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== संस्कृत साहित्य में प्रहसन ==
संस्कृत साहित्य के अध्ययन से ज्ञात होता है कि तत्कालीन समाज की समुन्नत स्थिति तथा आदर्शवादी नाटकों के प्रति विशेष अनुराग होने के कारण स्वतंत्र प्रहसनों की रचना बहुत कम हुई। "सागरकौमुदी", "सैरंध्रिका", "कलिकेलि" आदि प्रहसन ही उल्लेखनीय हैं। हाँ, विदूषक के माध्यम से संस्कृत नाटकों में हास्य की सृष्टि अवश्य होती रही।रही।संस्कृत भाषा के नाटककार [[वत्सराज]] द्वारा रचित प्रहसन 'हास्यचूड़ामणि' इसका एक उदाहरण है।
 
== हिन्दी साहित्य में प्रहसन ==