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107 बैट्स् नीकाले गए, 1 वर्ष पहले
यह महल चार मुख्य भागों में बंटा हुआ है जिनके प्रत्येक के प्रवेशद्वार एवं प्रांगण हैं। मुख्य प्रवेश '''सूरज पोल''' द्वार से है जिससे जलेब चौक में आते हैं। जलेब चौक प्रथम मुख्य प्रांगण है तथा बहुत बड़ा बना है। इसका विस्तार लगभग १०० मी लम्बा एवं ६५ मी. चौड़ा है। प्रांगण में युद्ध में विजय पाने पर सेना का जलूस निकाला जाता था। ये जलूस राजसी परिवार की महिलायें जालीदार झरोखों से देखती थीं।<ref name="BrownThomas2008">{{cite book|author1=लिण्डसे ब्राउन |author2=अमेलिया थॉमस|title=राजस्थान, दिल्ली एण्ड आगरा [Rajasthan, Delhi & Agra]|url=https://books.google.com/books?id=Zz0_zXPb68kC&pg=PA178|accessdate= १८ अप्रैल २०११|date= १ अक्तूबर २००८ |language = अंग्रेज़ी |publisher=लोनली प्लानेट |isbn=978-1-74104-690-8|pages=१७८–}}</ref> इस द्वार पर सन्तरी तैनात रहा करते थे क्योंकि ये द्वार दुर्ग प्रवेश का मुख्य द्वार था। यह द्वार पूर्वाभिमुख था एवं इससे उगते सूर्य की किरणें दुर्ग में प्रवेश पाती थीं, अतः इसे सूरज पोल कहा जाता था। सेना के घुड़सवार आदि एवं शाही गणमान्य व्यक्ति महल में इसी द्वार से प्रवेश पाते थे।<ref name=Sun>{{Cite web|url=http://commons.wikimedia.org/wiki/File:Amer_Fort_-_Suraj_Pol_-_Information_Plate.JPG |title= सूरजपोल पर सूचनापट्ट [Information plaque on Suraj Pol] |language = अंग्रेज़ी |accessdate= १७ अप्रैल २०११ |publisher= पुरातत्त्व विभाग, राजस्थान सरकार }}{{dead link|date=July 2017 |bot=InternetArchiveBot |fix-attempted=yes }}</ref>
 
जलेब चौक [[अरबी भाषा]] का एक शब्द है जिसका अर्थ है सैनिकों के एकत्रित होने का स्थान। यह आमेर महल के चार प्रमुख प्रांगणों में से एक है जिसका निर्माण सवाई जय सिंह के शासनकाल (१६९३-१७४३ ई॰) के बीच किया गया था। यहां सेना नायकों जिन्हें फ़ौज बख्शी कहते थे, उनकी कमान में महाराजा के निजी अंगरक्षकों की परेड भी आयोजित हुआ करती थीं। महाराजा उन रक्षकों की टुकड़ियों की सलामी लेते व निरीक्षण किया करते थे। इस प्रांगण के बगल में ही अस्तबल बना है, जिसके ऊपरी तल पर अंगरक्षकों के निवास स्थान थे।<ref name=Jaleb>{{Cite web|url=httphttps://commons.wikimedia.org/wiki/File:Amer_Fort_Amber_Fort_-_Jaleb_Chowk_-_Information_plate.jpg |title= जलेब चौक पर सूचनापट्ट [Information plaque at Jaleb Chowk]] |accessdate= १७ अप्रैल २०११ |publisher= पुरातत्त्व विभाग, राजस्थान सरकार }}{{dead link|date=July 2017 |bot=InternetArchiveBot |fix-attempted=yes }}</ref>
 
===प्रथम प्रांगण ===