"श्रोडिंगर समीकरण" के अवतरणों में अंतर

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==श्रोडिंगर समीकरण के पीछे प्रेरणा और मतलब==
 
जब लुई डी ब्राॅयब्राॅयगली ने अपने डी ब्राॅयब्राॅयगली समिकरण से कण - तरंग द्वैतता को सिद्ध कर दिया, तो वैज्ञानिकों को इस प्रभाव को समझाने के लिए एक नई यांत्रिकी की ज़रुरत पड़ी | यहीं पर श्रोडिंगर ने तरंग यांत्रिकी से प्रेरणा लेकर एक समीकरण का निर्माण किया जो कण - तरंग द्वैतता के कारण दिखाई देने वाले क्वांटम प्रभावों को समझ और समझा जा सके | श्रोडिंगर ने फिर इसे एक न्यूटोनियन कण पर इस्तमाल कर अपने समिकरण को इस दुनिया से जोड़ा |
 
कल्पना कीजिए कि एक कण जो स्वतंत्र रूप से अंतरिक्ष में घूम रहा है | इस कण के पास शायद गतिज ऊर्जा (kinetic energy) है और शायद किसी बाहरी बल के कारण स्थितिज ऊर्जा (potential energy) भी है | तो किसी भी न्यूटोनियन कण के लिए संपूर्ण यांत्रिक ऊर्जा का समिकरण <math>E = \frac{1}{2} m \vec v.\vec v + U </math> होता है जहाँ <math> \vec v </math> त्रिविमीय कार्तीय निर्देशांकों के अनुसार वेग सदिश है अौर <math> U </math> कण की स्थितिज ऊर्जा है | अाप <math> U </math> की जगह <math> V </math> का भी इस्तमाल कर सकते हैं | अगर <math> v_x, v_y, v_z </math> इस वेग वेक्टर के घटकों को माना जाए तो गतिज ऊर्जा के समिकरण को
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