"कश्मीर" के अवतरणों में अंतर

2 बैट्स् जोड़े गए ,  2 वर्ष पहले
ऑटोमेटिक वर्तनी सु, replaced: नही → नहीं , लकडी → लकड़ी
(ये लेख व्यर्थ थी इनका कोई प्रमाण नही है अतः हटाया गया।)
टैग: मोबाइल संपादन मोबाइल वेब सम्पादन
(ऑटोमेटिक वर्तनी सु, replaced: नही → नहीं , लकडी → लकड़ी)
 
== व्युत्पत्ति ==
निलामाता पुराण घाटी के जल से उत्पत्ति का वर्णन करता है, एक प्रमुख भू-भूवैज्ञानिकों द्वारा पुष्टि की गई तथ्य, और यह दर्शाता है कि जमीन का नाम कितना desiccation की प्रक्रिया से लिया गया था - का का मतलब है "पानी" और शमीर का मतलब है "desiccate"। इसलिए, कश्मीर "पानी से निकलने वाला देश" के लिए खड़ा है एक सिद्धांत भी है जो कश्मीर को कश्यप-मीरा या कश्यमिरम या कश्यममरू, '' "कश्यप के समुद्र या पर्वत" का संकुचन लेता है, ऋषि जो प्राच्य झील सट्सार के पानी से निकलने के लिए श्रेय दिया जाता है, कि कश्मीर से पहले इसे पुनः प्राप्त किया गया था। निलामाता पुराण काश्मीरा ([[कश्मीर घाटी]] में [[वालर झील]] मीरा "का नाम देता है जिसका अर्थ है कि समुद्र झील या ऋषि कश्यप का पहाड़।" संस्कृत में 'मीरा' का अर्थ है महासागर या सीमा, इसे उमा के अवतार के रूप में मानते हुए और यह कश्मीर है जिसे आज विश्व को पता है। हालांकि, कश्मीरियों ने इसे 'काशीर' कहते हैं, जो कश्मीर से ध्वन्यात्मक रूप से प्राप्त हुए हैं। प्राचीन यूनानियों ने इसे ' कश्पापा-पुर्का, जो कि हेकाटेयस के कस्पेरियोस (बायज़ांटियम के एपड स्टेफेनस) और हेरोडोटस के कस्तुतिरोस (3.102, 4.44) से पहचाने गए हैं। कश्मीर भी टॉलेमी के '' कस्पीरीया '' के द्वारा देश माना जाता है। '' कश्मीरी '' वर्तमान-कश्मीर की एक प्राचीन वर्तनी है, और कुछ देशों में यह अभी भी इस तरह की वर्तनी है। सेमीट जनजाति का एक गोत्र '' 'काश' (जिसका अर्थ है देशी में एक गहरा स्लेश माना जाता है कि यह [[कशान]] और [[कशगर]] के शहरों की स्थापना कर रहा है, कश्यपी जनजाति से कैस्पियन से भ्रमित नहीं होना चाहिए। भूमि और लोगों को 'काशीर' के नाम से जाना जाता था, जिसमें से 'कश्मीर' भी उसमें से प्राप्त किया गया था। इसे [[प्राचीन ग्रीस के प्राचीन ग्रीक]] '' कास्पीरिया '' कहा जाता है [[क्लासिक्स | शास्त्रीय साहित्य]] में [[हेरोडोटस]] इसे "कस्पातिरोल" कहते हैं <रेफ़ नाम = बामज़ई 4.6> पी। एन.के. बामज़ई, '' कश्मीर का संस्कृति और राजनीतिक इतिहास '', वॉल्यूम 1 (नई दिल्ली: एमडी प्रकाशन, 1 99 4), पीपी 4-6 [/ रेफरी] [[जुआनज़ांग]], [[चीन - चीनी]] [[भिक्षु]] ने 631 [[एडी]] को कश्मीर का दौरा किया यह '' क्या-शि-मी-लो '' [[तिब्बत]] एह ने इसे खाचा कहा, जिसका अर्थ है "[[बर्फ]] वाई [[पहाड़]]" <Refref name = Bamzai4.6 /> यह है और [[नदी]], [[झील]] और [[वन्य फ्लावर]] एस की भूमि रही है। [[झेलम नदी]] घाटी की पूरी लंबाई चलाती है
 
