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=== स्वाधीनता आंदोलन में भूमिका ===
 
ऐतिहासिक रूप से कोलकाता [[भारतीय स्वाधीनता आंदोलन]] के हर चरण में केन्द्रीय भूमिका में रहा है। [[भारतीया राष्ट्रीय कांग्रेस]] के साथ साथ कई राजनैतिक एवं सांस्कृतिक संस्थानों जैसे "हिन्दू मेला" और क्रांतिकारी संगठन "युगांतर", "अनुशीलन" इत्यादी की स्थापना का गौरव इस शहर को हासिल है। प्रांभिक राष्ट्रवादी व्यक्तित्वों में [[अरविंद घोष]], इंदिरा देवी चौधरानी, [[विपिनचंद्र पाल]] का नाम प्रमुख है। आरंभिक राष्ट्रवादियों के प्रेरणा के केन्द्र बिन्दू बने [[रामकृष्ण परमहंस]] के [[शिष्य]] [[स्वामी]] [[विवेकानंद]]। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के पहले अध्यक्ष बने '''श्री व्योमेश चंद्र बैनर्जी''' और [[स्वराज]] की वकालत करने वाले पहले व्यक्ति श्री '''सुरेन्द्रनाथ बैनर्जी''' भी कोलकाता से ही थे। १9१९ वी सदी के उत्तरार्द्ध और 20२० वीं शताब्दी के प्रांभप्रारंभ में [[बांग्ला]] साहित्यकार [[बंकिमचंद्र चटर्जी]] ने बंगाली राष्ट्रवादियों के बहुत प्रभावित किया। इन्हीं का लिखा [[आनंदमठ]] में लिखा गीत [[वन्दे मातरम]] आज भारत का राष्ट्र गीत है। [[सुभाषचंद्र बोस]] ने [[आजाद हिंद फौज]] का गठन कर अंग्रेजो को काफी साँसत में रखा। इसके अलावा [[रवींद्रनाथ टैगोर]] से लेकर सैकड़ों स्वाधीनता के सिपाही विभिन्न रूपों में इस शहर में मौजूद रहे हैं।
 
=== बाबू संस्कृति और बंगाली पुनर्जागरण ===
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