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१५वीं [[शताब्दी]] के आरम्भ में [[भारत]] में लूट खसोट, छुआछूत, हिंदू-मुस्लिम झगडों आदि के कारण स्थितियाँ बड़ी अराजक बनी हुई थीं और भेरव नामक राक्षस का आतंक था। ऐसे विकट समय में पश्चिम राजस्थान के [[पोकरण]] नामक प्रसिद्ध नगर के पास रुणिचा नामक स्थान में [[तंवर]] वंशीय [[राजपूत]] और रुणिचा के शासक अजमाल जी के घर भादो शुक्ल पक्ष दूज के दिन विक्रम सम्वत् 1409 को बाबा रामदेव पीर अवतरित हुए (द्वारकानाथ ने राजा अजमल जी के घर अवतार लिया, जिन्होंने लोक में व्याप्त अत्याचार, वैर-द्वेष, [[छुआछूत]] का [[विरोध]] कर अछूतोद्धार का सफल आन्दोलन चलाया।जन्म स्थान-ग्राम उण्डू काश्मीर तहशिल शिव जिला बाडमेर राजस्थान
बाबा रामदेव जी का जन्म स्थान बाड़मेर जिले के शिव तहसील के अंदर गांव उंडू कश्मीर में हुआ था उनके पिता का नाम श्री शायर हो जी था और वह मेघवाल जाति के थे तत्पश्चात बाबा ने जैसलमेर जिले के पोकरण गांव के अंदर श्री अजमाल जी महाराज जो की तवर राजपूत थे उनके घर पर अवतार लिया
 
== परिचय ==
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