"पद्म पुराण": अवतरणों में अंतर

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इन खण्डों के क्रम एवं नाम में अंतर भी मिलता है। 'स्वर्ग खंड' का नाम 'आदि खंड' भी प्रचलित है।<ref>पद्मपुराणम्, भाग-2, चौखंबा संस्कृत सीरीज ऑफिस, वाराणसी, संस्करण-2015, पृष्ठ-199 (स्वर्ग खंड की पुष्पिका में उल्लिखित)।</ref> नारद पुराण की अनुक्रमणिका में 'ब्रह्म खंड' को 'स्वर्ग खंड' में ही अंतर्भूत कर दिया गया है और स्वयं पद्मपुराण के एक उल्लेख के अनुसार उपर्युक्त छह खंडों के अतिरिक्त 'क्रिया खंड' (क्रियायोगसार खंड) को भी सातवें खंड के रूप में गिना गया है।<ref>पद्मपुराणम्, भाग-2, चौखंबा संस्कृत सीरीज ऑफिस, वाराणसी, संस्करण-2015, पृष्ठ-2 (स्वर्ग खंड-1.23-25)।</ref> हालाँकि इस पाठ से भिन्न पाठ भी उपलब्ध होते हैं जहाँ 6 खंडों का ही उल्लेख है<ref>पद्मपुराणम्, भाग-1, आनन्दाश्रम मुद्रणालय, पुणे, संस्करण-1893, पृष्ठ-2 (विषय-अनुक्रमणिका के बाद)।</ref> तथा 'क्रिया खंड' को 'सृष्टि खंड' का ही नामांतर मानकर 'क्रियायोगसार खंड' को 'उत्तर खंड' में ही समाहित माना गया है।
 
पद्मपुराण में कथित रूप से 55000 श्लोक माने गये हैं। पद्मपुराण के प्रामाणिक संस्करण तैयार करने की दिशा में 'आनन्दाश्रम मुद्रणालय, पुणे' द्वारा 1893-94 ई० में प्रस्तुत संस्करण मील के पत्थर की तरह महत्त्व रखने वाला है। इस संस्करण में अनेक विद्वानों की सहायता से पद्मपुराण के यथासंभव प्रामाणिक रूप को प्रस्तुत करने का प्रयत्न किया गया है। इसमें श्लोकों की कुल संख्या 48,452 है। 1956-58 ईस्वी में 'मनसुखराय मोर, 5, क्लाइव राॅ, कोलकाता' द्वारा प्रस्तुत संस्करण में 'वेंकटेश्वर प्रेस, बंबई' से प्रकाशित प्राचीन संस्करण को ही आधार बनाया गया, क्योंकि 'आनन्दाश्रम' से प्रकाशित संस्करण में श्लोक संख्या 55000 से बहुत कम थी।<ref>पद्मपुराणम्, भाग-1, चौखंबा संस्कृत सीरीज ऑफिस, वाराणसी, संस्करण-2015, पृष्ठ-2 (भूमिका)।</ref> हालाँकि वेंकटेश्वर प्रेस के संस्करण के श्लोकों को गिना नहीं गया था और अनुमान से ही उसे 55000 श्लोकों वाला मान लिया गया था। मनसुखराय मोर से प्रकाशित संस्करण ही अब 'चौखंबा संस्कृत सीरीज ऑफिस, वाराणसी' से प्रकाशित है। निम्न तालिका से दोनों (आनन्दाश्रम एवं मनसुखराय मोर {= चौखंबा}) संस्करणों की अध्याय-संख्या सहित श्लोक संख्या की एकत्र जानकारी प्राप्त की जा सकती है:
 
=== श्लोक-संख्या ===