== भूगोल ==
प्राचीनकाल में कश्मीर हिन्दू और बौद्ध संस्कृतियों का पालना रहा है। माना जाता है कि यहाँ पर भगवान [[शिव]] की पत्नी देवी '''[[सती]]''' रहा करती थीं और उस समय ये वादी पूरी पानी से ढकी हुई थी। यहाँ एक राक्षस नाग भी रहता था, जिसे वैदिक '''ऋषि कश्यप''' और देवी सती ने मिलकर हरा दिया और ज़्यादातर पानी [[वितस्ता]] (झेलम) नदी के रास्ते बहा दिया। इस तरह इस जगह का नाम '''सतीसर''' से '''कश्मीर''' पड़ा। इससे अधिक तर्कसंगत प्रसंग यह है कि इसका वास्तविक नाम कश्यपमर (अथवा कछुओं की झील) था। इसी से कश्मीर नाम निकला।
 
कश्मीर का अच्छा-ख़ासा इतिहास '''[[कल्हण]]''' के ग्रंथ '''[[राजतरंगिणी]]''' से (और बाद के अन्य लेखकों से) मिलता है। प्राचीन काल में यहाँ हिन्दू आर्य राजाओं का राज था।
 
मौर्य सम्राट '''अशोक''' और कुषाण सम्राट '''कनिष्क''' के समय कश्मीर बौद्ध धर्म और संस्कृति का मुख्य केन्द्र बन गया। पूर्व-मध्ययुग में यहाँ के चक्रवर्ती सम्राट '''[[ललितादित्य]]''' ने एक विशाल साम्राज्य क़ायम कर लिया था। कश्मीर संस्कृत विद्या का विख्यात केन्द्र रहा।<ref>[[सुभाष काक]], The Wonder That Was Kashmir. In "Kashmir and its People: Studies in the Evolution of Kashmiri Society." M.K. Kaw (ed.), A.P.H., New Delhi, 2004. ISBN 81-7648-537-3. http://www.ece.lsu.edu/kak/wonder.pdf</ref>
 
== प्रसिद्ध उत्पाद ==
कश्मीर से कुछ यादगार वस्तुएं ले जानी हों तो यहां कई सरकारी एंपोरियम हैं। अखरोट की लकडीलकड़ी के हस्तशिल्प, पेपरमेशी के शो-पीस, लेदर की वस्तुएं, कालीन, पश्मीना एवं जामावार शाल, केसर, क्रिकेट बैट और सूखे मेवे आदि पर्यटकों की खरीदारी की खास वस्तुएं हैं। लाल चौक क्षेत्र में हर तरह के शॉपिंग केंद्र है। खानपान के शौकीन पर्यटक कश्मीरी भोजन का स्वाद जरूर लेना चाहेंगे। बाजवान कश्मीरी भोजन का एक खास अंदाज है। इसमें कई कोर्स होते है जिनमें रोगन जोश, तबकमाज, मेथी, गुस्तान आदि डिश शामिल होती है। स्वीट डिश के रूप में फिरनी प्रस्तुत की जाती है। अंत में कहवा अर्थात कश्मीरी चाय के साथ वाजवान पूर्ण होता है।
 
== कश्मीरी लोग ==
* शान्ति होने के बाद दोनो देश कश्मीर के भविष्य का निर्धारण वहाँ की जनता की चाहत के हिसाब से करेंगे (बाद में कहा गया जनमत संग्रह से)।
दोनो में से कोई भी संकल्प अभी तक लागू नहीनहीं हो पाया है।
 
== भारतीय पक्ष ==