"लघुगणक" के अवतरणों में अंतर

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किसी संख्या के लघुगणक का '''पूर्णांश ज्ञात करने का नियम''' निम्नलिखित है :
 
*(1) जिस धनात्मक संख्या (>1) के पूर्णांक भाग में M+1 अंक हो, उस संख्या के लघुगणक का पूर्णांश M होता है। जैसे २४५245 के लघुगणक का पूर्णांश 2 होगा क्योंकि २४५245 में (2+1) अंक हैं। इसी प्रकार २४५245.६७67 का पूर्णांश भी 2 ही होगा क्योंकि २४५245.६७67 के पूर्ण भाग में (2+1) अंक ही हैं।
*(2) जिस धनात्मक संख्या (<1) में दशमलव बिंदु के बाद '''M''' शून्य के बाद कोई अशून्य अंक आता हो, उसके लघुगणक का पूर्णांश - (M+1) होता है। जैसे 0.0034 में दशमलव के बाद दो शून्य आने के बाद ही अशून्य अंक (3) आ रहा है; इसलिये इसका पूर्णांश = -(2+1) = -3 (ऋण तीन) होगा।
 
'''अपूर्णांश ज्ञात करने का नियम''' निम्नलिखित हैं :
 
अपूर्णांश संख्या के मान और उसमें व्यवहृत अंकों के क्रम पर निर्भर करता है। यदि दो संख्याओं में एक ही प्रकार के अंक एक ही क्रम में व्यवहृत हों और केवल दशमलव बिंदु का स्थान भिन्न हो, तो उन संख्याओं के अपूर्णांश एक ही होंगे, क्योंकि अपूर्णांश संख्या में दशमलव बिंदु के स्थान पर निर्भर नहीं होता है। उदाहरण के लिये ४५३८4538 और ४५45.३८38 दोनो के अपूर्णांश समान होंगे यद्यपि दोनो के अपूर्णांशपूर्णांश अलग-अलग (क्रमशः 3 तथा 1) होंगे।
 
== इतिहास ==
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