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साधारणत: प्रयोग में आनेवाले मानकों के लिये इस विषय को माप और तौल शीर्षक लेख में देखें।
 
तरंग दैर्ध्यदैर्घ्य प्राकृतिक मानक के रूप में (Wavelength as natural standard)-- बाद की प्रगति ने काफी हद तक हमारी मान्यताओं में परिवर्तन ला दिया है। सर्वप्रथम, वैज्ञानिक माइकेल्सन (Michelson) के प्रयोगों ने एक प्राकृतिक मानक, (कैडमियम के स्पेक्ट्रम में लाल रेखा (red line) का तरंगदैर्ध्य, स्थापित किया, जो सर्वसम्मति से मान लिया गया यह मानक कम से कम उतनी ही उच्च स्तर की शुद्धता के साथ पुनरुत्पादनीय है जितनी द्रव्यात्मक मानकों की तुलनाओं में पाया जाता है। लेकिन इस मानक की सर्वोत्कृष्ट विशेषता यह है कि यह दीर्घकालिक विचरण (secular variation) की संभावना से परे है, जबकि अन्य सभी प्रकार के मानकों का ही प्रयोग होता है। पृथ्वी के किसी भी भाग में हम इस प्राकृतिक मानक की सहायता से द्रव्यात्मक मानकों का सत्यापन कर सकते हैं। यदि द्रव्यात्मक मानकों को अंतरराष्ट्रीय केंद्रीय प्रयोगशाला में भेजकर आदिप्ररूप मीटर से तुलना करानी होती है, तो आवागमन में उसे हानि पहुँचने की संभावना रहती है, किंतु प्राकृतिक मानक की सहायता से हम अपनी ही प्रयोगशाला में यह कार्य कर सकते हैं। दूसरी बात यह है कि इस प्रकार के सुधारों से चपटे सिरोंवाले मानकों का विकास हुआ। आजकल ऐसे दंड भी प्राप्य हैं जिनके सिरे एकदम समांतर हैं। इस प्रकार के दंडों की लंबाइयों को रेखीय मानक से न निकालकर सीधे प्रकाशीय व्यतिकरण (optical interference) से निकाला जाता है।
 
[[माइकेल्सन का व्यतिकरणमापी|माइकेल्सन के व्यतिकरणमापी]] (interferometer) का उपयोग इस बात को जानने में भी किया गया कि एक मानक मीटर में कितनी प्रकाश की तरंगें आती है तथा उनकी संख्या क्या है? माइकेल्सन ने 150 सेंटीग्रेड ताप तथा 760 मिमी0 वायुमंडल के दबाव पर अंतरराष्ट्रीय मीटर का, जो पैरिस के पास माप और तौल के अंतरराष्ट्रीय संस्थान में रखा हुआ है, मान कैडमियम की लाल तरगों में, ज्ञात किया। यह मान 15,53,163.5 है, जो 2´106 में एक सीमा तक सही है। फैब्री पैरॉ (Fabri Perot) के बाद के प्रयोगों से ज्ञात हुआ कि 15° सें0 तथा 760 मिलीमीटर दबाव पर शुष्क हवा में एक मीटर में यह संख्या 15,53,164.13 है। यदि माइकेल्सन के प्रयोगें में जलवाष्प के प्रभाव के लिये संशोधन किया जाय, तो यह स्पष्ट होता है कि दोनों के मान में कोई अंतर नहीं है।