"रामकृष्ण परमहंस" के अवतरणों में अंतर

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=== वैराग्य और साधना ===
 
कालान्तर में बड़े भाई भी चल बसे। इस घटना से वे व्याथितव्यथित हुए। संसार की अनित्यता को देखकर उनके मन में वैराग्य का उदय हुआ। अन्दर से मन ना करते हुए भी श्रीरामकृष्ण मंदिर की पूजा एवं अर्चना करने लगे।
दक्षिणेश्वर स्थित पंचवटी में वे ध्यानमग्न रहने लगे। ईश्वर दर्शन के लिए वे व्याकुल हो गये। लोग उन्हे पागल समझने लगे।
 
चन्द्रमणीचन्द्रमणि देवी ने अपने बेटे की उन्माद की अवस्था से चिन्तत होकर गदाधर का विवाह [[शारदा देवी]] से कर दिया।
इसके बाद भैरवी व्राह्मणीब्राह्मणी का दक्षिणेश्वर में आगमन हुआ। उन्होंने उन्हें तंत्र की शिक्षा दी। मधुरभाव में अवस्थान करते हुए ठाकुर ने श्रीकृष्ण का दर्शन किया।
उन्होंने तोतापुरी महाराज से [[अद्वैत]] [[वेदान्त]] की ज्ञान लाभ कीकिया और जीवन्मुक्त की अवस्था को प्राप्त किया। सन्यास ग्रहण करने के वाद उनका नया नाम हुआ श्रीरामकृष्ण परमहंस। इसके बाद उन्होंने ईस्लाम और क्रिश्चियन धर्म की भी साधना की।
 
=== भक्तों का आगमन ===
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