअन्तर्गत जेपीजे॰ पी॰ सहित ६०० से भी अधिक विरोधी नेताओं को बंदीबन्दी बनाया गया और प्रेस पर सेंसरशिप लगा दी गई।गयी। जेल मेमें जे॰ जेपीपी॰ की तबीयत और भी खराब हुई। 7 महीने बाद उनको मुक्त कर दिया गया। [[1977]] जेपी के प्रयासों से एकजुट विरोध पक्ष ने इंदिरा गांधी को चुनाव में हरा दिया।
 
जयप्रकाश नारायण का निधन उनके निवास स्थान पटना में 8 अक्टूबर 1979 को हृदय की बीमारी और [[मधुमेह]] के कारण हुआ। उनके सम्मान में तत्कालीन प्रधानमंत्री [[चौधरी चरण सिंह]] ने ७ दिन के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की थी, उनके सम्मान में कई हजार लोग उनकी शोक यात्रा में शामिल हुए।
 
[[चित्र:Jp's raily.jpg|right|thumb|300px|१५ जून सन् १९७५ को पटना के गांधी मैदान में छात्रों की विशाल समूह के समक्ष 'सम्पूर्ण क्रान्ति' का उद्घोष]]
पांचपाँच जून के पहले छात्रेंछात्रों - युवकों की कुछ तात्कालिक मांगें थीं, जिन्हें कोई भी सरकार जिद न करती तो आसानी से मान सकती थी। लेकिन पांचपाँच जून को जे.जे॰ पी.पी॰ ने घोषणा की:-की—
: "भ्रष्टाचार मिटाना, बेरोजगारी दूर करना, शिक्षा में क्रान्तिक्रांति लाना, आदि ऐसी चीजें हैं जो आज की व्यवस्था से पूरी नहीं हो सकतीं; क्योंकि वे इस व्यवस्था की ही उपज हैं। वे तभी पूरी हो सकती हैं जब सम्पूर्ण व्यवस्था बदल दी जाए।जाए और, सम्पूर्ण व्यवस्था के परिवर्तन के लिए क्रान्ति, '''’सम्पूर्ण क्रान्ति'''’ आवश्यक है।"
 
सम्पूर्ण क्रान्ति के आह्वान उन्होनेउन्होंने श्रीमतीश्रीमति इंदिरा गांधी की सत्ता को उखाड़ फेकनेफेंकने के लियेलिए किया था।
 
लोकनायक नें कहा कि सम्पूर्ण क्रांति में सात क्रांतियाँ शामिल है -है— राजनैतिक, आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, बौद्धिक, शैक्षणिक व आध्यात्मिक क्रांति। इन सातों क्रांतियों को मिलाकर सम्पूर्ण क्रान्ति होती है।
 
सम्पूर्ण क्रांति की तपिश इतनी भयानक थी कि केन्द्र में कांग्रेस को सत्ता से हाथ धोना पड़ गया था। जय प्रकाश नारायण जिनकी हुंकार पर नौजवानों का जत्था सड़कों पर निकल पड़ता था। बिहार से उठी सम्पूर्ण क्रांति की चिंगारी देश के कोने-कोने में आग बनकर भड़क उठी थी। जेपीजे॰ पी॰ के नाम से मशहूर जयप्रकाश नारायण घर-घर में क्रांति का पर्याय बन चुके थे। [[लालमुनि चौबे]], [[लालू प्रसाद]], [[नीतीश कुमार]], [[रामविलास पासवान]] या फिर [[सुशील मोदी]], आज के सारे नेता उसी छात्र युवा संघर्ष वाहिनी का हिस्सा थे।
 
== इन्हें भी देखें ==
153

सम्पादन