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तकनीकों और विशेषताओं की बहुत सी किस्में कृषि के अन्तर्गत आती है, इसमें वे तरीके शामिल हैं जिनसे पौधे उगाने के लिए उपयुक्त भूमि का विस्तार किया जाता है, इसके लिए पानी के चैनल खोदे जाते हैं और सिंचाई के अन्य रूपों का उपयोग किया जाता है। [[खेती|कृषि योग्य भूमि]] पर फसलों को उगाना और चारागाहों और [[ग्रामीण काव्य|रेंजलैंड]] पर पशुधन को गड़रियों के द्वारा [[चरना|चराया जाना]], मुख्यतः कृषि से सम्बंधित रहा है। कृषि के भिन्न रूपों की पहचान करना व उनकी मात्रात्मक वृद्धि, पिछली शताब्दी में विचार के मुख्य मुद्दे बन गए।
विकसित दुनिया में यह क्षेत्र [[स्थायी कृषि|जैविक कृषिखेती]] (उदाहरण [[पर्माकल्चर]] या [[कार्बनिक खेती|कार्बनिक कृषि]]) से लेकर [[गहन कृषि]] (उदाहरण [[औद्योगिक कृषि]]) तक फैली है।
 
आधुनिक [[अग्रोनोमी|एग्रोनोमी]], [[पौधा प्रजनन|पौधों में संकरण]], [[कीटनाशक|कीटनाशकों]] और [[उर्वरक|उर्वरकों]] और तकनीकी सुधारों ने फसलों से होने वाले उत्पादन को तेजी से बढ़ाया है और साथ ही यह व्यापक रूप से पारिस्थितिक क्षति का कारण भी बना है और इसने मनुष्य के स्वास्थ्य पर ऋणात्मक प्रभाव डाला है। [[चयनात्मक प्रजनन]] और [[पशुपालन]] की आधुनिक प्रथाओं जैसे [[गहन सुअर खेती|गहन सूअर खेती]] (और इसी प्रकार के अभ्यासों को [[मुर्गा|मुर्गी]] पर भी लागू किया जाता है) ने [[मांस]] के उत्पादन में वृद्धि की है, लेकिन इससे [[पशु क्रूरता]], [[प्रतिजैविक|एंटीबायोटिक दवाओं]] के स्वास्थ्य प्रभाव, [[वृद्धि हार्मोन|वृद्धि होर्मोन]] और मांस के औद्योगिक उत्पादन में सामान्य रूप से काम में लिए जाने वाले रसायनों के बारे में मुद्दे सामने आये हैं।