"राजेश खन्ना" के अवतरणों में अंतर

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स्कूली शिक्षा के साथ साथ जतिन की रुचि नाटकों में अभिनय करने की भी थी अत: वे स्वाभाविक रूप से थियेटर की ओर उन्मुख हो गये। स्कूल में रहते हुए उन्होंने कुछ नाटक भी खेले।<ref>{{cite web|url=http://www.bollywoodmantra.com/news/iconic-hero-rajesh-khanna-turns-69/8377/ |title=Iconic hero Rajesh Khanna turns 69 and died on 18 जुलाई 2012 |publisher=Bollywoodmantra.com |date=28 दिसम्बर 2011 |accessdate=18 जुलाई 2012}}</ref> केवल इतना ही नहीं, कॉलेज के दिनों उन्होंने नाटक प्रतियोगिता में कई पुरस्कार भी जीते।<ref>{{cite web|url=http://ibnlive.in.com/photogallery/3005-1.html?from=movies |title=Aan Milo Sajna : Birthday Bumps : Rajesh Khanna – Photogallery – Movies News – IBNLive |publisher=Ibnlive.in.com |date=2011-05-10 |accessdate=19 सितंबर 2011}}</ref> थियेटर व फिल्मों के लिये काम खोजने वे उस समय भी अपनी स्पोर्टस कार में जाया करते थे। यह उन्नीस सौ साठ के आस पास का वाकया है।<ref>{{cite book|url=http://books.google.co.in/books?ei=r_OhTP_vM4G4vgOrrpHTAw&ct=result&id=HixlAAAAMAAJ&dq=rajesh+khanna++became+that+rare+newcomer+who+struggled+in+his+ |title=The hundred luminaries of Hindi cinema |publisher=Books.google.co.in |accessdate=28 नवम्बर 2011}}</ref> दोनों दोस्तों ने बाद में तत्कालीन बम्बई के के०सी० कॉलेज में भी एक साथ तालीम हासिल की। .<ref>{{cite web|author=Designed, Developed ABJI Solutions Kandivali (W) |url=http://www.kapolsamaj.com/arts.html |title=KapolSamaj.com. Build better life together |publisher=Kapolsamaj.com |accessdate=2010-09-21}}</ref> जतिन को राजेश खन्ना नाम उनके चाचा ने दिया था यही नाम बाद में उन्होंने फिल्मों में भी अपना लिया। यह भी एक हकीकत है कि जितेन्द्र को उनकी पहली फिल्म में ऑडीशन देने के लिये कैमरे के सामने बोलना राजेश ने ही सिखाया था। जितेन्द्र और उनकी पत्नी राजेश खन्ना को "काका" कहकर बुलाते थे।<ref>{{cite web|url=http://ibnlive.in.com/photogallery/3005-0.html?from=movies |title=Amar Prem : Birthday Bumps : Rajesh Khanna – Photogallery – Movies News – IBNLive |publisher=Ibnlive.in.com |date=2011-05-10 |accessdate=19 सितंबर 2011}}</ref>
 
राजेश खन्ना ने 1966 में पहली बार 23 साल की उम्र में "आखिरी खत" नामक फिल्म में काम किया था। इसके बाद राज़, बहारों के सपने, आखिरी खत - उनकी लगातार तीन कामयाब फिल्म किया। तब फिर बहारों के सपने पूर्णतः असफल हुआ लेकिन उन्हें असली कामयाबी 1969 में "[[आराधना" (1969 फ़िल्म)|आराधना]] से मिली जो उनकी पहली प्लेटिनम जयंती सुपरहिट फिल्म थी। [[आराधना (1969 फ़िल्म)|आराधना]] के बाद हिन्दी फिल्मों के पहले सुपरस्टार का खिताब अपने नाम किया। उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और लगातार 15 solo सुपरहिट फिल्में दिया - [[आराधना (1969 फ़िल्म)|आराधना]], इत्त्फ़ाक़, दो रास्ते, बंधन, डोली, सफ़र, खामोशी, कटी पतंग, आन मिलो सजना, ट्रैन, आनन्द, सच्चा झूठा, दुश्मन, महबूब की मेंहदी, हाथी मेरे साथी। बहुकलाकार फिल्में 1969-72 का अंदाज़, मर्यादा सुपरहिट रहा। मालिक पूर्णतः असफल रहा।
 
