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[[चित्र:Smarth Brahmins (9969593914).jpg|right|thumb|300px|पश्चिमी भारत के स्मार्त ब्राह्मण (१८५५ से १८६२ के बीच का चित्र)]]
प्राचीन [[वैदिक साहित्य]] की विशाल परंपरा में अंतिम कड़ी [[सूत्र]]ग्रंथ हैं। यह सूत्र-साहित्य तीन प्रकार का है: '''[[श्रौतसूत्र]], गृह्यसूत्र तथा [[धर्मसूत्र]]'''।
 
 
== परिचय ==
[[चित्र:Vidyashankara Temple at Shringeri.jpg|right|thumb|300px|[[शृंगेरी शारदा पीठम]] का विद्याशंकर मन्दिर, स्मार्त परम्परा का ऐतिहासिक केन्द्र है।]]
[[शिक्षा]], [[कल्प]], [[व्याकरण]], [[निरुक्त]], [[छंद]] और [[ज्योतिष]] - ये छह [[वेदांग]] हैं। गृह्यसूत्र की गणना कल्पसूत्र में की गई है। अन्य पाँच वेदांगों के द्वारा स्मार्त कर्म की प्रक्रियाएँ नहीं जानी जा सकतीं। उन्हीं प्रक्रियाओं एवं विधियों को व्यवस्थित रूप से प्रकाशित करने के निमित्त आचार्यों एवं ऋषियों ने स्मार्त सूत्रों की रचना की है। इन स्मार्त सूत्रों के द्वारा सप्तपाकसंस्था एवं समस्त [[संस्कार|संस्कारों]] के विधान तथा नियमों का विस्तार के साथ विवेचन किया गया है।