"सूर्य नमस्कार" के अवतरणों में अंतर

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'''सूर्य नमस्कार''' योगासनों में सर्वश्रेष्ठ है। यह अकेला अभ्यास ही साधक को सम्पूर्ण योग व्यायाम का लाभ पहुंचाने में समर्थ है। इसके अभ्यास से साधक का शरीर निरोग और स्वस्थ होकर तेजस्वी हो जाता है। 'सूर्य नमस्कार' स्त्री, पुरुष, बाल, युवा तथा वृद्धों के
लिए भी उपयोगी बताया गया है।
: '' आदित्यस्य नमस्कारन्नमस्कारान् ये कुर्वन्ति दिने दिने। ''
:'' आयुः प्रज्ञा बलम्बलं वीर्यम्वीर्यं तेजस्तेशान्तेजस्तेषां च जायते ॥ ''
: ''(जो लोग प्रतिदिन सूर्य नमस्कार करते हैं, उनकी आयु, प्रज्ञा, बल, वीर्य और तेज बढ़ता है।
 
सूर्य नमस्कार में '''बारह''' [[मंत्र]] उचारे जाते हैं। प्रत्येक मंत्र में सूर्य का भिन्न नाम लिया जाता है। हर मंत्र का एक ही सरल अर्थ है- '''सूर्य को (मेरा) नमस्कार है'''। सूर्य नमस्कार के बारह स्थितियों या चरणों में इन बारह मंत्रों का उचारण जाता है। सबसे पहले सूर्य के लिए प्रार्थना और सबसे अंत में नमस्कार पूर्वक इसका महत्व बताता हुआ एक श्लोक बोलते हैं -
 
ॐ ध्येयः सदा सवितृ -मण्डल -मध्यवर्ती, नारायण: सरसिजासरसिजासन-सन्निविष्टः सनसन्नि।<br> विष्टःकेयूरवान् मकरकुण्डलवान् किरीटी, हारी हिरण्मयवपुर्धृतशंखचक्रः ॥<br>
केयूरवान मकरकुण्डलवान किरीटी, हारी हिरण्मय वपुर्धृत शंख चक्रः ॥<br>
 
ॐ मित्राय नमः।<br>
ॐ पूष्णे नमः।<br>
ॐ हिरण्यगर्भाय नमः।<br>
ॐ मरीचये नमः। (वा, मरीचिने नम: - मरीचिन् यह सूर्य का एक नाम है) <br>
ॐ आदित्याय नमः।<br>
ॐ सवित्रे नमः।<br>
ॐ श्रीसवितृसूर्यनारायणाय नमः।<br>
 
आदित्यस्य नमस्कारन्नमस्कारान् ये कुर्वन्ति दिने दिने ।<br>
आयुः प्रज्ञा बलं वीर्यं तेजस्तेषांचतेजस्तेषां च जायते ॥<br>
<small>जो लोग प्रतिदिन सूर्य नमस्कार करते हैं, उनकी आयु, प्रज्ञा, बल, वीर्य और तेज बढ़ता है।</small>
 
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