"रामकृष्ण परमहंस" के अवतरणों में अंतर

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=== भक्तों का आगमन ===
समय जैसे-जैसे व्यतीत होता गया, उनके कठोर आध्यात्मिक अभ्यासों और सिद्धियों के समाचार तेजी से फैलने लगे और दक्षिणेश्वर का मंदिर उद्यान शीघ्र ही भक्तों एवं भ्रमणशील संन्यासियों का प्रिय आश्रयस्थान हो गया। कुछ बड़े-बड़े विद्वान एवं प्रसिद्ध वैष्णव और तांत्रिक साधक जैसे- पं॰ नारायण शास्त्री, पं॰ पद्मलोचन तारकालकार, वैष्णवचरण और गौरीकांत तारकभूषण आदि उनसे आध्यात्मिक प्रेरणा प्राप्त करते रहे। वह शीघ्र ही तत्कालीननतत्कालीन सुविख्यात विचारकों के घनिष्ठ संपर्क में आए जो बंगाल में विचारों का नेतृत्व कर रहे थे। इनमें [[केशवचंद्र सेन]], विजयकृष्ण गोस्वामी, [[ईश्वरचंद्र विद्यासागर]] के नाम लिए जा सकते हैं। इसके अतिरिक्त साधारण भक्तों का एक दूसरा वर्ग था जिसके सबसे महत्त्वपूर्ण व्यक्ति रामचंद्र दत्त, गिरीशचंद्र घोष, बलराम बोस, [[महेंद्रनाथ गुप्त]] (मास्टर महाशय) और दुर्गाचरण नाग थे।<ref name="rolland">{{cite book
| url=http://books.google.co.in/books?id=RADaAAAAMAAJ
| title=द लाइफ ऑफ़ रामकृष्ण
 
[[स्वामी विवेकानन्द]] उनके परम शिष्य थे।
[[File:Disciples at Ramakrishna's funeral.jpg|thumb|रामकृष्ण के अंतिम संस्कार के समय उनके शिस्योशिष्यों की तस्वीर। ]]
 
=== बीमारी और अन्तिम जीवन ===
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