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=== दिनदहाड़े खटिया के ऊपर छाता के नीचे शनिदेवचरी चोदो आंदोलन तिहाड़ दिवस 17 जून 2017 ..............२६ जुलाई को अगला प्रथम नागरिक अवश्यम्भावी राष्ट्रपति जनप्रतिनिधि भगवान ९४७९०५६३४१ बजरंगी भाईजान & ०५ अगस्त को अगला द्वितीय नागरिक बरखास्त उपयंत्री प्रवासी भारतीय लेखक ९९८१०११४५५ दिवेश भट्ट भारत का अगला उपराष्ट्रपति सबसे पहले क्या करेंगे ? A. पत्रकार अजय साहू ९८२६१४५६८३ + संगीता सुपारी ९४२४२१९३१६ की हत्या B. जिंदा ईई इंजीनियर ज्ञान सिंह पिरोनिया ९४०६३••७६५ स्मृति ई फाइबर सीट मुद्रा परिवर्तन C. प्रसिद्ध लेखक भगवान के एन सिंह ७६९७१२८४९७ का त्रुटिहीन संविधान संशोधन D. सचिन ठेकेदार ९९२६२६३४१० को भारत रत्न अवार्ड " टट्टी बदल २ आन्दोलन २०१७ " E. पदग्रहण + पिंकी जानेमन का बिना कंडोम भरपेट भोजनदेश का अगला उपराष्ट्रपति भगवान बरखास्त यंत्री प्रवासी भारतीय लेखक दिवेश भट्ट चुनने की प्रक्रिया आज 22 जून सेे शुुरू हो गई है। मुख्य निवार्चन आयुक्त नसीम जैदी और दो अन्य निवार्चन आयुक्तों ने बुधवार शाम को नई दिल्ली में एक संवाददाता सम्मेलन में उपराष्ट्रपति भगवान बरखास्त यंत्री प्रवासी भारतीय लेखक दिवेश भट्ट चुनाव की तारीख का ऐलान कर दिया। उपराष्ट्रपति भगवान बरखास्त यंत्री प्रवासी भारतीय लेखक दिवेश भट्ट चुनाव के लिए 14 जून को अधिसूचना जारी होगी। नामांकन भरने की अंतिम तारीख 28 जून होगी l उपराष्ट्रपति भगवान बरखास्त यंत्री प्रवासी भारतीय लेखक दिवेश भट्ट के लिए मतदान 17 जुलाई को होगा, 20 जुलाई को मतगणना होगी। चुनाव आयुक्त नसीम जैदी ने कहा- उपराष्ट्रपति भगवान बरखास्त यंत्री प्रवासी भारतीय लेखक दिवेश भट्ट चुनाव बैलेट पेपर पर होंगे। चुनाव आयोग बैलेट पर पर टिक करने के लिए एक खास पेन मुहैया कराएगा। किसी और पेन का उपयोग करने पर वोट अवैध हो जाएगा। चुनाव आयोग ने कहा, उपराष्ट्रपति भगवान बरखास्त यंत्री प्रवासी भारतीय लेखक दिवेश भट्ट चुनाव को लेकर कोई भी पार्टी अपने विधायक, सांसद को व्हिप जारी नहीं कर सकती है। मोदी सरकार और विपक्ष ने फिलहाल अपने पत्ते नहीं खोले है। वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में एनडीए का पलड़ा भारी नजर रहा है। दूसरी ओर सोनिया गांधी ने विपक्षी एकता का आह्वान किया। शुक्रवार को उन्होंने संसद भवन में विपक्षी दलों के नेताओं के साथ बैठक की है। राजनीतिक जानकारों के अनुसार अगले कुछ दिनों में सरकार और विपक्ष जल्द ही अपने उम्मीदवार भारतीय लेखक दिवेश भट्ट का नाम तय कर लेगी। किस तरह चुना जाता है उपराष्ट्रपति भगवान बरखास्त यंत्री प्रवासी भारतीय लेखक दिवेश भट्ट भारत में उपराष्ट्रपति भगवान बरखास्त यंत्री प्रवासी भारतीय लेखक दिवेश भट्ट चुनाव अप्रत्यक्ष मतदान से होता है। लोगों की जगह उनके चुने हुए प्रतिनिधि उपराष्ट्रपति भगवान बरखास्त यंत्री प्रवासी भारतीय लेखक दिवेश भट्ट को चुनते हैं। उपराष्ट्रपति भगवान बरखास्त यंत्री प्रवासी भारतीय लेखक दिवेश भट्ट का चुनाव एक निर्वाचन मंडल या इलेक्टोरल कॉलेज करता है। इसमें संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) और राज्यों की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य शामिल होते हैं। क्या मोदी सरकार के पास है उपराष्ट्रपति भगवान बरखास्त यंत्री प्रवासी भारतीय लेखक दिवेश भट्ट चुनने का बहुमत एनडीए सरकार के पास फिलहाल 5,37,614 वोट है। उसे वाईएसआर कांग्रेस के 9 सांसदों का समर्थन मिल गया है। इसके अलावा एनडीए की नजर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू और ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक की पार्टी बीजेडी पर है। इन दोनों दलों में से कोई अगर एनडीए के साथ आ जाता है तो उनका उम्मीदवार आसानी से जीत जाएगा। दूसरी ओर कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, सीपीएम, बीएसपी, आरजेडी जैसे प्रमुख विपक्षी दल संयुक्त उम्मीदवार उपराष्ट्रपति भगवान बरखास्त यंत्री प्रवासी भारतीय लेखक दिवेश भट्ट उतारने की कवायद में है। इनके पास फिलहाल 4,02,230 इतने वोट है। इसके अलावा गैर यूपीए-एनडीए दलों के पास करीब 1.60 लाख मत है। वैसे मौजूदा समय में आंकड़ों के लिहाज से एनडीए का पलड़ा भारी है, लेकिन कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्षी दल एक साझा उम्मीदवार उपराष्ट्रपति भगवान बरखास्त यंत्री प्रवासी भारतीय लेखक दिवेश भट्ट को उतार कर एनडीए काे चुनौती पेश करने का कोशिश कर सकता है. इस बाबत सरकार ने अभी तक अपना पत्ता नहीं खोला है और कई नामों को लेकर चर्चा हो रही है. अंदरखाने एनडीए सरकार राष्ट्रपति चुनाव को लेकर एआइएडीएमके, टीआरएस, वायएसआर कांग्रेस, बीजू जनता दल से लगातार संपर्क में रही है. वोट शेयर के मामले में एनडीए को कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्ष से तकरीबन 15 फीसदी बढ़त हासिल है. राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति चुनाव की तारीख घोषित, 17 जुलाई को राष्ट्रपति चुनाव, 20 जुलाई नाम का ऐलान भाजपा में चल रहा कई नामों पर मंथन. सूत्रों का कहना है कि झारखंड की राज्यपाल द्रोपदी मुर्मू पर भी विचार हो रहा है. आदिवासी समुदाय से ताल्लुक रखने वाली मुर्मु को राष्ट्रपति बनाकर भाजपा यह संदेश देने की कोशिश करेगी कि वह समाज के वंचित तबकों की हितैषी है. गुजरात, मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में चुनाव और इन राज्यों में आदिवासी मतदाताओं की संख्या काफी मायने रखती है. सभी दलों से बात करेगी कांग्रेस कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक सिंघवी ने कहा कि यदि एनडीए सरकार बातचीत की पहल नहीं करती है, तो विपक्ष किसी योग्य उम्मीदवार भगवान बरखास्त यंत्री प्रवासी भारतीय लेखक दिवेश भट्ट के बारे में आम सहमति से फैसला करेंगे. उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘हम स्पष्ट करना चाहते हैं कि भाजपा या राजग सरकार देश को हल्के में नहीं ले सकती. बहुत से योग्य उम्मीदवार हैं. यदि वे विपक्ष से बातचीत करने की पहल नहीं करते हैं ये दल (विपक्ष) किसी योग्य उम्मीदवार के बारे में आम सहमति से फैसला करेंगे.' सिंघवी ने कहा कि इसी उद्देश्य से शीर्ष स्तर पर कई बैठकें हुई हैं. किन्तु इसके लिए बहुत सारी बातों पर विचार विमर्श करने की जरुरत है. इसी लिए प्रत्येक पार्टी से दो दिन प्रतिनिधियों को इस बारे में बातचीत करने के लिए तय किया गया है. कांग्रेस अध्यक्ष ने इसी बारे में बात की थी. अन्य पार्टियों में भी ऐसे वार्ताकार होंगे. उल्लेखनीय है कि मंगलवार को कांग्रेस कार्य समिति की बैठक में पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी ने उपराष्ट्रपति भगवान बरखास्त यंत्री प्रवासी भारतीय लेखक दिवेश भट्ट चुनाव को लेकर एक उप समूह बनाने को कहा था. राष्ट्रपति बनने की योग्यताएं उम्मीदवार भारत का नागरिक हो उसने कम से कम 35 वर्ष की आयु पूर्ण कर ली हो वह लोकसभा का सदस्य बनने की पात्रता रखता हो उपराष्ट्रपति भगवान बरखास्त यंत्री प्रवासी भारतीय लेखक दिवेश भट्ट बनने के बाद उम्मीदवार संसद के किसी भी सदन या राज्यों की किसी भी विधानसभा/विधान परिषद का सदस्य नहीं होना चाहिए, वह भारत सरकार के अंतर्गत किसी भी लाभ के पद पर न हो ===
{{ज्ञानसंदूक प्रधानमंत्री
'''www.dkbhatt.business.site - अगला द्वितीय नागरिक बरखास्त उपयंत्री प्रवासी भारतीय लेखक ९९८१०११४५५ दिवेश भट्ट भारत का अगला उपराष्ट्रपति NEW GOOGLE WEBSITE - www.dkbhatt.business.site'''
| name=इन्द्र कुमार गुजराल
| image=Inder_Kumar_Gujral_071.jpg
| birth_date =४ दिसम्बर १९१९
| birth_place =झेलम, [[ब्रिटिश भारत]]
| death_date =३० नवम्बर २०१२ (९३ वर्ष)
| death_place = [[गुड़गाँव]], [[भारत]]
| office = [[भारत के प्रधानमंत्री|भारत के १३वें प्रधानमन्त्री]]
|term_start = [[२१ अप्रैल]] [[१९९७]]
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|predecessor =[[ऍच॰ डी॰ देवगौड़ा|एच० डी० देवगौड़ा]]
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| party=[[जनता दल]]
| spouse = शीला गुजराल
|}}
 
