"मास्ती वेंकटेश अयंगार" के अवतरणों में अंतर

==पुरस्कार==
मास्ती वेंकटेश अयंगार, सन १९२९ में, ''कन्नड साहित्य परिश्द'' के सबसे कम उम्र में सभापति किया। इस कार्यक्रम कर्नाटक के [[बेल्गाम]] जिल्ला में आयोजित किया गया था। मैसूर के माहाराजा नलवाडी कृष्णराजा वडियर ने उनको ''राजसेवासकता'' के पदवी से सम्मानित किया था। कर्नाक और मैसोर के विश्वविद्यालय ने उनको डाक्टर का उपाधि से सम्मानित किया गया। १९४३ में वे ''कन्नड साहित्य परिशद'' के उपाध्यक्ष के पद पर चुनें गये थे। १९७४ में वे ''साहित्य अकेडमी'' के फैलोशिप से सम्मानित किए गए थे। इससे पहले उनको अपने क्षुद्र कहानियों के लिये ''साहित्य अकेडमी अवार्ड'' मिला। सन १९८३ में उनको भारत के सबसे उच्चतम सहित्य पुरस्कार ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किए गए थे।
 
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इनके द्वारा रचित एक कहानी–संग्रह ''[[सण्ण कथेगलु ]]'' के लिये उन्हें सन् १९६८ में [[साहित्य अकादमी पुरस्कार]] ([[साहित्य अकादमी पुरस्कार कन्नड़|कन्नड़]]) से सम्मानित किया गया।<ref name="sahitya">{{cite web | url=http://sahitya-akademi.gov.in/sahitya-akademi/awards/akademi%20samman_suchi_h.jsp | title=अकादमी पुरस्कार | publisher=साहित्य अकादमी | accessdate=11 सितंबर 2016}}</ref>
|ज्ञानपीठ पुरस्कार
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==परोपकार==
[[श्रेणी:१९८३ में निधन]]
[[श्रेणी:साहित्य अकादमी फ़ैलोशिप से सम्मानित‎]]
[[श्रेणी:साहित्य अकादमी द्वारा पुरस्कृत कन्नड़ भाषा के साहित्यकार]]