"धर्म के लक्षण" के अवतरणों में अंतर

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(धर्मं के दश लक्षणों में उनके अर्थ जोड़े गये है, जिससे उन्हें समझने में सुविधा हो)
 
('''अर्थ:''' धर्म का सर्वस्व क्या है, सुनो ! और सुनकर इसका अनुगमन करो। जो आचरण स्वयं के प्रतिकूल हो, वैसा आचरण दूसरों के साथ नहीं करना चाहिये।)
 
==इन्हें भी देखें==
*[[दशलक्षण धर्म]]
 
 
== बाहरी कड़ियाँ ==