== पारिवारिक जीवन ==
== फिल्मी सफ़र ==
 
उन्होंने 1969-72 में लगातार 15 solo सुपरहिट फिल्में दिया - [[आराधना]], इत्त्फ़ाक़, दो रास्ते, बंधन, डोली, सफ़र, खामोशी, कटी पतंग, आन मिलो सजना, ट्रैन, आनन्द, सच्चा झूठा, दुश्मन, महबूब की मेंहदी, हाथी मेरे साथी। बहुकलाकार फिल्में 1969-72 का अंदाज़, मर्यादा सुपरहिट रहा। मालिक पूर्णतः असफल रहा। बाद के दिनों में 1972-1975 तक अमर प्रेम, दिल दौलत दुनिया, जोरू का गुलाम, शहज़ादा, बावर्ची, मेरे जीवन साथी, अपना देश, अनुराग, दाग, नमक हराम, अविष्कार, अज़नबी, प्रेम नगर, रोटी, आप की कसम और प्रेम कहानी जैसी फिल्में भी कामयाब रहीं। मगर उस के लिए 1976-78 खराब काल रहा क्योँकि 7 critically acclaimed (साधुवाद) फिल्में- महबूबा, त्याग, पलकों की छाँव में, नौकरी, जनता हवलदार, चक्रव्यूह, bundalbaaz असफल रहा। 1976-78 में महा चोर, छलिया बाबू, अनुरोध, भोला भाला, कर्म कामयाब रहा। उन्होंने 1979 में वापसी किया अमर दीप के साथ। उन्होंने 1980-1991 तक बहुत सारे सफल फिल्में दिया। 1979-1991 के सफल सिनेमा के नाम - अमर दीप, प्रेम बंधन, थोड़ी सी बेवफाई, आँचल, फ़िर वही रात, बंदिश, कुदरत, दर्द, धनवान, अशान्ति, पचास-पचास, जानवर, धर्म काँटा, सुराग, राजपूत, दिल-e-नादान, जानवर, निशान, सौतन, अगर तुम ना होते, अवतार, नया कदम, आज का एम एल ए राम अवतार, मकसद, धर्म और कानून, आवाज़, आशा ज्योति, पापी पेट का सवाल, मास्टर जी, बेवफ़ाई, बाबू, हम दोनों, ज़माना, आखिर क्यों?, शत्रु, अधिकार, नसीहत, अंगारे, अनोखा रिश्ता, अमृत, आवाम, नज़राना, पाप का अंत, घर का चिराग, स्वर्ग, घर-परिवार। 1991 के बाद राजेश खन्ना का दौर खत्म होने लगा। बाद में वे राजनीति में आये और 1991 वे नई दिल्ली से कांग्रेस की टिकट पर संसद सदस्य चुने गये। 1994 में उन्होंने एक बार फिर खुदाई फिल्म से परदे पर वापसी की कोशिश की। 1996 में उन्होंने सफ़ल फिल्म सौतेला भाई किया। आ अब लौट चलें, क्या दिल ने कहा, प्यार ज़िन्दगी है, वफा जैसी फिल्मों में उन्होंने अभिनय किया लेकिन इन फिल्मों को कोई खास सफलता नहीं मिली। कुल उन्होंने 1966-2013 में 117 स्रावित फिल्म as a lead hero किया और 117 में 91 हिट रहे। कुल उन्होंने 1966-2013 में 163 फिल्म किया और 105 हिट रहे।
 
== मुमताज़ का साथ ==
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