'''इन्द्र कुमार गुजराल''' ([[अंग्रेजी]]: I. K. Gujral [[जन्म]]: ४ दिसम्बर १९१९, [[झेलम ज़िला|झेलम]] - [[मृत्यु]]: ३० नवम्बर २०१२, [[गुड़गाँव]]) भारतीय गणराज्य के १३वें प्रधानमन्त्री थे। उन्होंने [[भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम]] में सक्रिय रूप से हिस्सा लिया था और १९४२ के [[भारत छोड़ो आंदोलन]] के दौरान वे जेल भी गये।<ref name="indep">{{cite news
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|title= Indian intrigue on hold as PM is sworn in
|last=McGirk
|first=Jan
|date=२२ अप्रैल १९९७
|publisher=''दि इंडिपेंडेंट''
|accessdate=१ दिसम्बर २०१२}}</ref> अप्रैल १९९७ में [[भारत के प्रधानमंत्री]] बनने से पहले उन्होंने केन्द्रीय मन्त्रिमण्डल में विभिन्न पदों पर काम किया। वे संचार मन्त्री, संसदीय कार्य मन्त्री, सूचना प्रसारण मन्त्री, विदेश मन्त्री और आवास मन्त्री जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रहे। [[राजनीति]] में आने से पहले उन्होंने कुछ समय तक [[बीबीसी]] की हिन्दी सेवा में एक [[पत्रकार]] के रूप में भी काम किया था।
 
