"जॉर्ज लुकाच": अवतरणों में अंतर

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== रचनात्मक परिचय ==
जॉर्ज लुकाच का लेखन बहुआयामी प्रतिभा का उत्तम निदर्शन उपस्थापित करता है। दर्शन और साहित्य दोनों पर उन्होंने समान अधिकार से कलम चलायी है। एक साहित्यकार के रूप में लुकाच ने मार्क्सवादी विचारधारा को अपनाया भी है और उसे एक नवीन व्याख्या से संवलित कर पुष्ट भी किया है। उनका आलोचनात्मक लेखन सैद्धांतिक एवं व्यवहारिक दोनों क्षेत्रों का सामंजस्य उपस्थापित करता है। soul and form, the meaning of contemporary realism, writer and critic तथा studies in European realism जैसी पुस्तकों में उनका सैद्धांतिक लेखन यथार्थवाद की प्रामाणिक व्याख्या के रूप में द्रष्टव्य है। थ्योरी ऑफ द नाॅवेल जैसी पुस्तक में उन्होंने जहाँ उपन्यास के सिद्धांतों को व्याख्यायित किया, वहीं द हिस्टोरिकल नाॅवेल जैसी पुस्तक में उन्होंने ऐतिहासिक उपन्यास की प्रकृति का मार्मिक विश्लेषण भी किया है। एस्से ऑन थॉमस मान नामक रचना में उन्होंने जर्मनी के महान् तथा अपने प्रिय लेखक के कृतित्व के अध्ययन के माध्यम से अपनी गहन साहित्यिक चेतना का परिचय दिया है। द यंग हेगेल जैसी पुस्तक में उनकी दार्शनिक विचारधारा द्रष्टव्य है।
 
उनके रचनात्मक महत्व को पहचानते हुए डॉ० शिवकुमार मिश्र का मानना है कि फ्रांस ही क्या समूचे यूरोप, यहाँ तक कि समूचे पश्चिम में, जॉर्ज लूकाच जैसा कोई भी दार्शनिक-साहित्यिक विचारक उत्पन्न नहीं हुआ। मार्क्सवादी आस्थाओं से पूर्णतः अनुप्राणित हंगरी (Hungary) के इस अद्वितीय सौन्दर्यशास्त्री चिन्तक को कट्टर मार्क्सवादियों द्वारा प्रायः संशोधनवादी (Revisionist) कहकर लांछित किया गया है, परन्तु इतना निर्विवाद है कि साहित्य एवं कला की जितनी गहरी समझ और उनकी अन्तरंग विशेषताओं का जितना समग्र उद्घाटन हमें लूकाच (George Lukach) की कृतियों में प्राप्त होता है, उतना अन्यत्र नहीं।