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'''आमेर दुर्ग''' ([[जिसे आमेर का किला]] या [[आंबेर का किला]] नाम से भी जाना जाता है) [[भारत]] के [[राजस्थान]] राज्य की राजधानी [[जयपुर]] के [[आमेर]] क्षेत्र में एक ऊंची पहाड़ी पर स्थित एक पर्वतीय दुर्ग है और जयपुर नगर का प्रधान पर्यटक आकर्षण है। आमेर का कस्बा मूल रूप से स्थानीय [[मीणा]]ओं द्वारा बसाया गया था, जिस पर कालांतर में [[कछवाहा]] राजपूत [[मान सिंह प्रथम]] ने राज किया व इस दुर्ग का निर्माण करवाया। यह दुर्ग व महल अपने कलात्मक विशुद्ध हिन्दू वास्तु शैली के घटकों के लिये भी जाना जाता है। यहां की विशाल प्राचीरों, द्वारों की शृंखलाओं एवं पत्थर के बने रास्तों से भरा ये दुर्ग पहाड़ी के ठीक नीचे बने [[मावठा सरोवर]] को देखता हुआ प्रतीत होता है।
 
लाल बलुआ पत्थर एवं संगमर्मर से निर्मित यह आकर्षक एवं भव्य दुर्ग पहाड़ी के चार स्तरों पर बना हुआ है, जिसमें से प्रत्येक में विशाल प्रांगण हैं। इसमें दीवान-ए-आम अर्थात जन साधारण का प्रांगण, दीवान-ए-खास अर्थात विशिष्ट प्रांगण, शीश महल या जय मन्दिर एवं सुख निवास आदि भाग हैं। सुख निवास भाग में जल धाराओं से कृत्रिम रूप से बना शीतल वातावरण यहां की भीषण ग्रीष्म-ऋतु में अत्यानन्ददायक होता था। यह महल [[कछवाहा]] [[राजपूत]] महाराजाओं एवं उनके परिवारों का निवास स्थान हुआ करता था। दुर्ग के भीतर महल के मुख्य प्रवेश द्वार के निकट ही इनकी आराध्या चैतन्य पंथ की [[देवी शिला]] को समर्पित एक मन्दिर बना है। आमेर एवं [[जयगढ़ दुर्ग]] [[अरावली पर्वतमाला]] के एक पर्वत के ऊपर ही बने हुए हैं व एक गुप्त पहाड़ी सुरंग के मार्ग से जुड़े हुए हैं।
 
====== अन्य कथा ======
राजा [[रामचन्द्र]] के पुत्र [[कुश]] के वंशज शासक [[नरवर दुर्ग|नरवर]] के सोढ़ा सिंह के पुत्र दुलहराय ने लगभग सन् ११३७ ई॰ में तत्कालीन रामगढ़ (ढूंढाड़) में मीणों युद्ध में मात दी तथा बाद में [[दौसा]] के बड़गूजरों को पराजित कर कछवाहा वंश का राज्य स्थापित किया। तब उन्होंने रामगढ़ मे अपनी कुलदेवी जमुवाय माता का मंदिर बनवाया। इनके के पुत्र कांकिल देव ने सन् १२०७ में आमेर पर राज कर रहे मीणाओं को परास्त कर अपने राज्य मे विलय कर लिया व उसे अपनी राजधानी बनाया। तभी से आमेर कछवाहों की राजधानी बना रहा और नवनिर्मित नगर जयपुर के निर्माण&nbsp;तक बना रहा। इसी वंश का शासक पृथ्वीराज मेवाड़ के [[महाराणा सांगा]] का सामन्त था जो खानवा के युद्ध में सांगा की ओर से लडा था। पृथ्वीराज स्वयं [[गलताजी|गलता]] के [[श्री वैष्णव संप्रदाय]] के संत [[कृष्णदास (बहुविकल्पी)|कृष्णदास पयहारी]] के अनुयायी थे । इन्हीं के पुत्र सांगा ने [[सांगानेर]] कस्बा बनाया।<ref>{{cite web|url=http://connectrajasthan.com/history-of-amer-kachwah/|title=आमेर के कच्छवाहो का इतिहास|accessmonthday=|accessdate= १२ मार्च २०१८ |last=|first=|authorlink=|coauthors= |date=|year=|month=|format=|work= |publisher=|pages= |language=|archiveurl=|archivedate=|quote=}}</ref>
 
==अभिन्यास==
आमेर दुर्ग बहुत सी हिन्दी चलचित्र (बॉलीवुड) जगत की फिल्मों में दिखाया गया है। इसका ताजा उदाहरण है [[बाजीराव मस्तानी (फ़िल्म)|बाजीराव मस्तानी]] जिसमें अभिनेत्री [[दीपिका पादुकोण]] का [[कत्थक नृत्य]] - ''मोहे रंग दो लाल..''। नामक गीत पर इसी दुर्ग को पृष्ठभूमि में रखकर किया गया है। इसका मंचन केसर क्यारी बगीचे में हुआ है।
 
इसके अलावा [[मुगल-ए-आज़म (1960 फ़िल्म)|मुगले आज़म]], [[जोधा अकबर (2008 फ़िल्म)|जोधा अकबर]], [[शुद्ध देसी रोमांस]], [[भूल भुलैया (2007 फ़िल्म)|भूल भुलैया]]<ref>{{cite web|first1=नूपुर|last1=अग्रवाल|title=19-hindi-movies-to-watch-before-you-visit-jaipur|trans_title=जयपुर भ्रमण से पूर्व देखने योग्य १९ फिल्में|url=https://theculturetrip.com/asia/india/articles/19-hindi-movies-to-watch-before-you-visit-jaipur/|website=१४ दिसम्बर २०१६|publisher=द कल्चर ट्रिप|accessdate=1 दिसम्बर 2017}}</ref><ref>{{cite web|title=Amber Fort from eye of Bollywood|trans_title=आमेर दुर्ग - बॉलीवुड की दृष्टि में|url=https://jaipur.org/2016/08/05/amber-fort-from-eye-of-bollywood/|website=जयपुर.ऑर्ग|publisher=पिंक सिटी|accessdate=1 दिसम्बर 2017}}</ref> आदि कई [[हिन्दी सिनेमा|बॉलीवुड]] एवं कुछ [[हॉलीवुड|हॉलीवुड फ़िल्मों]] जैसे [[w:North West Frontier (film)|''नार्थ वेस्ट फ़्रन्टियर'']]<ref> {{cite web |url=https://jkroaming.com/2014/04/06/north-west-frontier/comment-page-1/
|title= नॉर्थ वैस्ट फ़्रण्टियर [NORTH WEST FRONTIER]
|accessmonthday= |accessdate= १२१ मार्च २०१८|last= रोज़|first= जॉन|authorlink= |coauthors= |date= ६ अप्रैल २०१४|year= |month=