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[[बिहार]] की राजधानी [[पटना]] से पाँच किलोमीटर उत्तर [[सारण]] में [[गंगा]] और [[गंडक]] के [[संगम]] पर स्थित '[[सोनपुर, बिहार|सोनपुर]]' नामक कस्बे को ही प्राचीन काल में '''हरिहरक्षेत्र''' कहते थे। देश के चार धर्म महाक्षेत्रों में से एक हरिहरक्षेत्र है।<ref>{{cite web|url=http://www.prabhatkhabar.com/news/vaishali/story/888136.html|title=हाजीपुर में पहले लगता था हरिहर क्षेत्र सोनपुर मेला}}</ref><ref>{{cite web|url=http://www.jagran.com/bihar/vaishali-harihar-area-became-centre-of-devotion-in-shravan-month-16372349.html|title=श्रावन माह को ले आस्था एवं भक्ति का केंद्र बना हरिहरक्षेत्र}}</ref> ऋषियों और मुनियों ने इसे [[प्रयाग]] और [[गया]] से भी श्रेष्ठ तीर्थ माना है। ऐसा कहा जाता है कि इस संगम की धारा में स्नान करने से हजारों वर्ष के पाप कट जाते हैं। कर्तिक पूर्णिमा के अवसर पर यहाँ एक विशाल मेला लगता है जो मवेशियों के लिए [[एशिया]] का सबसे बड़ा [[मेला]] समझा जाता है।<ref>{{cite web|url=http://www.prabhatkhabar.com/news/saran/story/887344.html|title=उत्तर वैदिक काल से शुरू हुआ था सोनपुर मेला}}</ref> यहाँ [[हाथी]], [[घोड़ा|घोड़े]], [[गाय]], [[बैल]] एवं चिड़ियों आदि के अतिरिक्त सभी प्रकार के आधुनिक सामान, कंबल दरियाँ, नाना प्रकार के खिलौने और लकड़ी के सामान बिकने को आते हैं। [[सोनपुर मेला]] लगभग एक मास तक चलता है। इस मेले के संबंध में अनेक किंवदंतियाँ प्रचलित हैं।<ref>{{cite web|url=http://www.bbc.com/hindi/india/2014/11/141116_colours_of_sonpur_mela_photo_feature_vr|title=तस्वीरेंः हरिहर क्षेत्र का सोनपुर मेला}}</ref>
[[File:Lord Vishnu.jpeg|right|thumb|गज और ग्राह]]
[[हिंदू]] धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इंद्रद्युम्न नामक एक राजा अगस्त मुनि के शाप से हाथी बन गए थे और हुहु नामक गंधर्व देवल मुनि के शाप से मगरमच्छ। कालांतरण में हाथी और मगरमच्छ के बीच सोनपुर में गंगा और गंडक के संगम पर युद्ध हुआ था। इसी के पास कोनहराघाट में पौराणिक कथा के अनुसार गज और ग्राह(मगरमच्छ) का वर्षों चलनेवाला युद्ध हुआ था। बाद में भगवान [[विष्णु]] की सहायता से गज की विजय हुई थी।<ref>{{cite web|url=https://khabar.ndtv.com/news/faith/sonpur-fair-where-elephant-and-crocodile-fought-lord-vishnu-intervened-to-stop-fight-1626141|title=यहां हुई थी ‘गज’ और ‘ग्राह’ की लड़ाई, भगवान विष्णु को करना पड़ा था हस्तक्षेप}}</ref><ref>{{cite web|url=http://www.jagran.com/bihar/patna-city-11748243.html|title=भगवान विष्णु व शिव की क्रीड़ास्थली है हरिहर क्षेत्र - See more at: http://www.jagran.com/bihar/patna-city-11748243.html#sthash.TzKYLFgN.dpuf}}</ref> एक अन्य किंवदंती के अनुसार जय और विजय दो भाई थे। जय शिव के तथा विजय विष्णु के भक्त थे। इन दोनों में झगड़ा हो गया तथा दोनों गज और ग्राह बन गए। बाद में दोनों में मित्रता हो गई वहाँ शिव और विष्णु दोनों के मंदिर साथ साथ बने जिससे इसका नाम हरिहरक्षेत्र पड़ा। कुछ लोगों के अनुसार प्राचीन काल में यहाँ ऋषियों और साधुओं का एक विशाल सम्मेलन हुआ तथा शैव और वैष्णव के बीच गंभीर वादविवाद खड़ा हो किंतु बाद में दोनों में सुलह हो गई और शिव तथा विष्णु दोनों की मूर्तियों की एक ही मंदिर में स्थापना की गई, उसी को स्मृति में यहाँ कार्तिक में पूर्णिमा के अवसर पर मेला आयोजित किया जाता है।
 
इस मेले का आर्थिक, सामाजिक तथा सांस्कृतिक दृष्टि से बड़ा महत्व है। हरिहर क्षेत्र 2017 सोनपुर मेला 32 दिनों का होगा।<ref>{{cite web|url=http://www.jagran.com/bihar/vaishali-harihar-kshetra-mela-will-for-32-days-16596083.html|title=इस बार 32 दिनों का होगा हरिहर क्षेत्र मेला}}</ref> सोनपुर मेले का उदघाटन इस बार 2 नवंबर को तथा समापन 3 दिसंबर को किया जाएगा।<ref>{{cite web|url=http://www.prabhatkhabar.com/news/vaishali/story/1043888.html|title=इस बार 32 दिनों का होगा हरिहर क्षेत्र सोनपुर मेला}}</ref> मेला में नौका दौड़, दंगल, वाटर सर्फिंग, वाटर के¨नग सहित विभिन्न प्रकार के खेल व प्रतियोगिता का भी आयोजन किया जाएगा।
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