"ब्रिटिश भारत में रियासतें" के अवतरणों में अंतर

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== परिचय तथा इतिहास ==
[[चित्र:ब्रिटिशकालीन भारत का मानचित्र (british india hindi).jpg|right|thumb|450px|सन 1919 में [[भारतीय उपमहाद्वीप]] की मानचित्र। ब्रितिश साशित क्षेत्र व स्वतन्त्र रियासतों के क्षेत्रों को दरशाया गया है।]]
मुगल तथा मराठा साम्राज्यों के पतन के परिणामस्वरूप [[भारतवर्ष]] बहुत से छोटे बड़े राज्यों में विभक्त हो गया। इनमें से सिन्ध, भावलपुर, दिल्ली, अवध, रुहेलखण्ड, बंगाल, कर्नाटक मैसूर, हैदराबाद, भोपाल, जूनागढ़ और सूरत में मुस्लिम शासक थे। पंजाब तथा सरहिन्द में अधिकांश सिक्खों के राज्य थे। [[आसाम]], [[मनीपुर]], [[कछार]], [[त्रिपुरा]], [[जयंतिया]], [[तंजोर]], [[कुर्ग]], [[ट्रावनकोर]], [[सतारा]], [[कोल्हापुर]], [[नागपुर]], [[ग्वालियर]], [[इंदौर]], [[बड़ौदा]] तथा [[राजपूताना]], बुंदेलखण्ड, बघेलखण्ड, छत्तीसगढ़, उड़ीसाओड़िसा, काठियावाड़, मध्य भारत और हिमांचल प्रदेश के राज्यों में हिन्दू शासक थे।
 
[[ब्रिटिश ईस्ट इण्डिया कम्पनी]] के सम्बन्ध सर्वप्रथम व्यापार के उद्देश्य से सूरत, कर्नाटक, हैदराबाद, बंगाल आदि समुद्रतट पर स्थित राज्यों से हुए। तदन्तर फ्रांसीसियों के साथ संघर्ष के समय राजनीतिक महत्त्वाकांक्षा को प्रेरणा मिली। इसके फलस्वरूप साम्राज्य निर्माण का कार्य 1757 ईसवी से प्रारम्भ होकर 1856 तक चलता रहा। इस एक शताब्दी में देशी राज्यों के आपसी झगड़ों से लाभ उठाकर कम्पनी ने अपनी कूटनीतिक सैनिक शक्ति द्वारा सारे भारत पर सार्वभौम सत्ता स्थापित कर ली। अनेक राज्य उसके साम्राज्य में विलीन हो गये। अन्य सभी उसका संरक्षण प्राप्त करके कम्पनी के अधीन बन गये। यह अधीन राज्य 'रियासत' कहे जाने लगे। इनकी स्थिति उत्तरोत्तर असन्तोषजनक तथा डाँवाडोल होती गयी। रियासतों की शक्ति क्षीण होती गयी, उनकी सीमाएँ घटती गयीं और स्वतन्त्रता कम होती चली गयी।
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