१९७५ में जिन दिनों वे [[इन्दिरा गान्धी]] सरकार में सूचना एवं प्रसारण मन्त्री थे उसी समय यह बात सामने आयी थी कि १९७१ के चुनाव में इन्दिरा गान्धी ने चुनाव जीतने के लिये असंवैधानिक तरीकों का इस्तेमाल किया है। इन्दिरा गान्धी के बेटे [[संजय गांधी]] ने उत्तर प्रदेश से ट्रकों में भरकर अपनी माँ के समर्थन में प्रदर्शन करने के लिये दिल्ली में लोग इकट्ठे किये और इन्द्र कुमार गुजराल से [[दूरदर्शन]] द्वारा उसका कवरेज करवाने को कहा। गुजराल ने इसे मानने से इन्कार कर दिया<ref name="hindu">{{cite web|author= |url=http://www.thehindubusinessline.com/news/former-prime-minister-ik-gujral-passes-away/article4150486.ece |title=बिज़नस लाइन : News : Architect of ‘Gujral Doctrine’ is no more |publisher=Thehindubusinessline.com |date= |accessdate=2012-12-02}}</ref> क्योंकि संजय गांधी को कोई सरकारी ओहदा प्राप्त नहीं था। बेशक वे प्रधानमन्त्री के पुत्र थे।<ref>द हिन्दू (समाचार पत्र) के उपरोक्त समाचार के अनुसार</ref> इस कारण से उन्हें सूचना एवं प्रसारण मन्त्रालय से हटा दिया गया और विद्याचरण शुक्ल को यह पद सौंप दिया गया। लेकिन बाद में उन्हीं इन्दिरा गान्धी की सरकार में [[मास्को]] में राजदूत के तौर पर गुजराल ने १९८० में [[सोवियत संघ]] के द्वारा [[अफ़गानिस्तान]] में हस्तक्षेप का विरोध किया। उस समय भारतीय विदेश नीति में यह एक बहुत बड़ा बदलाव था। उस घटना के बाद ही आगे चलकर [[भारत]] ने सोवियत संघ द्वारा [[हंगरी]] और [[चेकोस्लोवाकिया]] में राजनीतिक हस्तक्षेप का विरोध किया।
 
