"सत्यवती" के अवतरणों में अंतर

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[[चित्र:Ravi Varma-Shantanu and Satyavati.jpg|350px|thumb|right|'''शान्तनु और सत्यवती''' ([[राजा रवि वर्मा]] द्वारा चित्रित)]]
 
'''सत्यवती''' [[महाभारत]] की एक महत्वपूर्ण पात्र है। उसका विवाह [[हस्तिनापुर]]नरेश [[शान्तनु]] से हुआ। उसका मूल नाम 'मत्स्यगंधा' था। इनकावह [[ब्रह्मा]] के [[शाप]] से [[मछली|मत्स्यभाव]] को प्राप्त हुई "अद्रिका" नाम की [[अप्सरा]] के [[गर्भ]] से उपरिचर [[वसु]] द्वारा उत्पन्न एक कन्या थी। इसका ही नाम बाद में '''सत्यवती''' हुआ।
 
[[मछली]] का पेट फाड़कर [[केवट महाराजमल्लाह|मल्लाहों]] ने एक बालक और एक कन्या को निकाला और राजा को सूचना दी। बालक को तो राजा ने पुत्र रूप से स्वीकार कर लिया किंतु बालिका के शरीर से मत्स्य की गंध आने के कारण राजा ने केवट महाराज मल्लाह को दे दिया। पिता की सेवा के लिये वह [[यमुना]] में नाव चलाया करती थी। [[पराशर मुनि]] ने उसपर मुग्ध होकर उसका मत्स्यभाव नष्ट किया तथा शरीर से उत्तम गंध निकलने का वरदान दिया अत: वह 'गंधवती' नाम से भी प्रसिद्ध हुई। उसका नाम 'योजनगंधा' भी था। उससे [[व्यास]] का जन्म हुआ। बाद में राजा [[शांतनु]] से उसका विवाह हुआ।
 
== सत्यवती का जन्म ==