"२००३ क्रिकेट विश्व कप फाइनल" के अवतरणों में अंतर

ऑटोमेटिक वर्तनी सु, replaced: । → । (2), मे → में (2), → (3)
(ऑटोमेटिक वर्तनी सु, replaced: । → । (2), मे → में (2), → (3))
}}
 
१९८३ के विश्व कप फाइनल के बार भारत दूसरी बार  जबकि आस्ट्रेलिया चैथी बार विश्व कप फाइनल मेें पहुंचा। [[२००३ क्रिकेट विश्व कप]] का फाइनल मैच [[ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट टीम|ऑस्ट्रेलिया]] बनाम [[भारतीय क्रिकेट टीम|भारत]] के बीच खेला गया था। यह मैच [[दक्षिण अफ्रीका]] के [[जोहान्सबर्ग]] के वेंडरर्स स्टेडियम में २३ मार्च २००३ को खेला गया था
 
== विस्तृत ==
आस्ट्रेलियाई टीम पिछले विश्व कप से अपने अजेय अभियान को जारी रखती हुई फाइॅनल तक पहुँची। जबकि भारतीय टीम का फाॅइनल तक का सफर इसके बिलकुल ऊल्ट रहा। जहाँ विश्व के पहले ही मैच ही नीड्सलैंड जैसी कमजोर टीम के खिलाफ भारत केवल २॰४ ही बना सकी तो वहीं आस्ट्रेलिया के खिलाफ महज़ १२५ पर सिमट गई। लेकिन इसके बाद टीम ने रफ्तार पकङी और सभी मुकाबले में जीत हासिल करती हुई दूसरी बार विश्व कप फाइॅनल में पहुंची।
 
३१,७७९ दर्शकों की मौजूदगी में, भारतीय कप्तान सौरव गांगुली ने टाॅस जीता और आस्ट्रेलिया को पहले बल्लेबाजी करने का न्यौता  दिया। पहले ही ओवर से आस्ट्रेलिया ने प्रहार शरू कर दिया। जल्द ही भारत को अपना फैसला गलत होता दिखने लगा। जब पहले ५॰ रन आस्टेªलिया ने ८ ओवर में पूरे कर लिए। आस्ट्रेलिया ने ठोस शुरुआत की और पहले विकेट के लिए १४ ओवर तक १॰५ रन जोडे़। खतरनाक होती इस साझेदारी को हरभजन सिंह ने तोड़ा। एक समय पर २ विकेट पर १२५ पर भारतीय टीम मैंच में वापसी करते हुए लग रही थी, लेकिन तीसरे विकेट के लिए हुई नाबाद २३४ की रिकी पोंटिग और डेमिन मार्टिन के बीच हुई इस साझेदारी ने कई रिकार्ड तोड़ दिए। इस मैच में [[ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट टीम|ऑस्ट्रेलियाई टीम]] ने <ref>[http://www.espncricinfo.com/ci/engine/current/match/65286.html Final: Australia v India at Johannesburg, Mar 23, 2003 | Cricket] अभिगमन तिथि :११ अक्टूबर २०१६</ref> पहले बल्लेबाजी करते हुए ५० ओवरों में कुल ३५९ रन बनाए थे ।थे। भारत की ओर से हरभजन सिंह सबसे सफल गेंदबाज रहे जिन्होने ८ ओवर में ४९ देकर दोनो विकेट ने झटकेे। भारतीय टीम ने ३७ अतिरिक्त रन दिए जो किसी विश्व कप फाइनल में दिए जो इंग्लैंड के पिछले ३२ रन के रिकाॅर्ड को तोड़ दिया। ऑस्ट्रेलिया की ओर से [[रिकी पोंटिंग]] ने १४० रनों की पारी खेली थी , जिसने किसी भी विश्व कप फाइनल में सर्वोच्च स्कोर को १९७५ के सर विवियन रिचर्डसन के १३८ के पिछले रिकार्ड को तोड़ दिया।
 
पूरे टूर्नामेंट मेमें बेहतरीन बल्लेबाजी कर रहे सचिन को मेक्ग्रा को उन्ही की गेंद पर ४ के निजी योग पहले ओवर की पाचवीं गेंद पर आऊट हो गए। तीसरे ओवर में शून्य पर खेल रहे विरेन्द्र सहवाग को जीवनदान मिला जब बे्रट ली की गेंद पर डेमिन मार्टिन ने कैच पकड़ लिया लेकिन अंपायर ने इसे नोबाल करार दे दियादिया।  ५९ पर तीन विकेट गंवाने के बाद विरेन्द्र सहवाग और राहुल द्राविड़ ने चैथे विकेट के लिए ८८ रन की साझेदारी करके भारत को मैच मेमें वापसी करवाने की भरपूर कोशिश की लेकिन ८२ के निजी स्कोर पर सहवाग के रन आऊट होते ही इस साझेदारी का अंत हुआ। पारी के १७ ओवर में मैच में बरसात ने व्यधान डाल दिया और आधे घंटे तक मैच रूका रहा। जिसने भारत की मुश्किलों को और बढ़ा दिया। हालाकि ओवर में किसी तरह की कटौती नहीं की गई। एक समय १८७ पर चार विकेट खोकर सघंर्ष करती हुई लग रही भारतीय टीम, बढ़ते हुए आवश्यक रन गति के दवाब को भारतीय टीम झेल नहीं सकी और पूरी टीम [[भारतीय क्रिकेट टीम|भारतीय टीम]] ४०वें ओवर में मात्र २३४ रनों पर सिमट गई और इस तरह से भारत मैच और टूर्नामेंट को १२५ रनों से आस्ट्रेलिया के हाथों गवां दिया। भारत की ओर से वीरेन्द्र सहवाग ने सबसे ज्यादा ८२ रन बनाए। आस्ट्रेलियाई कप्तान को उनकी बेहतरीन बल्लेबाजी के लिए मैन आॅफ द मैच नवाजा गया।
 
==सन्दर्भ==