"जातक कथाएँ": अवतरणों में अंतर

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==जातकों की संख्या एवं रचनाकाल==
सभी जातक कथाएं [[गौतमबुद्ध]] के द्वारा कही गयी है, जातक [[बुद्ध]] समयकालीन है, जातकों की निश्चित संख्या कितनी है, इसका निर्णय करना बड़ा कठिन है। लंका, बर्मा और सिआम में प्रचलित परम्परा के अनुसार जातक 550 हैं। समन्तपासादिका की निदान कथा में भी जातकों की संख्या इतनी ही बताई गई है। ‘‘पण्णासा धकनि पंचसतानि जातकंति वेदितब्बं।‘‘ अट्ठसालिनी की निदान कथा में भी -पण्णासाधिकानि पंचजातकसतानि‘‘ है। संख्या मोटे तौर पर ही निश्चित की गई है। जातक के वर्तमान रूप में 547 जातक कहनियाँ पाई जाती हैं। पर यह संख्या भी केवल ऊपरी है। जातकट्ठवण्णनाकार ने विषयवस्तु की दृष्टि से इन्हें पाँच वर्गों में विभाजित किया है-
 
*1. '''पच्चुपन्नवत्थु''' - बुद्ध की वर्तमान कथाओं का संग्रह है।
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