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[[चित्र:Chauri chaura new photo.jpg|right|thumb|250px|चौरी-चौरा का शहीद स्मारक]]
[[चौरी चौरा]], [[उत्तर प्रदेश]] में [[गोरखपुर]] के पास का एक कस्बा है जहाँ 45 फ़रवरी 1922 को सेना से रिटायर्ड कर्नल भगवान सिंह यादव के नेतृत्व में पहलवान विक्रम सिंह यादव, मेघू तिवारी, रामप्रसाद मिश्रा, पहलवान कोमल यादव आदि 19 क्रांतिकारियोंभारतीयों ने ब्रिटिश सरकार की एक पुलिस चौकी को आग लगा दी थी जिससे उसमें छुपे हुए 22 पुलिस कर्मचारी जिन्दा जल के मर गए थे। इस घटना को '''चौरीचौरा काण्ड''' के नाम से जाना जाता है। इसी चौरीचौरा कांड ने भगत सिंह आदि युवाओं के क्रांति की आग भड़काई थी। इसके परिणामस्वरूप [[महात्मा गांधी|गांधीजी]] ने कहा था कि हिंसा होने के कारण [[असहयोग आन्दोलन]] उपयुक्त नहीं रह गया है और उसे वापस ले लिया था।<ref name="Vyas">{{cite book|author=Rajshekhar Vyas|title=Meri Kahani Bhagat Singh: Indian Freedom Fighter|url=http://books.google.com/books?id=uVhpBgAAQBAJ&pg=PA33|publisher=Neelkanth Prakashan|pages=33–|id=GGKEY:JE4WZ574KU2}}</ref> चौरी-चौरा कांड के अभियुक्तों का मुक़दमा पंडित मदन मोहन मालवीय ने लड़ा और उन्हें बचा ले जाना उनकी एक बड़ी सफलता थी।<ref name="'Mann'">{{cite book|author=Manju 'Mann'|title=Mahamana Pt Madan Mohan Malviya|url=http://books.google.com/books?id=NmVqCwAAQBAJ&pg=PA124|isbn=978-93-5186-013-6|pages=124–}}</ref>
 
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