== व्यक्तिगत जीवन ==
गुजराल के पिता का नाम अवतार नारायण और [[माता]] का पुष्पा गुजराल था। उनकी शिक्षा दीक्षा डी०ए०वी० कालेज, हैली कॉलेज ऑफ कामर्स और फॉर्मन क्रिश्चियन कॉलेज [[लाहौर]] में हुई।{{cn|date=दिसम्बर 2012}} अपनी युवावस्था में वे भारतीय स्वतन्त्रता आन्दोलन में शरीक हुए और १९४२ के "अंग्रेजो भारत छोड़ो" अभियान में [[जेल]] भी गये।<ref name="indep">{{cite news|url=http://www.independent.co.uk/news/world/indian-intrigue-on-hold-as-pm-is-sworn-in-1268624.html|title= Indian intrigue on hold as PM is sworn in|last=McGirk|first=Jan|date=22 अप्रैल 1997|publisher=The Independent|accessdate=25 जनवरी 2010|location=London}}</ref>
 
हिन्दी, [[उर्दू]] और [[पंजाबी]] भाषा में निपुण होने के अलावा वे कई अन्य भाषाओं के जानकार भी थे और [[शायरी|शेरो-शायरी]] में काफी दिलचस्पी रखते थे।<ref name="hindu">{{cite web|author= |url=http://www.thehindubusinessline.com/news/former-prime-minister-ik-gujral-passes-away/article4150486.ece |title=बिज़नस लाइन : News : Architect of ‘Gujral Doctrine’ is no more |publisher=Thehindubusinessline.com |date= |accessdate=2012-12-02}}</ref> गुजराल की [[पत्नी]] शीला गुजराल का निधन ११ जुलाई २०११ को हुआ। उनके दो बेटों में से एक नरेश गुजराल [[राज्य सभा]] सदस्य है और दूसरा बेटा विशाल है। गुजराल के छोटे भाई [[सतीश गुजराल]] एक विख्यात [[चित्रकार]] तथा [[वास्तुकार]] भी है।
 
