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भीकाजी कामा का जन्म 24 सितम्बर 1861 को [[बम्बई]] में एक [[पारसी]] परिवार में हुआ था। उनमें लोगों की मदद और सेवा करने की भावना कूट−कूट कर भरी थी। वर्ष 1896 में मुम्बई में [[प्लेग]] फैलने के बाद भीकाजी ने इसके मरीजों की सेवा की थी। बाद में वह खुद भी इस बीमारी की चपेट में आ गई थीं। इलाज के बाद वह ठीक हो गई थीं लेकिन उन्हें आराम और आगे के इलाज के लिए यूरोप जाने की सलाह दी गई थी। वर्ष 1902 में वह इसी सिलसिले में [[लंदन]] गईं और वहां भी उन्होंने भारतीय स्वाधीनता संघर्ष के लिए काम जारी रखा। भीकाजी ने वर्ष 1907 में अपने सहयोगी [[सरदारसिंह राणा]] की मदद से [[भारत का प्रथम तिरंगा राष्ट्रध्वज]] का पहला डिजाइन तैयार किया था।
 
[[चित्र:Flag of India 1907 (Nationalists Flag).svg|thumb|centerright|200px350px|वह तिरंगा जो मैडम कामा ने फहराया था, उसका संगणक द्वरा निर्मित चित्र]]
 
भीकाजी कामा ने 22 अगस्त 1907 को [[जर्मनी]] में हुई इंटरनेशनल सोशलिस्ट कांफ्रेंस में भारतीय स्वतंत्रता के ध्वज[[भारत का प्रथम तिरंगा राष्ट्रध्वज]] को बुलंद किया था। उस सम्मेलन में उन्होंने भारत को अंग्रेजी शासन से मुक्त करने की अपील की थी। उनके तैयार किए गए झंडे से काफी मिलते−जुलते डिजायन को बाद में भारत के ध्वज के रूप में अपनाया गया। राणाजी और कामाजी द्वारा निर्मित यह [[भारत का प्रथम तिरंगा राष्ट्रध्वज]] आज भी गुजरात के [[भावनगर]] स्थित [[सरदारसिंह राणा]] के पौत्र और भाजपा नेता [[राजुभाई राणा]] ( राजेन्द्रसिंह राणा ) के घर सुरक्षित रखा गया है।