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== परिचय ==
सभ्यता के प्रारम्भ से ही किसी खेत में एक निश्चित फसल न उगाकर फसलों को अदल-बदल कर उगाने की परम्परा चली आ रही है। फसल उत्पादन की इसी परंपरा को फसल चक्र कहते हैं अर्थात् किसी निश्चित क्षेत्र पर निश्चित अवधि के लिए भूमि की उर्वरता को बनाये रखने के उद्देश्य से फसलों को अदल-बदल करhttps://youtu.be/cUdUroHO7O4कर उगाने की क्रिया को फसल चक्र कहते हैं। अथवा, किसी निश्चित क्षेत्रा में एक नियत अवधि में फसलों को इस क्रम में उगाया जाना कि उर्वरा शक्ति का कम से कम हृस हो फसल चक्र कहलाता है।
 
आदिकाल से ही मानव अपने भरण पोषण हेतु अनेक प्रकार की फसले उगाता चला आ रहा है। फसलें मौसम के अनुसार भिन्न-भिन्न होती है। अधिक मूल्यवान फसलों के साथ चुने गये फसल चक्रों में मुख्य दलहनी फसलें, [[चना]], [[मटर]], [[मसूर]], [[अरहर]], [[उर्द]], [[मूँग]], [[लोबिया]], [[राजमा]], आदि का समावेश जरूरी है।
 
== एक ही फसल या एक ही तरह की फसल उगाने से हानि ==