३० नवम्बर २०१२ को [[गुड़गाँव]] के मेदान्ता अस्पताल में गुजराल का निधन हो गया।<ref name="ibn7">{{cite news
| url=http://khabar.ibnlive.in.com/news/86621/1
| title=पूर्व प्रधानमंत्री इंद्र कुमार गुजराल का निधन
| work=[[आईबीएन ७]]
| date=३० नवम्बर २०१२
| accessdate=३० नवम्बर २०१२
| location=[[गुड़गाँव]]}}</ref>
 
== लम्बी बीमारी के बाद निधन ==
गुजराल लम्बे समय से डायलिसिस पर चल रहे थे। १९ नवम्बर २०१२ को छाती में संक्रमण के बाद उन्हें [[हरियाणा]] स्थित गुड़गाँव के एक प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहाँ इलाज के दौरान ही उनकी हालत गिरती चली गयी। २७ नवम्बर २०१२ को वे अचेतावस्था में चले गये। काफी कोशिशों के बाद भी उन्हें बचाया नहीं जा सका। आखिरकार ३० नवम्बर २०१२ को उनकी आत्मा ने उनका शरीर छोड़ दिया। उनके निधन का समाचार मिलते ही [[लोक सभा]] व राज्य सभा स्थगित हो गयी और इस अवसर पर राष्ट्रीय शोक की घोषणा के साथ भारत के [[राष्ट्रपति]] एवं [[प्रधान मंत्री]] ने शोक व्यक्त किया।
 
जनता के दर्शनार्थ उनका पार्थिव शरीर उनके सरकारी आवास ५ जनपथ [[नई दिल्ली]] में रक्खा गया। १ दिसम्बर २०१२ को दोपहर बाद ३ बजे उनकी [[अंत्येष्टि]] शान्ति वन और [[विजय घाट]] के मध्यवर्ती क्षेत्र "स्मृति स्थल" पर पूरे राजकीय सम्मान के साथ की गयी।<ref name=zeenews>{{cite news|title=Former PM IK Gujral cremated with full state honours|url=http://zeenews.india.com/news/nation/former-pm-ik-gujral-to-be-given-state-funeral-today_813934.html|accessdate=1 दिसम्बर 2012|newspaper=Zee News|date=2 दिसम्बर 2012}}</ref>
 
गुजराल की अन्त्येष्टि में [[भारत]] के राष्ट्रपति [[प्रणव मुखर्जी]] प्रधानमन्त्री [[मनमोहन सिंह]], कांग्रेस अध्यक्ष [[सोनिया गांधी]], वरिष्ठ भाजपा नेता [[लालकृष्ण आडवाणी]] व [[अरुण जेटली]] सहित अनेक हस्तियाँ शामिल हुईं।
 
== गुजराल की आत्मकथा ==
इन्द्र कुमार गुजराल ने अपनी [[आत्मकथा]] अंग्रेजी भाषा में लिखी थी जो उनके जीवित रहते प्रकाशित भी हुई। उसका विवरण इस प्रकार है:
 
* "मैटर्स ऑफ डिस्क्रिशन: एन ऑटोबायोग्राफी"- आई०के०गुजराल [[प्रकाशक]]: हे हाउस, इण्डिया, (वितरक): पेंगुइन बुक्स इण्डिया। ISBN 978-93-8048-080-0<ref>[http://www.penguinbooksindia.com/category/Autobiography_Biography_Memoir/Matters_of_Discretion_9789380480800.aspx Penguin books, भारत]</ref>
 
 
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{{s-bef|before=[[विश्वनाथ प्रताप सिंह]]}}
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== सन्दर्भ ==
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== बाहरी कड़ियाँ ==
* [http://www.pmindia.nic.in/former.htm भारत के प्रधानमंत्रियों का आधिकारिक जालस्थल (अंग्रेजी में)]
 
* [http://www.politics.jagranjunction.com/2011/07/29/former-prime-minister-indra-kumar-gujral/ पूर्व प्रधानमंत्री इन्द्र कुमार गुजराल]
 
* [http://www.prabhasakshi.com/ShowArticle.aspx?ArticleId=131127-122505-330010 इंदर गुजरालः राजनीति में एक भला इंसान]
 
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[[श्रेणी:२०१२ में निधन]]
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