"चिरप्रतिष्ठित प्रानुकूलन": अवतरणों में अंतर

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क्लासिकल कन्डीशनिंग हमारे कई प्रकार की अनैच्छिक प्रतिक्रियाओं की भी व्याख्या करती है। उदाहरण के लिए ऊपर वर्णित किए गए डर। लेकिन वी.एफ. स्किनर ने देखा कि हमारी कुछ क्रियाओं की व्याख्या एक-दूसरे प्रकार के अधिगम जिसे हम ऑपरेटर कन्डीशनिंग कहते हैं के द्वारा की जा सकती है।
 
रूसी शरीर क्रिया वैज्ञानिक पावलाव 'लारमय स्राव का प्रेक्षण' कर रहे थे उसी समय संयोग से इस सिधांत का जन्म हुआ। जिसमे उन्होने देखा की जब एक तटस्थ उद्दीपक को स्वाभाविक उद्दीपक के साथ एक निश्चित समय अंत्रराल पर प्रस्तुत किया जाता है तो उसमे स्वाभाविक उद्दीपक के समान अनुक्रिया उत्पन्न करने का गुण आ जाता है। जिसे ही अनुबंधन की संज्ञा दी गयी और यही पावलोवियन सिधांत का आधार बना ।
 
[[श्रेणी:प्रायोगिक मनोविज्ञान]]
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