"शुंग राजवंश" के अवतरणों में अंतर

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[[चित्र:SungaEmpireMap.jpg|right|thumb|300px|शुंग साम्राज्य का विस्तार]]
'''शुंग वंश''' [[प्राचीन भारत]] का एक शासकीय वंश था जिसने [[मौर्य राजवंश]] के बाद शासन किया। इसका शासन उत्तर भारत में १८७ ई.पू. से 75 ई.पू. तक यानि 112 वर्षों तक रहा था। [[पुष्यमित्र शुंग]] इस राजवंश का प्रथम शासक था।
 
== वंशावली ==
कहा जाता है कि [[पुष्यमित्र शुंग]], जो [[बृहद्रथ मौर्य]] की सेना का सेनापति था, ने सेना का निरीक्षण करते वक्त बृहद्रथ मौर्य को मार दिया था और सत्ता पर अधिकार कर बैठा था। पुष्यमित्र ने 36 वर्षों तक शासन किया और उसके बाद उसका पुत्र अग्निमित्र सत्तासीन हुआ। आठ वर्षों तक शासन करने के बाद 140 ईसापूर्व के पास उसका पुत्र जेठमित्र (ज्येष्ठमित्र) शासक बना।
 
पुष्यमित्र के शासनकाल की एक महत्वपूर्ण घटना थी, पश्चिम से यवनों (यूनानियों) का आक्रमण। वैयाकरण [[पतञ्जलि]], जो कि पुष्यमित्र का समकालीन थे, ने इस आक्रमण का उल्लेख किया है। [[कालिदास]] ने भी अपने नाटक [[मालविकाग्निमित्रम]] मेमें वसुदेव का यवनों के साथ युद्ध का ज़िक्र किया है।
भरहुत स्पूत का निर्माण पुष्यमित्र ने करवाया था शुंग शासकोशासकों ने अपनी राजधानी विदिशा में स्थापित किया था
 
== पुष्यमित्र के उत्तराधिकारी ==
 
=== महत्व ===
इस वंश के राजाओं ने मगध साम्रज्य के केन्द्रीय भाग की विदेशियों से रक्षा की तथा मध्य भारत में शान्ति और सुव्यव्स्था की स्थापना कर विकेन्द्रीकरण की प्रवृत्ति को कुछ समय तक रोके रखा। मौर्य साम्राज्य के ध्वंसावशेषों पर उन्होंने वैदिक संस्कृति के आदर्शों की प्रतिष्ठा की। यही कारण है कीकि उसका शासनकाल वैदिक पुनर्जागरण का काल माना जाता है।
 
=== विदर्भ युद्ध ===
[[श्रेणी:बिहार का इतिहास]]
[[श्रेणी:भारत का इतिहास]]
[[श्रेणी:बिहार का इतिहास]]
[[श्रेणी:बिहार के राजवंश]]
[[श्रेणी:भारत का इतिहास]]
[[श्रेणी:राजवंश]]