"रामकृष्ण परमहंस" के अवतरणों में अंतर

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== उपदेश और वाणी ==
 
रामकृष्ण छोटी कहानियोकहानियों के माध्यम से लोगोलोगों को शिक्षा देते थे। कलकत्ता के बुद्धिजीवियों पर उनके विचारोविचारों ने ज़बरदस्त प्रभाव छोड़ा था ; हलाकिहांलाकि उनकी शिक्षायेशिक्षायें आधुनिकता और राष्ट्र के आज़ादी के बारे में नहीं थी। उनके आध्यात्मिक आंदोलन ने परोक्ष रूप से देश में राष्ट्रवाद की भावना बढ़ने का काम किया क्यूंकिक्योंकि उनकी शिक्षा जातिवाद एवं धार्मिक पक्षपात को नकारती हैं। <br />
 
रामकृष्ण के अनुसार ही मनुष्य जीवन का सबसे बड़ा लक्ष्य हैं। रामकृष्ण कहते थे की ''कामिनी -कंचन'' ईश्वर प्राप्ति के सबसे बड़े बाधक हैं।<br />
 
रामकृष्ण संसार को [[माया ]] के रूप में देखते थे। उनके अनुसार ''अविद्या माया'' सृजन के काले शक्तियों को दर्शाती हैं (जैसे काम, लोभ ,लालच , क्रूरता , स्वार्थी कर्म आदि ), यह मानव को चेतना के निचले स्तर पर रखती हैं। यह शक्तियाशक्तियां मनुष्य को जन्म और मृत्यु के चक्र में बंधने के लिए ज़िम्मेदार हैं। वही ''विद्या माया'' सृजन की अच्छी शक्तियों के लिए ज़िम्मेदार हैं ( जैसे निस्वार्थ कर्म , आध्यात्मिक गुण , उचेउँचे आदर्श , दया , पवित्रता , प्रेम और भक्ति )। यह मनुष्य को चेतन के ऊँचे स्तर पर ले जाती हैं।
 
== आगे अध्ययन के लिए ==
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